पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी उलझी
महाराष्ट्र के पुणे जिले से सामने आए बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने एक बार फिर सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस सनसनीखेज मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे यह मामला और भी ज्यादा पेचीदा बनता जा रहा है। पुणे के एक जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश के तार अब और भी गहरे जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस मामले में मृतक के पिता विशाल अग्रवाल ने न्याय की गुहार लगाते हुए कई गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।
घटना के महीनों बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार का दर्द कम नहीं हुआ है, बल्कि उनका गुस्सा और अधिक बढ़ गया है। पिता का साफ तौर पर कहना है कि उनके बेटे की हत्या कोई साधारण वारदात नहीं थी, बल्कि यह बेहद सोची-समझी साजिश के तहत की गई एक सुनियोजित हत्या थी। इस मामले में पुलिस ने अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।
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मंगेतर के पूरे परिवार पर हत्या की साजिश का शक
मृतक केतन अग्रवाल के पिता विशाल अग्रवाल ने खुलकर अपनी बात रखी है और कहा है कि उन्हें शक है कि इस जघन्य अपराध में केवल मंगेतर सिया गोयल ही नहीं, बल्कि उसके परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर यह सच है कि सिया ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप शादी कर ली थी, तो फिर उसके परिवार ने उसकी सगाई और शादी उनके बेटे के साथ तय करने की जिद क्यों की थी?
विशाल अग्रवाल ने मीडिया और जांच एजेंसियों के सामने अपनी आशंका जताते हुए कहा, "मुझे पूरा शक है कि इस हत्या की साजिश के पीछे सिया के पिता, मां, भाई, चाचा और चाची का भी हाथ हो सकता है। फिलहाल मैंने अदालत से चार्जशीट की कॉपी हासिल करने के लिए अर्जी दी है। जैसे ही मुझे दस्तावेजों की कॉपी मिलेगी और मैं उसका अध्ययन कर लूंगा, उसके बाद ही इस बारे में विस्तार से और ठोस बातें सामने रख पाऊंगा।"
पुलिस चार्जशीट में खुलासे और फेक इंस्टाग्राम आईडी का खेल
पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए शनिवार को एक बहुत बड़ी कार्रवाई की थी। पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल, चेतन चौधरी और उनके साथी रितेश हांगे के खिलाफ अदालत में 5,000 से अधिक पन्नों की बेहद विस्तृत चार्जशीट दायर की है। इस चार्जशीट में हत्या की रात की एक-एक कड़ी को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जोड़ा गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने 'माही' नाम से एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट तैयार किया था। इसी फेक आईडी का इस्तेमाल करके केतन अग्रवाल को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि वह 18 जून को सिया गोयल को लेकर पुणे के ऐतिहासिक लोहागढ़ किले पर जाएं। किले पर पहुंचने के बाद एक सोची-समझी साजिश के तहत केतन को धक्का देकर खाई में गिरा दिया गया, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा की पुरजोर मांग
अपने बेटे की बेरहमी से ली गई जान के बाद से टूटा हुआ परिवार लगातार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़ित पिता विशाल अग्रवाल ने कुछ समय पहले राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से भी मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मांग की थी कि इस पूरे मामले की सुनवाई किसी सामान्य अदालत के बजाय फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाई जानी चाहिए, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द और कड़ी सजा मिल सके।
"मैंने मुख्यमंत्री से मिलकर यह अपील की थी कि इस मामले की सुनवाई तेजी से हो और जाने-माने वकील उज्ज्वल निकम को इस केस के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जाए। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से इस पर कोई अंतिम और ठोस आदेश सामने नहीं आया है, लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार जल्द ही इस संबंध में जरूरी नोटिफिकेशन जारी करेगी ताकि मेरे बेटे को सही मायनों में न्याय मिल सके।"— विशाल अग्रवाल, केतन अग्रवाल के पिता
परिजनों का एकमात्र उद्देश्य अब यही है कि उनके बेटे के हत्यारों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए और उन्हें ऐसी सजा दी जाए जो समाज में एक कड़ा संदेश बने। पिता का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और अंतिम सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहेंगे।
कानूनी प्रक्रिया और आगे की दिशा
केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद पुणे और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और आपसी रिश्तों की विश्वसनीयता को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पुलिस द्वारा दाखिल की गई पांच हजार पन्नों की चार्जशीट में कई तकनीकी सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), और गवाहों के बयान शामिल हैं। अदालत में इन दस्तावेजों के आधार पर जल्द ही सुनवाई की अगली तारीख तय की जाएगी, जिसमें आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
जैसे-जैसे अदालत में चार्जशीट के पन्ने पलटे जाएंगे, इस सनसनीखेज मामले में और भी कई छुपे हुए राज बाहर आने की पूरी संभावना है। फिलहाल हर किसी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस हाई-प्रोफाइल और दिल दहला देने वाले मामले में क्या रुख अपनाती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।








