रूस के सर्वोच्च स्तर पर हुई भारत के प्रधानमंत्री की सराहना
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के पटल पर भारत और रूस के पुराने और गहरे रिश्ते किसी से छिपे नहीं हैं। इसी कड़ी में एक बार फिर मॉस्को से आई एक अहम कूटनीतिक हलचल ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफों के पुल बांधे। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है।
बैठक के दौरान रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत और दूरदर्शी राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण ही भारत-रूस के द्विपक्षीय संबंध हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। दोनों देशों के बीच का आपसी भरोसा वैश्विक मंच पर एक मिसाल बन चुका है। पुतिन ने विशेष तौर पर व्यापारिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह पिछले कुछ वर्षों में दोनों मुल्कों के बीच आर्थिक सहयोग में अभूतपूर्व तेजी आई है।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर की मॉस्को यात्रा के मायने
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी सामरिक और कूटनीतिक यात्राओं के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। उनकी यह रूस यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक धार देने के उद्देश्य से बेहद महत्वपूर्ण रही। मॉस्को में रूसी शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई वार्ताओं में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष अनुसंधान और आपसी व्यापार को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा की गई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने भी रूस के साथ भारत के पारंपरिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। वैश्विक स्तर पर पश्चिमी देशों के तमाम प्रतिबंधों और दबावों के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस के साथ तेल और अन्य जरूरी व्यापारिक कमोडिटीज का आयात जारी रखा है। इस स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना दुनिया भर के भू-राजनीतिक विश्लेषक कर रहे हैं और इसका श्रेय सीधे तौर पर नई दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व को दिया जाता है.
व्यापारिक मोर्चे पर लगातार बढ़ रहा है भारत और रूस का दायरा
पिछले कुछ वर्षों में भारत और रूस के बीच आपसी व्यापार में कई गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ने के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन काफी हद तक बदला है। इसके अलावा फर्टिलाइजर, कोयला, और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की सप्लाई चेन को भी मजबूत किया गया है। अमेरिकी डॉलर के बजाय राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार करने की संभावनाओं पर भी दोनों देश लगातार काम कर रहे हैं।
राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देना रूस की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत तालमेल और आपसी संवाद ने दोनों देशों के बीच आने वाली हर कूटनीतिक बाधा को चुटकियों में सुलझा दिया है। मॉस्को और नई दिल्ली के बीच यह आपसी समझ क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए बेहद आवश्यक मानी जा रही है।
"प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हमारे संबंध हमेशा से भरोसेमंद और बेहद मजबूत रहे हैं। उनकी नीतियों की वजह से ही आज भारत और रूस का व्यापार और आपसी सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है।" — व्लादिमीर पुतिन, राष्ट्रपति, रूस
वैश्विक उथल-पुथल के बीच मजबूत होता द्विपक्षीय गठजोड़
आज के दौर में जब दुनिया दो ध्रुवों में बंटती हुई नजर आ रही है, भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को साबित करके दिखाया है। भारत ने बिना किसी दबाव के अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है, और रूस के साथ उसकी दोस्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पश्चिमी देशों की तमाम आपत्तियों के बावजूद भारत ने रूस के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को न केवल बनाए रखा, बल्कि उसे और अधिक व्यावहारिक और मजबूत बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि रूस के सर्वोच्च नेतृत्व द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की खुले तौर पर सराहना करना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक राजनीति में भारत का कद लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच तकनीक साझा करने, रक्षा उत्पादन और अंतरिक्ष के क्षेत्र में कई बड़े समझौते होने की पूरी उम्मीद है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को और अधिक मजबूती मिलेगी।







