नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आज राजनीतिक हलचल तब बहुत तेज हो गई जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर की तरफ मार्च निकाल रहे थे। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और सुरक्षा का हवाला देते हुए हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिसकर्मियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। हालात को काबू में करने के लिए भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात किया गया था।
घटनास्थल पर मौजूद हमारे संवाददाताओं के मुताबिक, जब पुलिस ने राहुल गांधी को रोकने की कोशिश की तो उन्होंने गाड़ी पर पैर अड़ा दिया और आगे बढ़ने की जिद पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन उठाया और अपने साथ ले जाने के लिए मजबूर हो गए। इस पूरी हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान सड़क पर भारी जाम लग गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस का कहना था कि इस मार्च के लिए पहले से कोई अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी।
चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध
इस पूरी घटना के बाद देश भर की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की गला घोंटने की कोशिश बताया है। बिहार के कैमूर जिले के रामपुर में भी इंडिया गठबंधन ने ‘ज्ञानेश भगाओ-लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की नीतियों और कार्यप्रणाली के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्षी दलों का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। देश के कई अन्य हिस्सों में भी छात्रों और युवाओं ने इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया है।
कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ आज देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं ने इसे 'ब्लैक डे' के रूप में मनाने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि उनके शांतिपूर्ण मार्च को कुचलने के लिए पुलिस बल का बेजा इस्तेमाल किया गया है। दूसरी ओर, सत्ताधारी दल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और कहा है कि कानून का पालन करना हर नागरिक और नेता की जिम्मेदारी है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
हिरासत के बाद रिहाई और आगे की राजनीतिक रणनीति
कुछ घंटों की पूछताछ और हिरासत के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पुलिस ने रिहा कर दिया। रिहाई के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया कि उनका यह विरोध प्रदर्शन यहीं रुकने वाला नहीं है। पार्टी हाईकमान आने वाले दिनों में अपनी रणनीति को और तेज करने पर विचार कर रहा है। संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रहे हैं ताकि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों में इसका फायदा उठाया जा सके।
जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। आम नागरिकों को भी इस विरोध प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक जाम और परेशानियों का सामना करना पड़ा। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले की हर बड़ी अपडेट पर नजर बनाए हुए है और हम आपको आगे भी जमीनी सच से अवगत कराते रहेंगे।
छात्रों के प्रदर्शन और अन्य स्थानीय मुद्दे भी सुर्खियों में
इस राष्ट्रीय राजनीतिक ड्रामे के बीच देश के अन्य हिस्सों में भी छोटे-बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। कई जगहों पर एलएलबी के छात्रों ने अपने रिजल्ट घोषित न होने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन को ज्ञापन सौंपे। हालांकि राहुल गांधी की गिरफ्तारी और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन ने तमाम दूसरी खबरों को पीछे छोड़ दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और ज्यादा गहरा सकता है, जिससे देश का राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहेगा।






