नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में आज दिन भर चले सियासी घमासान के बाद दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) के 50 से ज्यादा सांसदों को हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई आकाशवाणी भवन और संसद मार्ग के पास लगभग 8 घंटे तक चले धरने के बाद की गई। पुलिस ने सभी नेताओं को बसों में भरकर किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन भेज दिया है।
संसद से निर्वाचन सदन तक मार्च और पुलिस की बैरिकेडिंग
विपक्षी सांसदों ने सुबह संसद भवन से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) तक विरोध मार्च निकालने का फैसला किया था। विपक्षी दल चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि, जैसे ही मार्च संसद मार्ग के पास पहुंचा, दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद माहौल गरमा गया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने वहीं सड़क पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। नेताओं का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन सरकार के इशारे पर पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया।
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8 घंटे तक चला सड़क पर धरना, भारी सुरक्षा बल तैनात
आकाशवाणी भवन के सामने दोपहर से लेकर देर शाम तक विपक्ष के सांसद और कार्यकर्ता डटे रहे। धरने में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए। धरना स्थल पर भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात रहे। शाम ढलते ही पुलिस ने इलाके में निषेधाज्ञा (Section 163 BNSS) का हवाला देते हुए धरना स्थल खाली कराने की चेतावनी दी और इसके बाद एक-एक कर सभी नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया।
कांग्रेस का कड़ा रुख: 'लोकतंत्र की आवाज दबाई नहीं जा सकती'
हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस ने कहा, "संसद के चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़क पर घसीटना और चुनाव आयोग से सवाल पूछने पर हिरासत में लेना तानाशाही है। देश की जनता सब कुछ देख रही है और सब याद रखा जाएगा।" वहीं, राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान कहा कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है।
सरकारी पक्ष और प्रशासन का बयान
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि संसद मार्ग और नई दिल्ली क्षेत्र में किसी भी तरह के अनधिकृत प्रदर्शन या घेराव की अनुमति नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात को सुचारू रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस प्रदर्शन पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष केवल नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि उन्हें जनता के बीच जाकर काम करना चाहिए।
फिलहाल हिरासत में लिए गए सभी सांसदों को किंग्सवे कैंप ले जाया गया है, जहां कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें रिहा किए जाने की संभावना है। इस घटनाक्रम के बाद देश भर के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

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