होम/देश/पर्यटन की बदली परिभाषा: अब किलों की फोटो नहीं, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अनुभव चाहते हैं सैलानी
देशपढ़ने में समय: 5 मिनट

पर्यटन की बदली परिभाषा: अब किलों की फोटो नहीं, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अनुभव चाहते हैं सैलानी

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार ने जयपुर में क्रिएटर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि आज का पर्यटक केवल स्मारकों के दर्शन नहीं करना चाहता, बल्कि वह ग्रामीण जीवन और स्थानीय संस्कृति को गहराई से महसूस करना चाहता है।
✍️
नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•28 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
पर्यटन की बदली परिभाषा: अब किलों की फोटो नहीं, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अनुभव चाहते हैं सैलानी
📷 पर्यटन की बदली परिभाषा: अब किलों की फोटो नहीं, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अनुभव चाहते हैं सैलानी — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में विशेष क्रिएटर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया।
  • उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि पर्यटन का मतलब अब केवल ऐतिहासिक इमारतों में जाकर तस्वीरें खिंचवाना नहीं रह गया है।
  • सैलानियों की बढ़ती रुचि को देखते हुए अब ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे और अनछुए गंतव्यों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

विश्व पर्यटन दिवस पर बदली सोच: फोटो से आगे बढ़कर अनुभव की तलाश में निकले सैलानी

समय के साथ लोगों के घूमने-फिरने का अंदाज और नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां छुट्टियां बिताने का मतलब ऐतिहासिक स्मारकों, संग्रहालयों और प्रसिद्ध इमारतों की टिकट खरीदकर वहां तस्वीरें खिंचवाना भर होता था, वहीं आज का आधुनिक पर्यटक इससे कहीं आगे निकल आया है। अब लोग केवल बाहरी सुंदरता देखकर लौटने के बजाय उस जगह की संस्कृति, वहां के लोगों की जीवनशैली और मिट्टी की खुशबू को खुद में उतारना चाहते हैं।

इसी बदलाव को रेखांकित करते हुए पर्यटन विभाग ने राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में एक विशेष क्रिएटर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर से आए सौ से अधिक ट्रैवल ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स, होटल इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गज और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने इस बात पर जोर दिया कि अब पर्यटन उद्योग को पारंपरिक लीक से हटकर कुछ नया और अनूठा सोचना होगा।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज का ट्रैवलर किसी भी जगह पर जाकर सिर्फ एक दर्शक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह उस संपूर्ण अनुभव का हिस्सा बनना चाहता है। यही वजह है कि आज के दौर में रूरल टूरिज्म यानी ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे जैसी अवधारणाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जहां सैलानी स्थानीय परिवारों के बीच रहकर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अनुभव करते हैं।

संबंधित खबरें

मंकीपॉक्स के नए वेरिएंट से निपटने में मददगार बनेगी टेक्नोलॉजी, एआई बताएगा संक्रमण के संभावित हॉटस्पॉट

मंकीपॉक्स के नए वेरिएंट से निपटने में मददगार बनेगी टेक्नोलॉजी, एआई बताएगा संक्रमण के संभावित हॉटस्पॉट

बैंक हड़ताल टलने से आम जनता को बड़ी राहत: एसबीआई ने आधी रात को जारी किया अहम अपडेट

बैंक हड़ताल टलने से आम जनता को बड़ी राहत: एसबीआई ने आधी रात को जारी किया अहम अपडेट

सिनेमाघरों में एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन और पोस्टर्स का विरोधाभास: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने उठाए तीखे सवाल

सिनेमाघरों में एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन और पोस्टर्स का विरोधाभास: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने उठाए तीखे सवाल

बिहार में लगातार बढ़ रहीं बदसलूकी और वायरल वीडियो की घटनाएं: पुलिस ने की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां, जानिए क्या है पूरा सच

बिहार में लगातार बढ़ रहीं बदसलूकी और वायरल वीडियो की घटनाएं: पुलिस ने की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां, जानिए क्या है पूरा सच

इंसानों का खात्मा कर देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस? मार्क जुकरबर्ग और एनवीडिया चीफ के बयानों ने खोली तबाही के दावों की पोल

इंसानों का खात्मा कर देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस? मार्क जुकरबर्ग और एनवीडिया चीफ के बयानों ने खोली तबाही के दावों की पोल

एशियन गेम्स में बड़ा उलटफेर: बिना एक भी गेंद फेंके सेमीफाइनल में पहुंचा पाकिस्तान, जानें क्या है पूरा नियम

एशियन गेम्स में बड़ा उलटफेर: बिना एक भी गेंद फेंके सेमीफाइनल में पहुंचा पाकिस्तान, जानें क्या है पूरा नियम

बिहार से बाहर नौकरी देने को क्यों मजबूर हुए प्रशांत किशोर? खुद बताई अपनी ही नीति के खिलाफ जाने की बड़ी वजह

बिहार से बाहर नौकरी देने को क्यों मजबूर हुए प्रशांत किशोर? खुद बताई अपनी ही नीति के खिलाफ जाने की बड़ी वजह

शामली में आध्यात्मिक बयार: सपा नेता राजेश्वर बंसल के आयोजन में संत कौशल जी महाराज ने बताए जीवन के मूल्य

शामली में आध्यात्मिक बयार: सपा नेता राजेश्वर बंसल के आयोजन में संत कौशल जी महाराज ने बताए जीवन के मूल्य

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर तय होगा अगला सफर

डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत से कोई भी अछूता नहीं है। आज लोग किसी भी खूबसूरत जगह की तलाश किताबों या ट्रेवल एजेंटों के जरिए करने के बजाय इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब वीडियो और ब्लॉग्स के माध्यम से करते हैं। सरकार ने भी इस बात को गंभीरता से स्वीकार किया है कि पर्यटन के प्रचार-प्रसार में इन डिजिटल रचनाकारों की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है।

डिप्टी सीएम ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने खुद इन ट्रैवल ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बैठकर लंबी चर्चा की है। इन युवाओं को बखूबी पता है कि कौन सा कंटेंट लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है और किस तरह की रील्स पर दर्शकों का सबसे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। पारंपरिक सरकारी बैठकों से आगे बढ़कर अब सरकार ने इन डिजिटल रचनाकारों के साथ मिलकर पर्यटन की अगली रणनीति तैयार करने का फैसला किया है।

"आज का पर्यटक सिर्फ मॉन्यूमेंट देखकर फोटो खींचकर वापस नहीं आना चाहता। लोग ग्रामीण परिवेश, होमस्टे, स्थानीय खान-पान और वहां की संस्कृति को जीना चाहते हैं। पर्यटन की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है और हम कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर इसके अगले चरण को तय करेंगे।" — दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री, राजस्थान

राजस्थान के अनछुए कोनों को दुनिया के सामने लाने की अनूठी पहल

ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए दुनियाभर में मशहूर राजस्थान के पास संस्कृति का ऐसा खजाना है जिसके कई हिस्से अभी भी पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब उन हिडन डेस्टिनेशंस को दुनिया के सामने लाना है, जहां तक अभी तक पर्यटकों की पहुंच नहीं बन पाई है। जयपुर के परकोटे, हवामहल और पारंपरिक बाजारों के अलावा प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जिनकी अपनी एक अलग और अनूठी पहचान है।

उदाहरण के तौर पर बाड़मेर, पुष्कर, जैसलमेर, जोधपुर के अलावा डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जैसे दक्षिणी जिलों के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता को एक्सप्लोर करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन खूबसूरत मगर कम चर्चित जगहों पर पर्यटन पहुंचने से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की असली आत्मा को बचाने का प्रयास

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के पल तलाशने वाले सैलानी अब महानगरों की चकाचौंध छोड़कर गांवों की तरफ रुख कर रहे हैं। देवमाली जैसे गांवों का जिक्र करते हुए सरकार ने यह संदेश दिया है कि आज भी देश के कई ऐसे कोने हैं जहां लोग आधुनिकता की अंधी दौड़ से दूर अपनी प्राचीन परंपराओं और कच्चे घरों के साथ पूरी सादगी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

यही ग्रामीण जीवन शैली आज के समय में हमारे टूरिज्म की असली ताकत और पहचान बन चुकी है। सरकार का यह प्रयास है कि इन सांस्कृतिक धरोहरों और कला-संस्कृति को बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।

पर्यटन विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिग्गज हुए सम्मानित

इस भव्य कॉन्क्लेव के दौरान पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने और इसके विकास में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले कई दिग्गजों को सम्मानित किया गया। फिक्की और PHDCCI की पर्यटन उप-समितियों के चेयरमैन कुलदीप सिंह चंदेला को राजस्थान के पर्यटन उद्योग को एक विधिवत इंडस्ट्री का दर्जा दिलाने में उनके अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इसके अलावा कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जयपुर के प्रसिद्ध चित्रकार रामू रामदेव, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने वाले देवांग अग्रवाल, अपरंपरागत पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा देने वाले अभिमन्यु सिंह और सामाजिक तथा ग्राम पर्यटन के विकास में मिसाल कायम करने वाले श्याम सुंदर पालीवाल को भी सम्मानित किया गया। इन सभी हस्तियों के प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करते हैं, तो परिणाम हमेशा बेहतरीन आते हैं।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
✍️

नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस

सत्यापित संपादकीय डेस्क

राजनीतिक, नीतिगत एवं राष्ट्रीय सरोकार रिपोर्टिंग टीम

द फ्रीलांस की राष्ट्रीय संपादकीय डेस्क देश की राजनीति, संसद, नीतिगत फैसलों, केंद्रीय योजनाओं और जनसरोकार से जुड़े बड़े मुद्दों पर 24/7 निष्पक्ष, तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग करती है। यह टीम दोहरे तथ्य-सत्यापन के कठोर सिद्धांतों का पालन करती है।

संबंधित खबरें (Related Articles)

मंकीपॉक्स के नए वेरिएंट से निपटने में मददगार बनेगी टेक्नोलॉजी, एआई बताएगा संक्रमण के संभावित हॉटस्पॉटNATIONAL

मंकीपॉक्स के नए वेरिएंट से निपटने में मददगार बनेगी टेक्नोलॉजी, एआई बताएगा संक्रमण के संभावित हॉटस्पॉट

28 सित॰
बैंक हड़ताल टलने से आम जनता को बड़ी राहत: एसबीआई ने आधी रात को जारी किया अहम अपडेटNATIONAL

बैंक हड़ताल टलने से आम जनता को बड़ी राहत: एसबीआई ने आधी रात को जारी किया अहम अपडेट

28 सित॰
सिनेमाघरों में एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन और पोस्टर्स का विरोधाभास: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने उठाए तीखे सवालNATIONAL

सिनेमाघरों में एंटी-स्मोकिंग विज्ञापन और पोस्टर्स का विरोधाभास: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने उठाए तीखे सवाल

28 सित॰
बिहार में लगातार बढ़ रहीं बदसलूकी और वायरल वीडियो की घटनाएं: पुलिस ने की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां, जानिए क्या है पूरा सचNATIONAL

बिहार में लगातार बढ़ रहीं बदसलूकी और वायरल वीडियो की घटनाएं: पुलिस ने की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां, जानिए क्या है पूरा सच

28 सित॰
इंसानों का खात्मा कर देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस? मार्क जुकरबर्ग और एनवीडिया चीफ के बयानों ने खोली तबाही के दावों की पोलNATIONAL

इंसानों का खात्मा कर देगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस? मार्क जुकरबर्ग और एनवीडिया चीफ के बयानों ने खोली तबाही के दावों की पोल

28 सित॰
एशियन गेम्स में बड़ा उलटफेर: बिना एक भी गेंद फेंके सेमीफाइनल में पहुंचा पाकिस्तान, जानें क्या है पूरा नियमNATIONAL

एशियन गेम्स में बड़ा उलटफेर: बिना एक भी गेंद फेंके सेमीफाइनल में पहुंचा पाकिस्तान, जानें क्या है पूरा नियम

28 सित॰
बिहार से बाहर नौकरी देने को क्यों मजबूर हुए प्रशांत किशोर? खुद बताई अपनी ही नीति के खिलाफ जाने की बड़ी वजहNATIONAL

बिहार से बाहर नौकरी देने को क्यों मजबूर हुए प्रशांत किशोर? खुद बताई अपनी ही नीति के खिलाफ जाने की बड़ी वजह

28 सित॰
शामली में आध्यात्मिक बयार: सपा नेता राजेश्वर बंसल के आयोजन में संत कौशल जी महाराज ने बताए जीवन के मूल्यNATIONAL

शामली में आध्यात्मिक बयार: सपा नेता राजेश्वर बंसल के आयोजन में संत कौशल जी महाराज ने बताए जीवन के मूल्य

28 सित॰