विश्व पर्यटन दिवस पर बदली सोच: फोटो से आगे बढ़कर अनुभव की तलाश में निकले सैलानी
समय के साथ लोगों के घूमने-फिरने का अंदाज और नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां छुट्टियां बिताने का मतलब ऐतिहासिक स्मारकों, संग्रहालयों और प्रसिद्ध इमारतों की टिकट खरीदकर वहां तस्वीरें खिंचवाना भर होता था, वहीं आज का आधुनिक पर्यटक इससे कहीं आगे निकल आया है। अब लोग केवल बाहरी सुंदरता देखकर लौटने के बजाय उस जगह की संस्कृति, वहां के लोगों की जीवनशैली और मिट्टी की खुशबू को खुद में उतारना चाहते हैं।
इसी बदलाव को रेखांकित करते हुए पर्यटन विभाग ने राजधानी जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में एक विशेष क्रिएटर्स कॉन्क्लेव का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में देश भर से आए सौ से अधिक ट्रैवल ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स, होटल इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गज और बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं उप मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने इस बात पर जोर दिया कि अब पर्यटन उद्योग को पारंपरिक लीक से हटकर कुछ नया और अनूठा सोचना होगा।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज का ट्रैवलर किसी भी जगह पर जाकर सिर्फ एक दर्शक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वह उस संपूर्ण अनुभव का हिस्सा बनना चाहता है। यही वजह है कि आज के दौर में रूरल टूरिज्म यानी ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे जैसी अवधारणाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है, जहां सैलानी स्थानीय परिवारों के बीच रहकर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का अनुभव करते हैं।
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सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर तय होगा अगला सफर
डिजिटल युग में सोशल मीडिया की ताकत से कोई भी अछूता नहीं है। आज लोग किसी भी खूबसूरत जगह की तलाश किताबों या ट्रेवल एजेंटों के जरिए करने के बजाय इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब वीडियो और ब्लॉग्स के माध्यम से करते हैं। सरकार ने भी इस बात को गंभीरता से स्वीकार किया है कि पर्यटन के प्रचार-प्रसार में इन डिजिटल रचनाकारों की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है।
डिप्टी सीएम ने अपने संबोधन में बताया कि उन्होंने खुद इन ट्रैवल ब्लॉगर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बैठकर लंबी चर्चा की है। इन युवाओं को बखूबी पता है कि कौन सा कंटेंट लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है और किस तरह की रील्स पर दर्शकों का सबसे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। पारंपरिक सरकारी बैठकों से आगे बढ़कर अब सरकार ने इन डिजिटल रचनाकारों के साथ मिलकर पर्यटन की अगली रणनीति तैयार करने का फैसला किया है।
"आज का पर्यटक सिर्फ मॉन्यूमेंट देखकर फोटो खींचकर वापस नहीं आना चाहता। लोग ग्रामीण परिवेश, होमस्टे, स्थानीय खान-पान और वहां की संस्कृति को जीना चाहते हैं। पर्यटन की परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है और हम कंटेंट क्रिएटर्स के साथ मिलकर इसके अगले चरण को तय करेंगे।" — दीया कुमारी, उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री, राजस्थान
राजस्थान के अनछुए कोनों को दुनिया के सामने लाने की अनूठी पहल
ऐतिहासिक किलों और महलों के लिए दुनियाभर में मशहूर राजस्थान के पास संस्कृति का ऐसा खजाना है जिसके कई हिस्से अभी भी पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य अब उन हिडन डेस्टिनेशंस को दुनिया के सामने लाना है, जहां तक अभी तक पर्यटकों की पहुंच नहीं बन पाई है। जयपुर के परकोटे, हवामहल और पारंपरिक बाजारों के अलावा प्रदेश के कई जिले ऐसे हैं जिनकी अपनी एक अलग और अनूठी पहचान है।
उदाहरण के तौर पर बाड़मेर, पुष्कर, जैसलमेर, जोधपुर के अलावा डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जैसे दक्षिणी जिलों के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता को एक्सप्लोर करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन खूबसूरत मगर कम चर्चित जगहों पर पर्यटन पहुंचने से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं की असली आत्मा को बचाने का प्रयास
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के पल तलाशने वाले सैलानी अब महानगरों की चकाचौंध छोड़कर गांवों की तरफ रुख कर रहे हैं। देवमाली जैसे गांवों का जिक्र करते हुए सरकार ने यह संदेश दिया है कि आज भी देश के कई ऐसे कोने हैं जहां लोग आधुनिकता की अंधी दौड़ से दूर अपनी प्राचीन परंपराओं और कच्चे घरों के साथ पूरी सादगी से जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
यही ग्रामीण जीवन शैली आज के समय में हमारे टूरिज्म की असली ताकत और पहचान बन चुकी है। सरकार का यह प्रयास है कि इन सांस्कृतिक धरोहरों और कला-संस्कृति को बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
पर्यटन विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिग्गज हुए सम्मानित
इस भव्य कॉन्क्लेव के दौरान पर्यटन क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने और इसके विकास में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले कई दिग्गजों को सम्मानित किया गया। फिक्की और PHDCCI की पर्यटन उप-समितियों के चेयरमैन कुलदीप सिंह चंदेला को राजस्थान के पर्यटन उद्योग को एक विधिवत इंडस्ट्री का दर्जा दिलाने में उनके अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
इसके अलावा कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जयपुर के प्रसिद्ध चित्रकार रामू रामदेव, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने वाले देवांग अग्रवाल, अपरंपरागत पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा देने वाले अभिमन्यु सिंह और सामाजिक तथा ग्राम पर्यटन के विकास में मिसाल कायम करने वाले श्याम सुंदर पालीवाल को भी सम्मानित किया गया। इन सभी हस्तियों के प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर काम करते हैं, तो परिणाम हमेशा बेहतरीन आते हैं।








