राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद मौसम का बदला मिजाज
देश के कई हिस्सों से मानसूनी बादलों की वापसी के साथ ही मौसम का नया दौर शुरू हो चुका है। मरुधरा कहे जाने वाले राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी साफ तौर पर देखने को मिली है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्यभर में इस मानसूनी सीजन में सामान्य से लगभग 22 प्रतिशत कम पानी बरसा है। बारिश के इस भारी आंकड़े के गिरने का असर अब सीधे तौर पर अक्टूबर महीने के शुरुआती दिनों के मौसम पर पड़ रहा है। आमतौर पर सितंबर के आखिरी हफ्तों तक हल्की सिहरन और गुलाबी ठंडक की आहट शुरू हो जाती थी, लेकिन इस मर्तबा हालात बिल्कुल जुदा नजर आ रहे हैं।
सूरज की तपिश अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रही है और दिन के वक्त तेज धूप आम जनजीवन को परेशान कर रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि बादलों की बेरुखी और बारिश की भारी कमी के चलते वातावरण में नमी की मात्रा कम हुई है, जिसकी वजह से तापमान में गिरावट दर्ज नहीं की जा रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में लोग उमस और तीखी धूप से दो-चार हो रहे हैं। दिन के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है और पंखे-कूलर अभी भी अपनी पूरी रफ्तार से चल रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों के तापमान पर नजर डालें तो राज्य के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में पारा लगातार ऊपर बना हुआ है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पिलानी, चूरू, श्रीगंगानगर, जैसलमेर और फलोदी जैसे प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकॉर्ड किया जा रहा है। इनमें फलोदी क्षेत्र सबसे गर्म साबित हुआ है, जहां थर्मामीटर का पारा 38 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को छू रहा है। इतनी गर्मी अक्टूबर के महीने में अमूल्य तौर पर असहज करने वाली मानी जाती है।
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अक्टूबर महीने के लिए मौसम विभाग का नया पूर्वानुमान
मौसम विज्ञान केंद्र नई दिल्ली ने आगामी अक्टूबर महीने के लिए देश के तमाम हिस्सों के साथ-साथ राजस्थान का भी विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के अधिकांश इलाकों में इस पूरे महीने के दौरान दिन और रात का तापमान सामान्य से अधिक रहने की पूरी संभावना है। इसका मतलब साफ है कि अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही लोगों को ठंडक का जो अहसास होना चाहिए था, उसमें देरी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार शरद ऋतु की शुरुआत में थोड़ा विलंब हो सकता है क्योंकि वायुमंडल में गर्मी बनाए रखने वाली प्रवृत्तियां सक्रिय हैं। खासकर रात के समय तापमान में जो गिरावट आनी चाहिए, वह सामान्य से कम दर्ज की जाएगी। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि ठंडक पूरी तरह नदारद रहेगी। प्रदेश के कुछ चुनिंदा भौगोलिक क्षेत्रों में रात के वक्त हल्की और सुहानी ठंडक का अहसास जरूर बना रहेगा, लेकिन अधिकांश जिलों में लोगों को गर्मी से राहत पाने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मानसून की विदाई के बाद हवा की दिशा में होने वाले बदलाव और पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता ही अब आगे के मौसम की चाल तय करेगी। यदि अक्टूबर के मध्य में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में सक्रिय होता है, तभी तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है, अन्यथा उमस भरा मौसम बना रहने की ही अधिक आशंका है।
कहाँ कितनी रही गर्मी और कहाँ मिली हल्की राहत
राजस्थान के विभिन्न जिलों में मौसम का मिजाज अलग-अलग रंग दिखा रहा है। एक तरफ जहाँ पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके आग उगल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दक्षिणी और मैदानी इलाकों में रातों के समय हल्की ठंडक ने लोगों को थोड़ी राहत दी है। शेखावाटी अंचल के साथ-साथ उदयपुर और सिरोही जिलों में रात का न्यूनतम तापमान गिरकर 20 डिग्री सेल्सियस या उसके आसपास पहुंच गया है। यहाँ शाम ढलते ही मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने लगती है, जो सुबह के वक्त भी बनी रहती है।
इसके विपरीत, दिन के समय स्थिति बिल्कुल अलग होती है। राजधानी जयपुर समेत आसपास के मैदानी इलाकों में भी दोपहर की धूप काफी तीखी महसूस हो रही है। लोग घरों से बाहर निकलते वक्त छाते और ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेते नजर आ रहे हैं। मौसम में आ रही इस तरह की भिन्नता के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को खानपान और सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भौगोलिक विविधताओं वाले राजस्थान में इस तरह का मौसम संक्रमण काल के दौरान आम बात है, लेकिन इस बार मानसूनी बारिश की 22 प्रतिशत की भारी कमी ने इस अंतर को और अधिक स्पष्ट कर दिया है। मिट्टी में नमी की कमी के कारण धरती जल्दी गर्म हो जाती है और यही कारण है कि सूरज ढलने के बाद भी गर्मी का असर वातावरण में काफी देर तक बना रहता है।
राजसमंद और बूंदी में छिटपुट बारिश से बदला मिजाज
भले ही पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर मानसून कमजोर रहा हो, लेकिन पिछले कुछ घंटों के दौरान कुछ जिलों में बादलों की आवाजाही और हल्की बरसात ने लोगों को थोड़ी देर के लिए ही सही, राहत जरूर दी है। राजसमंद जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बुधवार दोपहर के बाद अचानक काले बादल घिर आए और झमाझम तो नहीं, लेकिन हल्की बौछारें जरूर पड़ीं। राजसमंद के आमेट इलाके में लगभग 16 मिलीमीटर पानी बरसा, जिससे आसपास के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई और हवा में ठंडक घुल गई।
राजसमंद से पहले 29 सितंबर की शाम से लेकर 30 सितंबर की सुबह के बीच बूंदी और टोंक जिलों के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई थी। बूंदी के नैनवां क्षेत्र में बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई और वहाँ 68 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके साथ ही टोंक जिले के चांदसेन इलाके में भी 65 मिलीमीटर तक बरसात रिकॉर्ड की गई। इन स्थानीय बारिश की घटनाओं से भले ही पूरे राज्य के औसत आंकड़ों पर बहुत बड़ा असर न पड़ा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर किसानों और आम नागरिकों को उमस भरी गर्मी से कुछ घंटों की राहत अवश्य मिली।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की छिटपुट और स्थानीय बारिश से खरीफ की फसलों को बहुत ज्यादा फायदा तो नहीं मिलता, लेकिन जिन इलाकों में पानी गिरा है, वहाँ की मिट्टी को नमी जरूर मिली है। हालांकि, अधिकांश किसान अब रबी की फसलों की बुवाई से पहले खेतों की तैयारी में जुट गए हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज उनके अनुकूल हो जाएगा।
भविष्य का अनुमान और कृषि तथा स्वास्थ्य पर असर
मौसम विभाग के नए अपडेट्स के मुताबिक, अक्टूबर के महीने में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके प्रभाव से विशेष तौर पर बीकानेर संभाग के कुछ चुनिंदा इलाकों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो पश्चिमी राजस्थान के उन इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी जो इन दिनों सबसे ज्यादा गर्मी और सूखे की मार झेल रहे हैं। हालांकि, संभाग के बाकी बचे हिस्सों में बारिश का यह दौर कमजोर ही रहने की उम्मीद है।
"इस साल मानसून के दौरान बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है, जिसका सीधा असर अक्टूबर के शुरुआती हफ्तों के तापमान पर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण कुछ संभागों में हल्की राहत मिल सकती है, लेकिन कुल मिलाकर तापमान सामान्य से ऊपर ही रहने के आसार हैं।" — मौसम विज्ञान केंद्र विशेषज्ञ, नई दिल्ली
बदलते मौसम के इस दौर में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। दिन में तेज गर्मी और रात में हल्की ठंडक के इस मिला-जुला मौसम में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। डॉक्टरों का सुझाव है कि लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, ताजा भोजन का सेवन करें और धूप में निकलते समय पूरी सावधानी बरतें। विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को इस बदलते मौसम के प्रभाव से बचाने के लिए विशेष देखभाल की जरूरत है।








