आर्थिक तंगी से जूझते हुए शॉर्टकट की राह पर निकला सब्जी विक्रेता
दैनिक जीवन की जद्दोजहद और लगातार बढ़ते कर्ज के बोझ ने कई बार साधारण इंसानों को ऐसे रास्तों पर ला खड़ा किया है, जहां कानून की सीमाएं टूट जाती हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पेट भरने के लिए सब्जी की लारी लगाने वाला एक आम युवक रातों-रात अमीर बनने और सिर पर चढ़ा कर्ज उतारने के लिए अपराध की अंधी गली में उतर गया। उसने अपनी मेहनत की कमाई पर भरोसा करने के बजाय अपराध का शॉर्टकट चुना और अपने ही घर को अवैध करेंसी छापने की फैक्ट्री में बदल दिया। इस सनसनीखेज खुलासे ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है कि सोशल मीडिया का किस तरह से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पुलिस को गुप्त स्रोतों से सटीक सूचना मिली कि रिहायशी इलाके के एक मकान के भीतर संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना मिलते ही सतर्क हुई खाकी ने बिना वक्त गंवाए एक विशेष योजना के तहत दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान जो कुछ सामने आया, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। एक साधारण से दिखने वाले घर के भीतर उच्च तकनीक वाले प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन और कंप्यूटर सेटअप के जरिए भारतीय मुद्रा की हूबहू नकल तैयार की जा रही थी। आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से इस अवैध कारोबार को अंजाम देना शुरू कर दिया था ताकि किसी को उस पर शक न हो सके।
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इंस्टाग्राम रील्स और टेलीग्राम से मिली जाली नोट छापने की ट्रेनिंग
आज के दौर में सोशल मीडिया मनोरंजन के साथ-साथ कई बार खतरनाक सीख का जरिया भी बन जाता है। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब आरोपी ने कबूल किया कि उसे इस घृणित अपराध का आइडिया किसी शातिर अपराधी से नहीं, बल्कि आम तौर पर स्क्रोल किए जाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मिला। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में आरोपी किशन सोलंकी ने खुलासा किया कि वह एक दिन सामान्य तरीके से इंस्टाग्राम पर रील्स देख रहा था, तभी उसकी फीड पर एक ऐसा वीडियो आया जिसमें जाली नोट तैयार करने की प्रक्रिया दिखाई जा रही थी। उस वीडियो के जरिए उसने न केवल उत्सुकतावश संपर्क किया, बल्कि बाद में टेलीग्राम ऐप के सुरक्षित और छिपे हुए चैटिंग फीचर्स का इस्तेमाल करके इस पूरे फरेब का ककहरा सीख लिया।
टेक्नोलॉजी के इस दौर में साइबर अपराधियों और जाली नोट बनाने वाले गिरोहों ने युवाओं को अपने जाल में फंसाने के लिए सोशल मीडिया को नया हथियार बना लिया है। आरोपी ने टेलीग्राम के माध्यम से उन लोगों से संपर्क साधा जो इस काले धंधे के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं। वहां उसे बटर पेपर की क्वालिटी, स्पेशल प्रिंटिंग पेपर और रंगों के सही संयोजन के बारे में बारीकी से समझाया गया। मास्टरमाइंड ने उसे बाकायदा ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया कि कैसे स्कैनर और प्रिंटर की मदद से असली दिखने वाले नोट तैयार किए जा सकते हैं। इस वर्चुअल ट्रेनिंग के बाद आरोपी ने अपने घर पर ही आवश्यक उपकरणों की खरीददारी कर डाली और धीरे-धीरे नकली नोटों की ढलाई का काम शुरू कर दिया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बरामद किया हाई-टेक प्रिंटिंग सेटअप और जाली नोट
मुखबिर की पक्की सूचना पर कार्रवाई करते हुए राजकोट शहर की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों ने आरोपी के घर पर अचानक छापा मारा। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने मौके से भारी मात्रा में छपे हुए नकली नोट और उन्हें तैयार करने वाले आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मौके से 100 रुपये मूल्य के 216 जाली नोट और 500 रुपये मूल्य के 3 जाली नोट पूरी तरह तैयार हालत में मिले। इसके साथ ही घर के अंदर चल रही इस मिनी करेंसी प्रिंटिंग प्रेस से एक सीपीयू, एक कंप्यूटर मॉनिटर, दो प्रिंटर, एक लेमिनेटर हीटर मशीन, बटर पेपर और विशेष प्रकार के प्रिंटेड कागज भी जब्त किए गए, जिनकी कुल कीमत और सामग्री का आंकलन लगभग 65,500 रुपये आंका गया है।
राजकोट के डीसीपी (क्राइम) जगदीश बांगरवा ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपने कमरे को ही स्टूडियो और प्रिंटिंग लैब में तब्दील कर रखा था। पुलिस ने जब्ती की कार्रवाई पूरी करते हुए आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया। मौके से मिले डिजिटल उपकरणों और कंप्यूटर डेटा की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अब तक कुल कितनी मात्रा में जाली मुद्रा को बाजार में उतारा है और इस नेटवर्क के तार देश के किन अन्य हिस्सों या राज्यों तक जुड़े हुए हैं।
जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए त्योहारों और मेलों का किया इस्तेमाल
अपराधियों की मानसिकता हमेशा से ऐसी होती है कि वे कानून की नजरों से बचने के लिए सबसे सुरक्षित और भीड़भाड़ वाले मौकों की तलाश करते हैं। इस शातिर सब्जी विक्रेता ने भी जाली नोटों को बाजार में खपाने के लिए बेहद शातिर तरीका निकाला। वह थोक मात्रा में एक साथ बड़े व्यापारियों को नोट देने के बजाय खुद ही खुदरा बाजार में छोटी-मोटी खरीदारी की आड़ में इन नोटों का इस्तेमाल करता था। पिछले चार-पांच महीनों के दौरान उसने सुनियोजित तरीके से 100 रुपये के लगभग 40 नकली नोट अलग-अलग दुकानदारों और फेरीवालों को थमा दिए थे।
इस फरेब का सबसे बड़ा मंच राजकोट में हाल ही में संपन्न हुआ प्रसिद्ध जन्माष्टमी मेला बना। मेले की भारी भीड़भाड़, गहमागहमी और दुकानदारों की व्यस्तता का फायदा उठाते हुए उसने धड़ल्ले से 100 रुपये के जाली नोटों को छोटे लेन-देन में चला दिया। अमूमन छोटे दुकानदार या रेहड़ी-पटरी वाले 100 रुपये के छोटे नोट की इतनी बारीकी से जांच नहीं करते हैं, जितनी कि 500 या 2000 के नोटों की की जाती है। आरोपी ने इसी मनोवैज्ञानिक कमजोरी का फायदा उठाया और मेले में अपनी खरीदारी के दौरान नकली नोटों को आसानी से खपा दिया।
"आरोपी ने शुरुआती पूछताछ में कबूल किया है कि कम आमदनी और कर्ज के दबाव के चलते उसने सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर जाली नोट छापने का तरीका सीखा था। हमने उसके घर से प्रिंटर, कंप्यूटर और बड़ी मात्रा में जाली नोट बरामद किए हैं। अदालत से उसकी तीन दिन की रिमांड हासिल कर ली गई है ताकि इस गिरोह के बाकी साथियों और मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।" — जगदीश बांगरवा, डीसीपी (क्राइम), राजकोट
आपराधिक गठजोड़ और मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी जांच एजेंसियां
इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद अब राजकोट पुलिस और क्राइम ब्रांच का पूरा ध्यान इस सिंडिकेट के मुख्य सरगना तक पहुंचने पर केंद्रित हो गया है। प्राथमिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने प्रशिक्षण देने वाले उस अज्ञात व्यक्ति को अपने द्वारा छापे गए 10 हजार रुपये के नकली नोट दिए थे, जिसके एवज में उसे 3 हजार रुपये का असली भुगतान प्राप्त हुआ था। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल एक व्यक्ति का कारनामा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है जो सोशल मीडिया और टेलीग्राम के जरिए भोले-भाले या कर्ज में डूबे लोगों को इस दलदल में धकेल रहा है।
अदालत ने आरोपी किशन सोलंकी की तीन दिन की पुलिस रिमांड मंजूर कर ली है, जिसके दौरान पुलिस उससे कड़ाई से पूछताछ कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि टेलीग्राम पर उसे निर्देश देने वाला वह शख्स कौन था और देश के अन्य शहरों में ऐसे कितने और लोग इस प्रकार के अवैध कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दे दी है कि तकनीक और सोशल मीडिया का दुरुपयोग किस प्रकार समाज के लिए नासूर बनता जा रहा है, जिससे निपटने के लिए सतर्कता और कानूनी सख्ती दोनों बेहद जरूरी हैं।








