बॉलीवुड ने खो दिया एक सच्चा और मेहनती कलाकार
हिंदी सिनेमा जगत ने हाल ही में अपने एक बेहद मंझे हुए और ऊर्जावान कलाकार को खो दिया है। अभिनेता मुश्ताक खान, जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदायगी और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई थी, अब इस दुनिया में नहीं हैं। पिछले एक साल से अधिक समय से वह गंभीर बीमारी यानी लंग कैंसर जैसी जानलेवा चुनौती का सामना कर रहे थे। इसके बावजूद उनकी कला के प्रति दीवानगी कम नहीं हुई और वह लगातार अपनी क्षमता के अनुसार काम करते रहे।
बीमारी की भीषण पीड़ा को सहते हुए भी कैमरे के सामने उनका उत्साह कभी फीका नहीं पड़ा। लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव पर जब उन्हें सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही थी, तब वह नजारा देखने को मिला जिसने पूरी इंडस्ट्री के भीतर चल रहे खोखलेपन को उजागर कर दिया। मुंबई में हुए उनके अंतिम संस्कार के दौरान वह सब कुछ देखने को मिला जो किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर कर रख देने के लिए काफी है।
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रजा मुराद का छलका दर्द, उठाया गंभीर सवाल
मुश्ताक खान की अंतिम यात्रा और उनके सुपुर्द-ए-खाक के कार्यक्रम में कई सह-कलाकार और साथी तो शामिल हुए, लेकिन वह बड़े चेहरे नदारद रहे जिन्हें आज की तारीख में बॉलीवुड का मुख्य स्तंभ या सुपरस्टार कहा जाता है। इस बात से आहत होकर वरिष्ठ और अनुभवी अभिनेता रजा मुराद ने अपना गुस्सा एक वीडियो संदेश के जरिए खुलकर जाहिर किया। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधे तौर पर उन तमाम बड़े सितारों पर निशाना साधा जो फिल्म जगत की शोभा तो बढ़ाते हैं, लेकिन इंसानी रिश्तों के वक्त गायब हो जाते हैं।
रजा मुराद ने अपने वीडियो में इस बात पर गहरा दुख जताया कि जिस शख्स ने अपने जीवन के पांच दशक यानी पूरे पचास साल इस फिल्म इंडस्ट्री को सींचने में लगा दिए, उसे श्रद्धांजलि देने के लिए बड़े सितारों के पास चंद मिनट तक का वक्त नहीं था। यह वाकया न सिर्फ एक व्यक्ति की विदाई का है, बल्कि यह वर्तमान समय में फिल्म इंडस्ट्री के भीतर मौजूद रिश्तों की असलियत को भी आईना दिखाता है।
"दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि मुश्ताक खान आज हमारे बीच नहीं रहे। कल उनका अंतिम संस्कार किया गया। लेकिन, अफसोस की बात यह है कि ऐसे मौके पर कोई भी स्टार जिसे हम स्टार कहते हैं, वो उन्हें अपना आखिरी सलाम पेश करने नहीं आया। जबकि बहुत से उनके साथी, उनके कलीग्स, एक्टर्स सब आए। लेकिन कोई बड़ा चेहरा नहीं आया।" — रजा मुराद, वरिष्ठ अभिनेता
दौलत और शादियों में हाजिरी, पर जनाजे से दूरी
रजा मुराद ने अपने संबोधन में इंडस्ट्री के भीतर के दोहरे चरित्र पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यही सितारे जब किसी बड़े उद्योगपति के यहां शादी या किसी अन्य आयोजन में शामिल होना हो, तो पलक झपकते ही पहुंच जाते हैं। वहां मेहमानों की आवभगत करने से लेकर हर जगह आगे रहते हैं। इसके अलावा, जब किसी राजनीतिक दल या प्रभावशालीनता का दबाव होता है, तब भी ये लोग तुरंत हाजिर हो जाते हैं।
लेकिन बात जब एक ऐसे सीनियर कलाकार के अंतिम संस्कार की आती है जिसने पूरी जिंदगी सिनेमा के नाम कर दी, तो इन बड़े चेहरों की व्यस्तता अचानक बढ़ जाती है। मुश्ताक खान ने कभी किसी की चापलूसी नहीं की, न ही किसी बड़े बैनर के आगे दलाली की। उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया, वह विशुद्ध रूप से अपनी अभिनय क्षमता और कड़े संघर्ष के बल पर किया था।
अहंकार और चमक-दमक का यह दौर अस्थायी है
वीडियो के अंत में रजा मुराद ने बहुत ही गहरी और दार्शनिक बात कही जो आज के दौर के हर चमकते सितारे के लिए एक सीख है। उन्होंने याद दिलाया कि आज जो शोहरत और ग्लैमर का पर्दा इन कलाकारों के चेहरों पर सजा हुआ है, वह हमेशा रहने वाला नहीं है। समय का पहिया घूमता है और एक दिन यह चमक भी फीकी पड़ जाती है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब इंसान का वक्त बदलता है और यह चमकदार चेहरा अंधेरे में डूब जाता है, तब न तो बैंक बैलेंस काम आता है और न ही झूठी शान। अंत में केवल आपके अच्छे कर्म और इंसानियत ही याद रखी जाती है। मुश्ताक खान को किसी की जरूरत न तो जीते-जी थी और न ही दुनिया से जाने के बाद है, लेकिन इस घटना ने इंडस्ट्री के भीतर की संवेदनहीनता को सबके सामने बेनकाब जरूर कर दिया है।






