नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय रिजर्व बैंक ने देश के करोड़ों बैंक ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। केंद्रीय बैंक ने चार साल बाद पहली बार रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा बदलाव के बाद अब रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। इस फैसले का सीधा असर आपके कर्ज पर पड़ेगा और बैंकों से लिया जाने वाला हर तरह का लोन महंगा हो जाएगा।
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में यह कड़ा फैसला लिया गया है। महंगाई पर लगाम कसने के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। कोरोना और उसके बाद के आर्थिक उतार-चढ़ाव के दौरान लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था। लेकिन अब वैश्विक बाजार की स्थितियों और देश में बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों को बढ़ाने का यह रुख अपनाया है।
होम लोन और कार लोन धारकों की बढ़ेगी मुश्किलें
इस फैसले के तुरंत बाद देश के सभी बड़े सरकारी और निजी बैंक अपने कर्ज की दरों को संशोधित करेंगे। जिन लोगों ने पहले से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, उनकी मासिक किस्त यानी ईएमआई बढ़ जाएगी। बैंक या तो आपकी लोन चुकाने की अवधि बढ़ाएंगे या फिर हर महीने ली जाने वाली किस्त की रकम में इजाफा कर देंगे। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों के महीने के खर्च का पूरा बजट बिगड़ सकता है।
रियल एस्टेट बाजार पर भी इस ब्याज दर बढ़ोतरी का गहरा असर देखने को मिल सकता है। जब बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है, तो लोग नया घर खरीदने से कतराते हैं। इससे प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती आ सकती है और मकान या फ्लैट खरीदने का सपना देख रहे लोगों को अब ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। डेवलपर्स का मानना है कि इस कदम से घर खरीदार कुछ समय के लिए फैसला टाल सकते हैं।
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बैंकों में अब एफडी पर मिलेगा ज्यादा रिटर्न
एक तरफ जहां कर्ज लेने वालों के लिए यह बुरी खबर है, वहीं दूसरी तरफ बचत करने वाले निवेशकों के लिए राहत की बात है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक अब फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी और सेविंग अकाउंट पर मिलने वाले ब्याज को भी बढ़ाएंगे। वरिष्ठ नागरिकों और आम बचतकर्ताओं को अपनी जमा पूंजी पर अब पहले से ज्यादा मुनाफा मिलेगा। बैंक ग्राहकों को लुभाने के लिए जल्द ही नई ब्याज दरों वाले फिक्स्ड डिपॉजिट प्लान बाजार में उतारेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में अगर महंगाई काबू में नहीं आती है, तो केंद्रीय बैंक आगे भी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। आम जनता को अब अपने वित्तीय मामलों में अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़े खर्चों और नए कर्ज लेने से पहले लोगों को अपने बजट की दोबारा समीक्षा करनी होगी ताकि बढ़ती ईएमआई के बोझ से बचा जा सके।
बाजार और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा इसका असर
शेयर बाजार पर भी इस नीतिगत फैसले का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। बैंकिंग शेयरों में हलचल बढ़ सकती है क्योंकि मार्जिन और ब्याज आय में बदलाव होगा। उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि महंगी दरों के कारण कंपनियों के लिए विस्तार के वास्ते कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। इससे व्यापारिक गतिविधियों की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए यह जरूरी उपाय माना जा रहा है।



