रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका
भारतीय शेयर बाजार के दिग्गजों में शुमार और देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के निवेशकों के लिए यह साल मिलाजुला और चिंताजनक रहा है। मुकेश अंबानी की इस प्रमुख कंपनी के शेयरों में पिछले कुछ महीनों में लगातार उतार-चढ़ाव और कमजोरी देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल अब तक रिलायंस के शेयरों में लगभग 21 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की जा चुकी है। इस भारी गिरावट के कारण कंपनी के निवेशकों को बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है और बाजार से उनकी लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की पूंजी स्वाहा हो चुकी है।
शेयर बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि जब किसी देश की सबसे बड़ी और ब्लू-चिप कंपनी के शेयरों में इतनी बड़ी करेक्शन आती है, तो इसका असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ता है। खुदरा निवेशकों से लेकर बड़े म्यूचुअल फंड्स और संस्थागत निवेशकों तक, सभी के पोर्टफोलियो पर इस गिरावट का सीधा असर देखने को मिल रहा है। आखिर क्या हैं वे मुख्य कारण जिनकी वजह से मुकेश अंबानी की इस महाकाय कंपनी के शेयरों पर दबाव बना हुआ है, आइए इसका विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
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कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिफाइनिंग कारोबार का दबाव
रिलायंस इंडस्ट्रीज का बिजनेस मॉडल बेहद多样 (डाइवर्सिफाइड) है, लेकिन इसका मुख्य कारोबार आज भी ऑयल-टू-केमिकल्स यानी O2C सेगमेंट पर टिका हुआ है। जामनगर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी से होने वाला कारोबार कंपनी की कमाई का एक बड़ा हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में लगातार अस्थिरता बनी हुई है। कभी मांग घटने तो कभी भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें ऊपर-नीचे हो रही हैं, जिसका सीधा असर रिफाइनिंग मार्जिन पर पड़ा है।
इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में पेट्रोकेमिकल उत्पादों की मांग सुस्त रहने के कारण भी कंपनी के इस मुख्य वर्टिकल के मुनाफे पर असर देखने को मिला है। जब-जब ओटूसी सेगमेंट के मार्जिन में दबाव आता है, तब-तब ब्रोकरेज हाउस रिलायंस के शेयरों के लिए अपने टारगेट प्राइस को संशोधित करते हैं। इसका मनोवैज्ञानिक असर शेयर बाजार के निवेशकों पर पड़ता है और बिकवाली का दौर शुरू हो जाता है, जिससे शेयर की कीमत नीचे फिसलने लगती है।
रिटेल और टेलीकॉम सेक्टर में भारी निवेश और भविष्य की संभावनाएं
एक तरफ जहां पारंपरिक एनर्जी कारोबार दबाव में है, वहीं रिलायंस ने पिछले कुछ वर्षों में अपने नए जमाने के बिजनेस यानी जियो (Jio) और रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) में भारी-भरकम पूंजी निवेश किया है। देश के कोने-कोने में 5जी नेटवर्क का विस्तार करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये झोंक दिए हैं। हालांकि लॉन्ग टर्म में ये दोनों सेक्टर कंपनी के लिए सोने का अंडा साबित होने की उम्मीद है, लेकिन शॉर्ट टर्म में इस भारी पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स (Capex) का असर कंपनी के रिटर्न रेश्यो पर दिख रहा है.
बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जियो और रिटेल सेगमेंट से मिलने वाला मुनाफा और अधिक स्पष्ट रूप से निवेशकों के सामने नहीं आता, तब तक शेयर में एक सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है।
"रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों का विजन हमेशा दूरगामी होता है। शॉर्ट टर्म में शेयर के भाव गिरना बाजार का एक चक्र है, लेकिन मजबूत बुनियादी फंडामेंटल वाली कंपनियां हमेशा लंबी अवधि में निवेशकों को बेहतर रिटर्न देती हैं।" — वरिष्ठ शेयर बाजार विश्लेषक
वैश्विक आर्थिक मंदी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
भारतीय शेयर बाजार इस समय दुनिया भर के घटनाक्रमों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर लिए जाने वाले फैसलों और वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंकाओं के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं। चूंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज विदेशी निवेशकों के पोर्टफोलियो का सबसे पसंदीदा स्टॉक होता है, इसलिए जब भी एफआईआई बिकवाली करते हैं, तो सबसे ज्यादा असर रिलायंस के शेयरों पर ही देखने को मिलता है।
विदेशी फंड्स की लगातार बिकवाली और घरेलू स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण आरआईएल के शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे ट्रेड कर रहे हैं। हालांकि, वैल्यू इन्वेस्टर्स इस गिरावट को एक अवसर के रूप में भी देख रहे हैं, क्योंकि दिग्गज कंपनी का शेयर अपने ऐतिहासिक मूल्यांकन के मुकाबले अब काफी आकर्षक कीमत पर उपलब्ध माना जा रहा है।
आगे की क्या है उम्मीद और निवेशकों को क्या करना चाहिए?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में आई इस 21 फीसदी की गिरावट के बाद निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें अपने शेयरों को बेच देना चाहिए या फिर इस गिरावट में और खरीदारी करनी चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि लॉन्ग टर्म विजन रखने वाले निवेशकों के लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। कंपनी आने वाले समय में अपने ग्रीन एनर्जी (न्यू एनर्जी) कारोबार पर बहुत बड़ा फोकस कर रही है, जो भविष्य का ईंधन बनने वाला है। जामनगर में गीगा फैक्ट्री का काम तेजी से चल रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में यह वर्टिकल कंपनी की आय का एक नया और बड़ा जरिया बनेगा।
इसके अलावा, जियो और रिटेल के आईपीओ (IPO) को लेकर भी समय-समय पर बाजार में अटकलें गर्म रहती हैं। यदि आने वाले समय में जियो या रिटेल का अलग से लिस्टिंग का प्लान अमलीजामा पहनता है, तो शेयरधारकों को जबरदस्त वैल्यू अनलॉकिंग का लाभ मिल सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट भले ही निवेशकों के लिए थोड़ी दर्दभरी हो, लेकिन रिलायंस की मजबूत वित्तीय स्थिति और डायवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल को देखते हुए विश्लेषक इसे एक अस्थायी दौर मान रहे हैं। निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय कंपनी के बुनियादी पहलुओं पर नजर रखते हुए ही कोई भी निर्णय लेना चाहिए।






