पटना — चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और बिहार में एसआईआर के मुद्दे पर राज्य की सियासत अचानक गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन के तमाम बड़े नेता आज सड़कों पर उतरे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी नाराजगी साफ तौर पर जाहिर की। इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में पार्टी के नेता और आम कार्यकर्ता शामिल हुए।
इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आक्रामक तेवर दिखाए हैं और सरकार तथा आयोग पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि यह विरोध यहीं रुकने वाला नहीं है। उन्होंने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में प्रखंड स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का यह कदम राज्य सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सड़कों पर उतरा महागठबंधन, लगाए गंभीर आरोप
राजधानी पटना की सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने साफ कर दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग भी दोहराई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए वे सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
मुंबई और देश के दूसरे हिस्सों में भी इस तरह के मुद्दों पर सीजेपी जैसे संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। हाल ही में मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान भी मुख्य चुनाव अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। जानकारों का मानना है कि अलग-अलग शहरों में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। विपक्ष लगातार इन मामलों को तूल देकर सरकार को घेरने की जुगत में लगा हुआ है।
प्रखंड से जिला मुख्यालय तक आंदोलन की तैयारी
तेजस्वी यादव की ओर से किए गए ऐलान के बाद अब पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव और प्रखंड स्तर पर लामबंद होने लगे हैं। आरजेडी ने अपनी रणनीति साफ कर दी है कि वह इस लड़ाई को जमीनी स्तर तक ले जाएगी। जिला मुख्यालयों पर होने वाले इन प्रदर्शनों में किसानों, युवाओं और आम लोगों को भी जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। पार्टी नेताओं का दावा है कि आम जनता भी इस मुद्दे पर उनके साथ खड़ी है और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग भी विपक्ष के इस आक्रामक रुख को देखते हुए पूरी तरह सतर्क हो गया है। खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटा जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आंदोलन आगामी चुनावों में विपक्ष के लिए संजीवनी का काम करेगा।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल और आगे की राह
द फ्रीलान्स की टीम ने जब पटना के धरातल पर जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो यह बात सामने आई कि आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह और आक्रोश दोनों हैं। लोग खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस विरोध प्रदर्शन पर कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने हलचल काफी तेज हो चुकी है।
आने वाला हफ्ता बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम रहने वाला है। एक तरफ जहां महागठबंधन अपने तय कार्यक्रम के अनुसार प्रखंड स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष भी इसका जवाब देने की रणनीति तैयार कर रहा है। हमारी टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगी और हर नया अपडेट सबसे पहले आप तक पहुंचाती रहेगी, ताकि सच्चाई पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आ सके।





