नई दिल्ली/खेल डेस्क — वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज रोवमैन पॉवेल इस समय क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। मैदान पर उतरते ही गेंद को सीमा रेखा के बाहर भेजने की उनकी ताकत ने सबको हैरान कर रखा है। भारतीय फैंस भी इंटरनेट पर उनके खेल और हालिया पारियों के बारे में जमकर खोजबीन कर रहे हैं। पॉवेल ने अपनी तेजतर्रार बल्लेबाजी के दम पर टी20 क्रिकेट में एक खास पहचान बनाई है। जब भी टीम को तेज गति से रनों की जरूरत होती है, वह सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बनकर सामने आते हैं। पिछले कुछ मैचों में उन्होंने जिस तरह का निडर खेल दिखाया है, उसने विरोधी गेंदबाजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मैदान के चारों तरफ बड़े शॉट खेलने की उनकी काबिलियत ही उन्हें दूसरे बल्लेबाजों से अलग बनाती है।
क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि पॉवेल की तकनीक टी20 प्रारूप के बिल्कुल मुफीद है। वह क्रीज पर आते ही बिना किसी दबाव के अपने स्वाभाविक अंदाज में प्रहार करते हैं। गेंद की लाइन को भांपने में उन्हें तनिक भी समय नहीं लगता है। पैरों का सही संतुलन और हाथों की ताकत उनके लंबे छक्कों का मुख्य राज है। जब गेंद उनके बल्ले के बीचों-बीच लगती है, तो फील्डर केवल दर्शक बनकर रह जाते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग देशों की टी20 लीगों में उनकी भारी मांग रहती है। फ्रेंचाइजी टीमें उन पर भरोसा जताती हैं और वह अंत के ओवरों में मैच का रुख पलटने का माद्दा रखते हैं। खेल के इसी आक्रामक अंदाज ने उन्हें दुनिया भर में करोड़ों प्रशंसकों का चहेता बना दिया है।
मैदान पर कैसे बदला रोवमैन पॉवेल का खेल?
पॉवेल ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत एक सामान्य मध्यक्रम बल्लेबाज के तौर पर की थी। शुरुआती दिनों में वह अपनी पारी को संभालने में थोड़ा समय लेते थे। लेकिन वक्त के साथ उन्होंने अपने खेल को पूरी तरह से आधुनिक टी20 की जरूरतों के अनुसार ढाल लिया। अब वह पहली ही गेंद से आक्रामक रवैया अपनाने से नहीं हिचकते हैं। अभ्यास सत्रों में उन्होंने पावर-हिटिंग पर सबसे ज्यादा मेहनत की है। भारी बल्ले का इस्तेमाल और शरीर का सही झुकाव उन्हें अतिरिक्त ताकत देता है। स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ भी उन्होंने अपने फुटवर्क में काफी सुधार किया है। पहले जहां वह स्पिनरों के सामने थोड़ा असहज दिखते थे, वहीं अब वह उन्हें आसानी से हवाई रास्ते से बाहर भेज देते हैं।
मैदान पर उनके शांत स्वभाव ने भी उनकी बल्लेबाजी को एक नई मजबूती दी है। दबाव के पलों में जब विरोधी टीम हावी होती है, तब भी पॉवेल अपना धैर्य नहीं खोते हैं। वह मैच की स्थिति के अनुसार अपनी रणनीति तय करते हैं। यदि विकेट गिर रहे हों, तो वह कुछ गेंदें संभलकर खेलते हैं। इसके बाद जैसे ही मौका मिलता है, वह रनों की गति को अचानक बढ़ा देते हैं। उनकी यही समझदारी उन्हें एक परिपक्व फिनिशर बनाती है। टीम के साथी खिलाड़ी भी उनके इस भरोसेमंद प्रदर्शन की जमकर सराहना करते हैं। कप्तान के रूप में भी उन्होंने अपने खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की पूरी छूट दी है।
आईपीएल और दुनिया भर की लीगों में पॉवेल का असर
भारतीय उपमहाद्वीप में पॉवेल की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इंडियन प्रीमियर लीग भी है। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स जैसी प्रमुख टीमों के लिए खेलते हुए उन्होंने कई यादगार पारियां खेली हैं। भारतीय पिचों की धीमी गति पर भी उन्होंने आसानी से लंबे शॉट लगाकर दिखाए हैं। घरेलू गेंदबाजों के खिलाफ उनका रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है। आईपीएल के मंच ने उन्हें दुनिया के शीर्ष गेंदबाजों का सामना करने का शानदार मौका दिया। यहां उन्होंने दबाव से निपटने और बड़े मैचों को जीतने की कला सीखी। भारतीय दर्शक भी उनके इस निडर खेल को खूब पसंद करते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर उनकी पारियों के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं।
केवल आईपीएल ही नहीं, बल्कि कैरेबियन प्रीमियर लीग और अन्य वैश्विक टी20 टूर्नामेंटों में भी उनका बल्ला जमकर बोला है। सीपीएल में उन्होंने कई बार अपनी टीम को अकेले दम पर चैंपियन बनाया है। उनकी कप्तानी में टीमों ने मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर जीत दर्ज की है। हर लीग में उन्होंने साबित किया है कि वह केवल एक हिटर नहीं हैं। वह मैच की नब्ज को समझने वाले एक चतुर रणनीतिकार भी हैं। विदेशी दौरों पर भी उनका बल्ला लगातार रन उगल रहा है। यह निरंतरता किसी भी बल्लेबाज को महान बनाने के लिए बेहद जरूरी होती है।
डेथ ओवरों में छक्के लगाने की खास कला
टी20 क्रिकेट के अंतिम चार ओवर किसी भी मैच का फैसला तय करते हैं। इन ओवरों में पॉवेल का स्ट्राइक रेट हमेशा से गेंदबाजों के लिए एक खौफनाक सपना रहा है। यॉर्कर गेंद को भांपकर उसे सीधे बाउंड्री पार भेजना उनका पसंदीदा काम है। गेंदबाज चाहे बाहर गेंद फेंके या पैरों पर, पॉवेल के पास हर गेंद का सटीक जवाब होता है। वह क्रीज की गहराई का बहुत चतुराई से इस्तेमाल करते हैं। इसके चलते गेंदबाज अपनी तय लेंथ से भटक जाते हैं और खराब गेंदें फेंकने को मजबूर होते हैं। पॉवेल ऐसी गलतियों को बिल्कुल नहीं बख्शते और पूरा फायदा उठाते हैं।
वेस्टइंडीज की राष्ट्रीय टीम को आने वाले टूर्नामेंटों में पॉवेल से बहुत बड़ी उम्मीदें हैं। कैरेबियाई क्रिकेट बोर्ड ने उन पर पूरा भरोसा जताते हुए टी20 टीम की कमान सौंपी है। एक कप्तान के तौर पर वह आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व करते हैं। युवा खिलाड़ियों को वह हमेशा सकारात्मक रहकर खेलने की सलाह देते हैं। भारतीय प्रशंसकों में पॉवेल को लेकर बढ़ा यह सर्च ट्रेंड साबित करता है कि उनका खेल सरहदों से परे लोगों को प्रभावित कर रहा है। आने वाले समय में भी जब वह मैदान पर उतरेंगे, तो सबकी नजरें उनके बल्ले की गूंज पर टिकी रहेंगी।





