सैम ऑल्टमैन का पुराना वीडियो क्यों हो रहा है सोशल मीडिया पर वायरल?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया में आज सैम ऑल्टमैन एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है। चैटजीपीटी (ChatGPT) के जरिए जेनेरेटिव AI को आम लोगों की पहुंच तक पहुंचाने वाले ओपनएआई (OpenAI) के सह-संस्थापक और सीईओ सैम ऑल्टमैन इन दिनों एक पुराने वीडियो की वजह से चर्चा में हैं। यह वीडियो करीब 20 साल पुराना है, जब इंटरनेट और स्मार्टफोन की दुनिया आज जैसी बिल्कुल नहीं थी। इस वीडियो में बेहद कम उम्र के सैम ऑल्टमैन अपनी पहली कंपनी 'लूप्ट' (Loopt) का आइडिया दुनिया के सामने पेश करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आज के दौर में इंस्टाग्राम, स्नैपचैट या गूगल मैप्स पर अपनी लाइव लोकेशन दोस्तों के साथ शेयर करना या आसपास की जगहों को खोजना बेहद आम बात हो गई है। लेकिन जिस समय स्मार्टफोन और मोबाइल इंटरनेट अपनी शुरुआती दौर में भी नहीं थे, तब सैम ऑल्टमैन इसी तकनीक की कल्पना कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनके इस थ्रोबैक वीडियो को देखकर लोग हैरान हैं कि कैसे एक युवा ने दो दशक पहले ही भविष्य की टेक्नोलॉजी का खाका तैयार कर लिया था।
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19 साल की उम्र में स्टैनफोर्ड छोड़कर उठाया था बड़ा कदम
यह दिलचस्प कहानी साल 2005 की है। उस समय सैम ऑल्टमैन की उम्र महज 19 साल थी और वे प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। हालांकि, उनके मन में कुछ बड़ा करने का जुनून था। पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में बंधे रहने के बजाय उन्होंने कॉलेज छोड़ने का बड़ा फैसला किया और अपने साथियों के साथ मिलकर 'लूप्ट' नाम के स्टार्टअप पर पूरा ध्यान लगाना शुरू कर दिया। उनके साथ इस सफर में निक सीवो भी शामिल थे।
उस दौर में न तो आज की तरह आईफोन बाजार में आए थे और न ही हाई-स्पीड मोबाइल डेटा आम जनता के लिए उपलब्ध था। ऐसे में एक मोबाइल ऐप के जरिए लोगों को उनकी लोकेशन के आधार पर आपस में जोड़ना एक क्रांतिकारी विचार माना जा रहा था। ऑल्टमैन ने Y Combinator के समर 2005 बैच के तहत इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया और टेक जगत का ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू किया।
क्या था 'लूप्ट' ऐप का काम और क्यों थी यह अनोखी सोच?
आज की पीढ़ी के लिए यह सोचना भी अजीब हो सकता है कि कभी ऐसा वक्त भी था जब फोन में जीपीएस या लोकेशन शेयरिंग फीचर्स नहीं हुआ करते थे। 'लूप्ट' एक ऐसा मोबाइल एप्लिकेशन था, जिसकी मदद से यूजर्स अपने दोस्तों की रियल-टाइम लोकेशन देख सकते थे, आसपास होने वाली गतिविधियों की जानकारी पा सकते थे और तय कर सकते थे कि कौन कहां मिल रहा है।
वायरल हो रहे पुराने वीडियो में युवा सैम ऑल्टमैन बड़े उत्साह के साथ इस ऐप का डेमो देते नजर आ रहे हैं। वह समझा रहे हैं कि कैसे अगर कोई दोस्त आपके पास के किसी रेस्टोरेंट में है, तो आपको तुरंत इसकी सूचना मिल जाएगी और आप बिना किसी परेशानी के उससे मिल सकेंगे। हालांकि, उस समय तकनीकी सीमाओं और स्मार्टफोन की कमी के कारण आम लोगों के बीच यह ऐप वैसी धूम नहीं मचा पाया, जैसी आज के ऐप्स मचाते हैं।
"हम एक ऐसी दुनिया की कल्पना कर रहे थे जहां लोग हर समय अपनी लोकेशन और आसपास की दुनिया के साथ गहराई से जुड़े रहेंगे, भले ही उस समय तकनीक उतनी परिपक्व नहीं थी।" — सैम ऑल्टमैन, टेक उद्यमी एवं सीईओ, ओपनएआई
सुपरहिट नहीं हुआ ऐप, फिर भी करोड़ों डॉलर में हुई डील
कई लोग यह मान सकते हैं कि 'लूप्ट' एक असफल स्टार्टअप था क्योंकि यह फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसा बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बन पाया। कंपनी को शुरुआती यूजर्स मिले, बड़े मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ साझेदारियां भी हुईं, लेकिन लंबे समय तक इसे बड़ा मुनाफा कमाने में भारी संघर्ष करना पड़ा। इसके बावजूद, साल 2012 में एक बड़ा मोड़ आया जब ग्रीन डॉट कॉर्पोरेशन (Green Dot Corporation) ने 'लूप्ट' को करीब 43.4 मिलियन डॉलर यानी 4 करोड़ 34 लाख डॉलर में खरीद लिया।
इस अधिग्रहण के पीछे मुख्य वजह कंपनी के पास मौजूद आधुनिक मोबाइल और लोकेशन टेक्नोलॉजी के पेटेंट थे। भले ही ऐप को आम उपभोक्ताओं के बीच वह ऐतिहासिक सफलता नहीं मिली, लेकिन इस डील ने सैम ऑल्टमैन और उनके सहयोगियों के लिए सफलता के रास्ते खोल दिए। यही स्टार्टअप और इसके जरिए मिला अनुभव सिलिकॉन वैली में उनके भविष्य के बड़े सफर यानी ओपनएआई की स्थापना की पहली सीढ़ी साबित हुआ।






