पहाड़ी राज्य में अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद में जुटी समाजवादी पार्टी
देश के पहाड़ी राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय दल अब नए सिरे से रणनीति तैयार कर रहे हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी ने उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों को बेहद गंभीरता से लेते हुए अपने सांगठनिक ढांचे में आमूल-चूल बदलाव किए हैं। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार यदि संगठन को मजबूत करना है, तो जमीनी स्तर पर सक्रिय और अनुभवी चेहरों को आगे लाना होगा। इसी सोच के तहत पार्टी आलाकमान ने कई हफ्तों के मंथन के बाद महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर मुहर लगाई है, जिससे पहाड़ी जिलों में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी का आधार हमेशा से कुछ चुनिंदा शहरी और मैदानी इलाकों तक सीमित रहा है। ऐसे में पार्टी इस बार अपनी पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर राज्य के हर कोने तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। नई नियुक्तियां इसी रणनीति का हिस्सा हैं, जिनके जरिए पार्टी राज्य की जनता के बीच एक मजबूत और संगठित विकल्प के रूप में उभरने का प्रयास कर रही है। कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि इस बार चुनाव में पूरी ताकत झोंकी जाएगी।
संबंधित खबरें
अब्दुल मतीन सिद्दीकी को मिली उत्तराखंड की कमान, जानिए उनके राजनीतिक सफर की अहमियत
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद एक बड़ा फैसला लिया गया। नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी के आजाद नगर से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल मतीन सिद्दीकी को उत्तराखंड समाजवादी पार्टी का नया प्रदेश अध्यक्ष नामित किया गया है। मतीन सिद्दीकी की गिनती पार्टी के उन निष्ठावान कार्यकर्ताओं में होती है जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए धरातल पर काम किया है। उनके चयन के पीछे पार्टी की यह मंशा साफ झलकती है कि कुमाऊं और मैदानी इलाकों में पार्टी के प्रभाव को और अधिक धार दी जाए।
अब्दुल मतीन सिद्दीकी के कंधों पर अब पूरे राज्य में संगठन के विस्तार की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के बिखरे हुए कैडर को एकजुट करने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की होगी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सिद्दीकी का स्थानीय राजनीति में लंबा अनुभव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। उनके अध्यक्ष बनने के बाद से ही हल्द्वानी और आसपास के इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और वे लगातार नए नेतृत्व का स्वागत कर रहे हैं।
सोनम बगवाड़ी और आभा बड़थवाल को मिली खास जिम्मेदारी, गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक बिछ रहा जाल
केवल प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी ने राज्य स्तर पर समन्वय और प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए दो अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की हैं। देहरादून की रहने वाली सोनम बगवाड़ी को पूरे उत्तराखंड राज्य का प्रभारी बनाया गया है। सोनम के ऊपर पार्टी की तमाम गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने, चुनाव से जुड़े कार्यक्रमों को तय समय पर लागू करने और राज्य नेतृत्व व केंद्रीय कार्यालय के बीच संवाद बनाए रखने की अहम जिम्मेदारी होगी। उनकी सक्रिय कार्यशैली को देखते हुए पार्टी को उम्मीद है कि वह संगठन को रफ्तार देने में कामयाब रहेंगी।
इसके साथ ही, देहरादून की ही निवासी आभा बड़थवाल को गढ़वाल मंडल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। गढ़वाल क्षेत्र उत्तराखंड की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जहां हर राजनीतिक दल की पैनी नजर रहती है। आभा बड़थवाल के कंधों पर गढ़वाल मंडल के सभी जिलों में पार्टी संगठन को सक्रिय करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का जिम्मा है। मंडल स्तर पर इन नियुक्तियों के जरिए समाजवादी पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह इस चुनाव में किसी भी मोर्चे पर पीछे रहने वाली नहीं है और सुनियोजित तरीके से अपनी चुनावी जमीन तैयार कर रही है।
अखिलेश यादव की रणनीति और उत्तराखंड चुनाव पर इसका असर
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तराखंड के राजनीतिक समीकरणों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में लखनऊ में हुई राज्य इकाई के नेताओं की बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पार्टी को अब राज्य के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाना होगा। बेरोजगारी, पलायन, महंगाई और स्थानीय विकास जैसे तमाम ऐसे मुद्दे हैं जिन पर जनता सरकार से जवाब चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यदि सही समय पर सही मुद्दों को उठाया जाए, तो उत्तराखंड की जनता एक नए राजनीतिक विकल्प को जरूर मौका देगी।
नई नियुक्तियों के बाद अब पार्टी की योजना राज्य भर में संवाद यात्राएं और जनसंपर्क अभियान चलाने की है। नए प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मतीन सिद्दीकी और दोनों प्रभारियों की टीम जल्द ही उत्तराखंड के विभिन्न जिलों का दौरा करेगी और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें आयोजित करेगी। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य पार्टी की नीतियों को आम जनमानस तक पहुंचाना और जमीनी स्तर पर आ रही कमियों को दूर करना है।
निष्कर्ष और आगे की राजनीतिक राह
आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले समाजवादी पार्टी द्वारा किए गए इन सांगठनिक बदलावों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। हालांकि उत्तराखंड के चुनावी मैदान में राष्ट्रीय दलों के मुकाबले क्षेत्रीय दलों के लिए राह कभी आसान नहीं रही है, लेकिन मजबूत और अनुभवी नेतृत्व के बलबूते पार्टी अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के प्रयास में जुटी है। अब्दुल मतीन सिद्दीकी, सोनम बगवाड़ी और आभा बड़थवाल की तिकड़ी पार्टी के लिए कितना प्रभावी साबित होती है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि सपा ने उत्तराखंड की सियासत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए अपनी चाल चल दी है।
"पार्टी ने उत्तराखंड में संगठन को धार देने के लिए जमीनी और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। हमारा लक्ष्य राज्य के हर नागरिक तक समाजवादी नीतियों को पहुंचाना और एक मजबूत विकल्प देना है।" — समाजवादी पार्टी केंद्रीय नेतृत्व








