रामपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गरमाया माहौल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में शब्दों के चयन को लेकर अक्सर विवाद खड़े होते रहते हैं, और ताज़ा मामला रामपुर से सामने आया है। समाजवादी पार्टी के सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी अपने कार्यालय पर आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस वक्त अपना आपा खो बैठे, जब एक पत्रकार ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सवाल किया। इस प्रेस वार्ता में सपा और कांग्रेस के नेता भी मौजूद थे, लेकिन चर्चा का मुख्य केंद्र वह तीखी नोकझोक बन गई जो एक सवाल के शब्दों को लेकर सांसद और मीडियाकर्मी के बीच हुई। राजनीति में प्रतीकों और विशेष शब्दों का इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है, लेकिन जब इन्हें किसी खास समुदाय के संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, तो विवाद होना स्वाभाविक है।
प्रेस वार्ता के दौरान जब माहौल सामान्य था, तभी एक रिपोर्टर ने सवाल दागा कि आने वाले समय में राजनीतिक दल फिर से 'अब्दुल' को याद करेंगे और ऐसे में अब 'अब्दुल' कहां है। इस एक शब्द के इस्तेमाल ने सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को बुरी तरह झकझोर दिया। उन्होंने तुरंत सवाल को बीच में ही रोक दिया और इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करके जनता और एक विशेष समुदाय का मजाक उड़ाया जा रहा है। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि इस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग पूरी तरह से अनुचित है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
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'क्या होता है अब्दुल-अब्दुल, अपने शब्द वापस लीजिए'
सपा सांसद ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह से किसी समुदाय को उपनाम देकर संबोधित करना बेहद गलत है। उन्होंने पत्रकार से दो टूक शब्दों में कहा कि वे अपने बयान को वापस लें। सांसद ने गुस्से में कहा कि देश के नागरिकों को इस तरह के प्रतीकों में बांधकर पेश करना राजनीतिक रूप से तो ठीक हो सकता है, लेकिन यह समाज की गरिमा के खिलाफ है। उनके इस आक्रामक रुख ने वहां मौजूद सभी लोगों को हैरान कर दिया।
सांसद नदवी ने कहा,
"क्या मतलब, आप नाम लीजिए, यह अब्दुल-अब्दुल क्या होता है? आप किसी कम्युनिटी का मजाक उड़ा रहे हैं अब्दुल कहकर। आप अपने शब्दों को वापस लीजिए और इस तरह की भाषा का प्रयोग बंद कीजिए।" — मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी, सपा सांसदउनके इस बयान के बाद सभागार में सन्नाटा छा गया और राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि क्या आगामी चुनावों में जुबानी जंग और तीखी होने वाली है।
देश के मुसलमानों के योगदान और सम्मान पर जोर
आगे बोलते हुए सपा सांसद ने देश के मुस्लिम समुदाय के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत का मुसलमान इस देश का सबसे इज्जतदार और सम्मानित नागरिक है, जिसने देश की आजादी की लड़ाई से लेकर इसकी तरक्की में सैकड़ों सालों तक कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक दलों में विभिन्न जगहों पर लोग मौजूद हैं, लेकिन इस तरह की शब्दावली के जरिए लोगों को भ्रमित करने और बरगलाने की कोशिश की जा रही है।
सांसद ने स्पष्ट किया कि इस देश में कोई भी व्यक्ति प्रतीकात्मक रूप से केवल एक नाम का मोहताज नहीं है, बल्कि यहां हर कोई भारतीय संविधान के तहत अपनी पहचान रखता है। उन्होंने अपील की कि राजनीतिक विमर्श का स्तर ऊंचा रखा जाना चाहिए और किसी भी वर्ग या समुदाय को नीचा दिखाने वाली शब्दावली से परहेज करना चाहिए। उनके अनुसार, रामपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह के मुद्दों पर सियासत गरमाना और भी अधिक चिंता का विषय बन जाता है।
पत्रकारिता के स्तर पर भी उठाए सवाल
जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने सांसद को याद दिलाया कि यही 'अब्दुल' शब्द पहले उन्हीं की पार्टी के एक स्थानीय नेता शानू फसाहत द्वारा इस्तेमाल किया गया था, तो सांसद का गुस्सा और अधिक भड़क उठा। उन्होंने उस स्थानीय नेता के बारे में पूछे गए सवाल को खारिज कर दिया और कहा कि वे यहां किसी स्थानीय व्यक्ति की बात का जवाब देने नहीं बैठे हैं।
सांसद नदवी ने कहा कि पत्रकारिता का एक निश्चित स्तर होता है और सवाल हमेशा राष्ट्रीय एवं जनहित के मुद्दों पर होने चाहिए। उन्होंने कहा, "कौन शानू फसाहत? आप अपने स्तर से सवाल करिए। पत्रकारिता का एक लेवल होता है, उस लेवल से सवाल पूछिए। हम यहां राष्ट्रीय मुद्दों पर बात करने के लिए बैठे हैं, और आपको उसी विषय पर चर्चा करनी चाहिए।" इस तीखी प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया कि सांसद पार्टी के भीतर या बाहर चल रही उन चर्चाओं से भी असहज हैं जो इस प्रकार की शब्दावली को बढ़ावा देती हैं।
राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाओं का दौर और भाजपा का पलटवार
सपा सांसद के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। जहां एक तरफ समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने इसे समुदाय के सम्मान की रक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने इस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा नेता फसाहत अली शानू ने एक वीडियो जारी कर सांसद के बयान पर कड़ा पलटवार किया।
भाजपा नेता शानू ने कहा कि 'अब्दुल' किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह देश के गरीब, मजदूर, रिक्शा चलाने वाले, पंचर जोड़ने वाले और मेहनतकश मुस्लिम तबके का प्रतीक है जो रोजमर्रा की जिंदगी में संघर्ष करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसद इसी वर्ग के वोटों के सहारे संसद तक पहुंचे हैं, इसलिए उन्हें आम जनता के दर्द और उनकी भाषा को समझने की जरूरत है। इस तरह, रामपुर की यह राजनीतिक खींचतान आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े विवाद का रूप लेती जा रही है।







