सोते समय अत्यधिक पसीना आने की समस्या को न करें नजरअंदाज
रात के वक्त बिस्तर पर जाने के बाद कई बार शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलने लगता है, जिससे कपड़े और चादर तक गीले हो जाते हैं। आमतौर पर लोग इसे कमरे के गर्म तापमान या बहुत ज्यादा भारी कपड़े पहनकर सोने का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर यह परेशानी लगातार बनी रहे, तो यह किसी अंदरूनी शारीरिक बीमारी का बड़ा संकेत हो सकती है? मेडिकल साइंस की भाषा में इसे 'नाइट स्वेट्स' कहा जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हालांकि हर बार रात का पसीना किसी खतरनाक बीमारी का इशारा नहीं होता, फिर भी इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। अमेरिकन फैमिली फिजिशियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे कई तरह के चिकित्सीय कारण हो सकते हैं, जिनमें मेनोपॉज, मूड डिसऑर्डर, गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज और मोटापे जैसी स्थितियां शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन वजहों से यह समस्या पैदा होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
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हार्मोनल असंतुलन और थायराइड का सीधा कनेक्शन
नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट के इंटरनल मेडिसिन एंड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर विशेषज्ञ डॉ. अक्षय चुघ का कहना है कि रात में पसीना आने के पीछे हार्मोनल बदलाव से लेकर खतरनाक संक्रमण और कुछ खास दवाओं का साइड इफेक्ट भी शामिल हो सकता है। शरीर में हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ते ही पसीने की ग्रंथियां अत्यधिक सक्रिय हो जाती हैं।
महिलाओं और पुरुषों दोनों में ही हार्मोनल गड़बड़ी नाइट स्वेट्स का प्रमुख कारण बनती है। विशेष तौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच महिलाओं में मेनोपॉज या पेरी-मेनोपॉज का दौर शुरू होता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। इसकी वजह से 'हॉट फ्लैशेज' यानी अचानक तेज गर्मी लगने की शिकायत होती है और सोते वक्त शरीर से भारी मात्रा में पसीना छूटने लगता है। इसके अलावा, हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, जिससे मेटाबॉलिज्म बेहद तेज हो जाता है और शरीर अधिक गर्मी पैदा करता है।
छिपा हुआ इंफेक्शन और टीबी का शुरुआती लक्षण
हार्मोनल गड़बड़ियों के अलावा कई तरह के गंभीर संक्रमण भी रात के वक्त पसीना आने की वजह बन सकते हैं। चिकित्सा जगत में रात के समय पसीना आने और साथ में हल्का बुखार बने रहने को ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी का एक बेहद आम लक्षण माना जाता है। ऐसे मामलों में मरीज को रात में सोते वक्त बेचैनी और अत्यधिक पसीने का सामना करना पड़ता है।
इसके अतिरिक्त, कई अन्य वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन भी इस समस्या को बुलावा देते हैं। दिल के वॉल्व में सूजन यानी एंडोकार्डिटिस, हड्डियों से जुड़े संक्रमण (ऑस्टियोमाइलाइटिस) या एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में भी नाइट स्वेट्स के लक्षण आम तौर पर देखे जाते हैं। शरीर जब इन बीमारियों से लड़ रहा होता है, तो इम्यून सिस्टम का रिस्पांस तापमान को प्रभावित करता है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए क्यों खतरनाक है नाइट स्वेट्स?
मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए रात के समय पसीना आना एक चेतावनी हो सकती है। जो मरीज शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन या अन्य भारी दवाएं लेते हैं, उनका ब्लड शुगर लेवल सोते समय अचानक बहुत नीचे गिर सकता है। मेडिकल भाषा में इसे हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है।
जब खून में ग्लूकोज की मात्रा अचानक कम हो जाती है, तो शरीर तुरंत इमरजेंसी मोड में चला जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर एड्रेनालिन हार्मोन रिलीज करता है, जिसके कारण मरीज को अचानक ठंडा पसीना आने लगता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है और घबराहट के साथ उसकी नींद अचानक खुल जाती है।
"रात में अत्यधिक पसीना आना सिर्फ मौसम की गर्मी का नतीजा नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर चल रही किसी मेडिकल कंडीशन का अलार्म हो सकता है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से संपर्क करके तुरंत जरूरी ब्लड टेस्ट और मेडिकल जांच करवानी चाहिए।" — डॉ. अक्षय चुघ, इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ
बचाव और जीवनशैली में जरूरी बदलाव
अगर आपको भी लंबे समय से रात में सोते समय ज्यादा पसीना आने की शिकायत है, तो सबसे पहले अपने बेडरूम के तापमान को सामान्य रखें और हल्के, सूती कपड़े पहनकर सोएं। इसके साथ ही कैफीन, अत्यधिक मसालेदार भोजन और शराब के सेवन से रात के वक्त दूरी बनाएं, क्योंकि ये चीजें शरीर का तापमान बढ़ाकर पसीने की समस्या को और गंभीर बना सकती हैं।
यदि जीवनशैली में बदलाव करने के बाद भी यह समस्या ठीक न हो, तो किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श जरूर लें। डॉक्टर आपके ब्लड टेस्ट, थायराइड प्रोफाइल और अन्य जरूरी जांच के जरिए यह पता लगा सकते हैं कि इसके पीछे असली वजह क्या है। समय रहते सही इलाज मिलने से इस परेशानी से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है।








