विशेष अभियान 6.0 की रूपरेखा और प्रशासनिक तैयारी
देशभर के सरकारी कार्यालयों में कामकाज की कार्यकुशलता बढ़ाने और आम जनता से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग की ओर से शुरू किए गए विशेष अभियान (एससीडीपीएम 6.0) के क्रम में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने भी इस साल के अभियान के लिए अपने लक्ष्य तय कर लिए हैं। इस पहल का मुख्य मकसद दफ्तरों में लंबित पड़ी फाइलों का तेजी से निपटारा करना और शासन प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही को और अधिक मजबूत करना है।
आगामी अक्टूबर महीने में शुरू होने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान के दौरान न केवल फाइलों का अंबार कम किया जाएगा, बल्कि सरकारी परिसरों में स्वच्छता को एक संस्थागत रूप दिया जाएगा। पिछले संस्करणों से सीख लेते हुए इस बार कार्यप्रणाली को और अधिक सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों और विशेष तौर पर पेंशनभोगियों को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। आंतरिक निगरानी तंत्र को धार देने के लिए हर स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ताकि तय समय सीमा के भीतर सभी लक्ष्यों को हासिल किया जा सके।
विभिन्न प्रशासनिक हलकों से मिल रही जानकारी के अनुसार, इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए एक समर्पित तकनीकी और प्रशासनिक टीम का गठन किया गया है। यह टीम रोजाना के कामकाज की प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करेगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और यह भी स्पष्ट रहेगा कि किस विभाग ने अपने तय किए गए लक्ष्यों को प्राप्त करने में कितनी प्रगति की है।
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पेंशनभोगियों और आम जनता की शिकायतों का होगा त्वरित समाधान
इस बार के विशेष अभियान का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु आम नागरिकों और पेंशनभोगियों की शिकायतों का समय पर निस्तारण करना है। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान की मुख्य अवधि के दौरान कम से कम 6,500 जन शिकायतों का समाधान किया जाएगा। इसके अलावा, विभिन्न स्तरों पर लंबित पड़ी 800 अपीलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाएगा, ताकि लंबे समय से न्याय या समाधान की आस लगाए बैठे लोगों को राहत मिल सके।
शिकायतों के निवारण के साथ-साथ रिकॉर्ड रूम को दुरुस्त करने की भी बड़ी योजना है। इसके तहत समीक्षा के लिए कुल 847 भौतिक फाइलों और 653 इलेक्ट्रॉनिक फाइलों की पहचान की जा चुकी है। पुराने दस्तावेजों को करीने से व्यवस्थित किया जाएगा और जो फाइलें नियमों के अनुसार अब उपयोगी नहीं हैं, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया जाएगा ताकि दफ्तरों में अनावश्यक जगह न घिरे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से सरकारी मशीनरी में सुस्ती कम होती है और मामलों को लटकाने की पुरानी प्रवृत्ति पर लगाम लगती है। डिजिटल और भौतिक दोनों ही माध्यमों से फाइलों की छंटनी होने से प्रशासनिक कार्य संस्कृति में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है, जिसका सीधा फायदा आम जनता को मिलता है।
'नियमों में सरलता' और जीवन को सुगम बनाने की पहल
सरकार की कोशिश है कि केवल शिकायतों का निपटारा ही न किया जाए, बल्कि ऐसे नीतिगत बदलाव भी लाए जाएं जिनसे भविष्य में शिकायतों की गुंजाइश ही कम से कम बचे। इसी उद्देश्य के साथ 'नियमों में सरलता' की पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है। पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा इस अभियान के दौरान जीवन को और अधिक सुगम बनाने के लिए कुल 23 कार्यालय ज्ञापन जारी किए जाएंगे। इन ज्ञापनों के माध्यम से प्रक्रियाओं को इतना आसान बनाया जाएगा कि आम जनता और पेंशनधारक बिना किसी कानूनी या कागजी पेचीदगी के अपनी समस्याओं का समाधान पा सकें।
इस प्रकार के सुधारात्मक कदम प्रशासनिक व्यवस्था को जन-उन्मुख बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब नियमों की जटिलताएं कम होती हैं, तो आम आदमी और सरकार के बीच का फासला भी कम होता है। विभाग का यह प्रयास सराहनीय है कि वह केवल औपचारिकता निभाने के बजाय धरातल पर नियमों को सरल बनाने पर जोर दे रहा है ताकि लोगों का जीवन सुगम हो सके।
इसके अतिरिक्त, पुरानी और बेकार हो चुकी सामग्री के निष्पादन से कुछ राजस्व प्राप्ति की भी उम्मीद है। अधिकारियों का अनुमान है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कबाड़ और पुरानी वस्तुओं के निस्तारण से लगभग 25,000 रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जो सरकार के 'वेस्ट टू वेल्थ' यानी कचरे से कंचन बनाने के विजन को भी बल देता है।
देशभर में स्वच्छता स्थलों की पहचान और वृक्षारोपण अभियान
केवल कागजी कामकाज तक सीमित न रहकर इस अभियान का सामाजिक और पर्यावरणीय पहलू भी बेहद मजबूत रखा गया है। केंद्रीय सरकारी पेंशनभोगी संघों के साथ मिलकर विभाग ने देश भर में कुल 21 स्वच्छता स्थलों की पहचान की है, जहां विशेष साफ-सफाई अभियान चलाया जाएगा। अभियान के शुरू होने से पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों ने इन स्थलों का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया है और मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।
'स्वच्छता ही सेवा' कार्यक्रम के तहत आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री स्तर के लोग भी श्रमदान करते नजर आएंगे। इसी क्रम में 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के विनय मार्ग खेल परिसर में एक बड़े वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी होगी।
"सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण हमारी प्राथमिकता है। इस विशेष अभियान के जरिए हम प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जनता के प्रति जवाबदेह बना रहे हैं।" — प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग
इस प्रकार, यह विशेष अभियान केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसा महाअभियान है जो सरकारी कामकाज की दिशा और दशा दोनों को बदलने की क्षमता रखता है। जब शासन के सभी स्तरों पर इस तरह की प्रतिबद्धता दिखाई जाती है, तो आम नागरिक का तंत्र पर भरोसा मजबूत होता है और एक स्वस्थ प्रशासनिक संस्कृति का निर्माण होता है।








