सीमापुरी में तबाही: 25 साल पुरानी इमारत ने ली कई जिंदगियां
राजधानी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक जर्जर इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। सुबह का वक्त था और लोग अपनी दिनचर्या शुरू करने की तैयारी में थे कि तभी अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के उन इलाकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जहां पुरानी और जर्जर इमारतों में लोग जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने के तुरंत बाद इलाके में चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने वालों में स्थानीय स्तर पर प्लास्टिक और कचरा बीनने का काम करने वाले गरीब परिवारों के लोग शामिल थे। ये लोग मामूली किराए पर या बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम वाली इन इमारतों में रहने को मजबूर थे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारत पहले ही काफी कमजोर हो चुकी थी, जिसकी दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें दिख रही थीं।
मजबूरी की छत और प्रशासन की खामोशी
इस हादसे में जो बात सबसे अधिक विचलित करने वाली है, वह है पीड़ितों की आर्थिक स्थिति। ये लोग मजदूरी करके किसी तरह अपना पेट पालते थे। दिल्ली जैसे महंगे शहर में अपना आशियाना ढूंढना इनके लिए नामुमकिन सा होता है, इसलिए वे ऐसी पुरानी और खतरनाक इमारतों को ही अपना ठिकाना बनाने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में हजारों ऐसी इमारतें हैं जो बिना किसी इंजीनियर की सलाह के बनी हैं और उनकी उम्र अब काफी बढ़ चुकी है।
"इमारत की उम्र करीब 25 साल थी। जिस तरह से यह गिरी है, उससे साफ है कि इसकी बनावट में मानकों का पालन नहीं हुआ था और समय के साथ रखरखाव भी नहीं किया गया। हम मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।" — स्थानीय पुलिस अधिकारी, घटना स्थल
स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर इस इमारत का मालिकाना हक किसके पास था और क्या नगर निगम की ओर से इसे कभी असुरक्षित घोषित किया गया था। शुरुआती पड़ताल में यह स्पष्ट हो रहा है कि इमारत में अवैध रूप से कई परिवार रह रहे थे, जबकि ढांचा पूरी तरह से जर्जर हो चुका था।
रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतियों का दौर
घटना की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ (NDRF) और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। संकरी गलियां होने के कारण बचाव कार्य में काफी मशक्कत करनी पड़ी। भारी मशीनों को वहां तक पहुंचाना बड़ी चुनौती साबित हुआ। राहत टीम के कर्मियों ने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश की ताकि मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। घंटों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कई घायलों को तुरंत पास के अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
इस हादसे के बाद आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है। उन लोगों की नींद उड़ गई है जो इसी तरह की पुरानी इमारतों में रहने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन ने अब उन सभी बिल्डिंगों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो जर्जर स्थिति में हैं और जिनके गिरने का खतरा बना हुआ है। हालांकि, दिल्ली में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। अक्सर मानसून या पुरानी इमारतों के गिरने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में लोग अपनी जान गंवाते रहते हैं।
भविष्य के लिए सबक और सुरक्षा के दावे
सीमापुरी का यह हादसा एक चेतावनी की तरह है। जब तक दिल्ली में पुराने घरों के स्ट्रक्चरल ऑडिट को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा और गरीब तबके के लोगों को सुरक्षित आवास उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और समय-समय पर मरम्मत का अभाव ही वह बड़ी वजह है जो इमारतों को मौत का जाल बना देती है। उम्मीद है कि इस दर्दनाक घटना के बाद जिम्मेदार विभाग नींद से जागेंगे और शहर की उन तमाम इमारतों की पहचान करेंगे जो अब रहने लायक नहीं बची हैं।
फिलहाल, घायलों का इलाज चल रहा है और प्रशासन की पहली प्राथमिकता मलबे को पूरी तरह हटाना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति वहां फंसा न हो। पुलिस ने भी मामला दर्ज कर लिया है और अब जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच की जा रही है।










