द फ्रीलान्स की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। मुंबई के दलाल स्ट्रीट से लेकर देश के वित्तीय गलियारों तक इस वक्त निवेशकों की नजरें सिर्फ एक ही आंकड़े पर टिकी हैं—सेंसेक्स और निफ्टी की चाल। पिछले कुछ घंटों के दौरान गूगल ट्रेंड्स पर 'सेंसेक्स इंडेक्स' (Sensex Index) की खोज में अचानक भारी उछाल आया है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि खुदरा निवेशक से लेकर संस्थागत खिलाड़ी तक, हर कोई बाजार के इस संवेदनशील दौर में अपनी रणनीति तय करने के लिए बेचैन है।
कच्चे तेल में नरमी और सरकारी बैंकों का दम
बाजार के शुरुआती कारोबार में राहत की सांस तब देखने को मिली जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी दर्ज की गई। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल के दामों में गिरावट सीधे तौर पर देश के राजकोषीय घाटे और महंगाई के दबाव को कम करती है। इस सकारात्मक रुझान के दम पर सेंसेक्स में शुरुआती घंटों में करीब 400 अंकों तक का उछाल देखा गया। इसके साथ ही, सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में जोरदार खरीदारी ने बाजार के सेंटीमेंट को संभालने का काम किया।
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मासिक एक्सपायरी और रोलओवर का खेल
यह हफ्ता डेरिवेटिव मार्केट के लिहाज से बेहद अहम रहा है। सितंबर सीरीज के समापन और अक्टूबर सीरीज के लिए रोलओवर की प्रक्रिया ने बाजार की volatilty (अस्थिरता) को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों के अनुसार, इस दौरान जिन शेयरों में सबसे ज्यादा रोलओवर देखा गया है, उन्होंने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई है। सितंबर सीरीज की विदाई के साथ ही अक्टूबर के लिए निवेशकों की नई पोजीशन ने बाजार में मिले-जुले रुख को बढ़ावा दिया है।
"बाजार में इस समय दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं—एक तरफ घरेलू मोर्चे पर राहत भरी खबरें हैं, तो दूसरी तरफ वैश्विक बाजार की अनिश्चितताएं निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही हैं।" - बाजार विशेषज्ञ
वैश्विक संकेतों का दबाव और घरेलू बाजार की जुझारू क्षमता
एक तरफ जहां घरेलू स्तर पर सकारात्मक आंकड़ों ने बाजार को गिरने से बचाया, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजारों (Global Cues) से मिले कमजोर संकेतों ने सेंसेक्स और निफ्टी के ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया। अमेरिकी बाजारों और एशियाई संकेतों के बीच आँख मिचौली का खेल लगातार जारी है। कई सत्रों में ऐसा देखा गया कि शुरुआती बढ़त वैश्विक दबाव के चलते दोपहर के सत्र तक आते-आते सीमित दायरे में सिमट गई।
भविष्य का दृष्टिकोण और निवेशकों के लिए सीख
द फ्रीलान्स की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल यह बताती है कि मौजूदा बाजार किसी एकतरफा ट्रेंड (Bull or Bear run) में नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल और घरेलू खबरों के बीच झूल रहा है। GIFT Nifty और एशियाई बाजारों से मिलने वाले संकेत अक्सर सुबह के कारोबार की दिशा तय करते हैं, लेकिन दिन ढलते-ढलते स्थानीय आर्थिक आंकड़े और कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन ही असली रुख तय करते हैं। निवेशकों के लिए इस समय केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर फोकस करना ही समझदारी होगी।








