अमृतसर/ग्राउंड ब्यूरो — द फ्रीलान्स की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के भारत दौरे के दौरान एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। पंजाब के अमृतसर पहुंचे अमेरिकी राजदूत जैसे ही श्री दरबार साहिब यानी स्वर्ण मंदिर के पास पहुंचे, वहां अचानक माहौल गरमा गया। उनके सामने कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी और वहां खालिस्तान जिंदाबाद के नारे भी गूंज उठे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है। अमेरिकी राजनयिक के सामने इस तरह के विरोध प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सर्जियो गोर के भारत दौरे के अन्य कार्यक्रम और बयान भी लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने देश के कई अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों का भी दौरा किया है। हाल ही में उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश लेह और लद्दाख का दौरा किया था, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि इस अमेरिकी दौरे के सामरिक मायने क्या हैं।外交 जानकारों का मानना है कि अमेरिका के इन राजनयिकों के दौरों का उद्देश्य भारत के संवेदनशील सीमावर्ती और रणनीतिक क्षेत्रों की जमीनी स्थिति को समझना है।
लेह और जम्मू-कश्मीर दौरे के कूटनीतिक मायने
अपनी भारत यात्रा के दौरान सर्जियो गोर ने केवल पंजाब का दौरा ही नहीं किया, बल्कि वे लेह भी पहुंचे। लेह यात्रा के पीछे क्या वजह है, इसे लेकर स्थानीय मीडिया से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और कूटनीतिक रिश्ते पिछले कुछ सालों में काफी मजबूत हुए हैं। ऐसे में अमेरिकी राजदूत का लद्दाख और लेह जैसे सामरिक रूप से अति संवेदनशील इलाके का दौरा करना बहुत कुछ कहता है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने उनकी इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
लेह के अलावा सर्जियो गोर ने भारत के आंतरिक मामलों और संप्रभुता को लेकर भी बेहद स्पष्ट बयान दिए हैं। उन्होंने अपने एक आधिकारिक बयान में दो टूक शब्दों में कहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अहम और अभिन्न अंग है। अमेरिकी राजदूत के इस बयान को कूटनीतिक मोर्चे पर भारत के लिए एक बड़ा समर्थन माना जा रहा है। पाकिस्तान और दुनिया के अन्य मंचों पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के लिए अमेरिकी अधिकारी का यह बयान एक करारा जवाब है।
भारत-अमेरिका रिश्तों की असीम संभावनाएं
अमृतसर में हुए विरोध प्रदर्शन और लेह दौरे की चर्चा के बीच सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर खुलकर बात की है। द हिंदू को दिए अपने एक बयान में उन्होंने साफ कहा है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच के संबंधों की क्षमता असीम है। दोनों देश मिलकर तकनीक, व्यापार, सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिकी राजदूत का यह बयान दोनों देशों के बीच की गहरी होती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करता है।
जमीनी स्तर पर भले ही कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हों, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर भारत और अमेरिका के बीच संवाद बहुत मजबूत बना हुआ है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और स्थानीय पुलिस अधिकारियों से लेकर खुफिया एजेंसियों के इनपुट जुटा रही है। स्वर्ण मंदिर के बाहर हुई नारेबाजी के मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन उन लोगों की पहचान करने में जुट गया है जिन्होंने इस तरह की हरकत को अंजाम दिया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वीवीआईपी दौरों के दौरान इस तरह की सुरक्षा चूक या प्रदर्शनों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
स्थानीय प्रशासन की सतर्कता और आगे की कार्रवाई
अमृतसर में घटी इस घटना के बाद पंजाब पुलिस और खुफिया तंत्र पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं। वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहां कमी रह गई, इसकी आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है। अमेरिकी राजदूत का यह दौरा भारत की आंतरिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों दृष्टियों से बेहद संवेदनशील रहा है। एक तरफ जहां उनके बयानों से भारत के रुख को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल मिला है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर हुए विरोध प्रदर्शनों ने सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल भी खोल दी है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि आने वाले दिनों में इस दौरे के राजनीतिक और कूटनीतिक परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। भारत सरकार और अमेरिकी दूतावास दोनों ही इस मामले में आपसी तालमेल बनाए हुए हैं। जैसे-जैसे इस यात्रा से जुड़े और नए तथ्य सामने आएंगे, हमारी टीम अपने पाठकों तक सबसे पहले सटीक और निष्पक्ष खबरें पहुंचाती रहेगी। फिलहाल अमृतसर प्रशासन उन चेहरों की पहचान में जुटा है जिन्होंने पवित्र नगरी में शांति व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास किया।





