नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत पर सौ प्रतिशत टैरिफ लगाने के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में अगले दस दिनों के भीतर बड़ा फैसला लेंगे। यह फैसला इस बात पर भी निर्भर करेगा कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखता है या नहीं। इस बयान के बाद से नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक गलियारों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
सर्जियो गोर ने अपने बयान में भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों की मजबूती पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत की दोस्ती पर पूरा यकीन है। लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन की तरफ से व्यापारिक नीतियों और रूस से तेल आयात को लेकर सख्त शर्तें भी रखी जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका भारत पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध या भारी शुल्क लगाने से पहले कूटनीतिक बातचीत के जरिए रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।
टैरिफ और रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की नजर
अमेरिकी राजदूत के इस बयान के बाद से भारतीय ऊर्जा बाजारों में चिंता की लहर दौड़ गई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से तेल खरीदने के मामले में अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे। सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन इस पर बहुत बारीकी से नजर बनाए हुए है। अगले दस दिन भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम होने वाले हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है और देशहित को ध्यान में रखते हुए फैसले ले रहा है.
दूसरी तरफ, इस संभावित टैरिफ के खतरे के बीच दोनों देशों के बीच चल रहे व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक खबरें आ रही हैं। अमेरिकी अधिकारी मार्को रुबियो की संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले इस ट्रेड पैक्ट को अंतिम रूप दिया जा सकता है। भारत और अमेरिका के व्यापारिक प्रतिनिधि लगातार संपर्क में हैं। सरकार का यह प्रयास है कि किसी भी बड़े आर्थिक झटके से बचने के लिए बातचीत के जरिए ही सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाए।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अंतिम मुहर की तैयारी
सर्जियो गोर के बयानों से यह साफ हो गया है कि अमेरिका व्यापार और कूटनीति को एक साथ साधना चाहता है। एक तरफ जहां टैरिफ की तलवार लटकी है, वहीं दूसरी तरफ व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। भारतीय उद्योग जगत और निर्यातकों की निगाहें पूरी तरह से इस बात पर टिकी हैं कि अगले दस दिनों में ट्रंप प्रशासन क्या फैसला लेता है। यदि अमेरिका भारी टैरिफ लगाता है, तो भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाजार में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि भारत सरकार किसी भी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सर्वोपरि रख रही है। रूस से तेल आयात का मामला देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसे में अमेरिकी राजदूत के बयानों के बाद आने वाले दिन दोनों देशों के रिश्तों की नई दिशा तय करेंगे। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं और बीच का कोई रास्ता निकाला जा सकता है।
अगले दस दिनों में तय होगी दोनों देशों की आर्थिक दिशा
सर्जियो गोर के इस ताजा बयान ने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। अब पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या अमेरिका वाकई भारत पर भारी टैरिफ लगाएगा या फिर व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच की दूरियों को कम करेगा? इसका जवाब आने वाले दस दिनों के भीतर मिल जाएगा। भारतीय कूटनीतिक दल हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है।









