दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल के कॉरिडोर में खड़े होकर जब मैंने सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट से बात की, तो उनका पहला वाक्य चौंकाने वाला था—'अब हमारे पास ऐसे मरीज आ रहे हैं जिनका लिपिड प्रोफाइल यानी कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह नॉर्मल होता है, लेकिन फिर भी उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आ जाता है।' देश के विभिन्न हिस्सों से पिछले कुछ घंटों में सामने आए ट्रेंड्स और मेडिकल रिपोर्ट्स इस बात की गवाही दे रहे हैं कि हृदय रोगों का दायरा अब बदल रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस विशेष फील्ड रिपोर्ट में हम इसी अदृश्य खतरे और उससे निपटने के वैज्ञानिक उपायों की थाह ले रहे हैं।
नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल और साइलेंट किलर का भ्रम
आम तौर पर लोग यह मानकर निश्चिंत हो जाते हैं कि यदि उनकी सालाना लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स नियंत्रण में हैं, तो उनका दिल सुरक्षित है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहती है। मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, धमनियों के अंदर जमा होने वाला प्लाक (Plaque) हमेशा कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर से ही नहीं बनता। कई बार ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन और सॉफ्ट प्लाक के फटने से अचानक दिल का दौरा पड़ जाता है, जिसे स्टैंडर्ड ब्लड टेस्ट आसानी से पकड़ नहीं पाते। यही कारण है कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि पारंपरिक जांचों के अलावा भी कुछ खास स्क्रीनिंग की आवश्यकता होती है।
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30-40 प्रतिशत ब्लॉकेज: कितना खतरनाक है यह शुरुआती स्तर?
अक्सर लोग 80 से 90 प्रतिशत ब्लॉकेज को ही गंभीर मानते हैं, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट चेतावनी देते हैं कि 30 से 40 प्रतिशत तक का शुरुआती ब्लॉकेज भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। यह वह चरण होता है जहां धमनियां अंदर से कमजोर हो रही होती हैं। यदि इस शुरुआती संकेत को नजरअंदाज कर दिया जाए, तो तनाव या भारी शारीरिक श्रम के दौरान यह हल्का ब्लॉकेज अचानक फट सकता है और बड़े पैमाने पर थक्का (Blood Clot) जमा कर सकता है। यही वजह है कि मेडिकल बिरादरी अब प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी यानी रोकथाम पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है।
40 के बाद कौन-से मुख्य टेस्ट कराना है अनिवार्य?
विशेषकर 40 की उम्र पार कर चुके पुरुषों और महिलाओं के लिए कुछ खास जांचें जीवन रक्षा कवच बन सकती हैं:
- लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile): हालांकि यह बुनियादी टेस्ट है, लेकिन इसके हर एक कंपोनेंट (LDL, HDL, Triglycerides) की बारीकी से डॉक्टर की सलाह पर समीक्षा होनी चाहिए।
- टीएमटी स्क्रीनिंग (TMT - Treadmill Test): यह टेस्ट दौड़ते या चलते समय दिल की कार्यप्रणाली और उस पर पड़ने वाले दबाव को रिकॉर्ड करता है, जिससे छुपी हुई एनजाइना या ब्लॉकेज का पता चलता है।
- एचएस-सीआरपी (hs-CRP Test): यह शरीर में चल रही सूजन (Inflammation) का पता लगाता है, जो धमनियों के अंदरूनी नुकसान का एक बड़ा संकेतक है।
- कैल्शियम स्कोर सीटी स्कैन (Calcium Score CT Scan): यह कोरोनरी धमनियों में कैल्शियम के जमाव को मापकर भविष्य के जोखिम का सटीक आकलन करता है।
पुरुषों में विशेष जोखिम और जीवनशैली में बदलाव की जरूरत
मेडिकल आंकड़ों पर नजर डालें तो कामकाजी पुरुषों में तनाव, खराब खानपान, सिगरेट-शराब का सेवन और नींद की कमी हार्ट अटैक के जोखिम को कई गुना बढ़ा रही है। पुरुषों को अक्सर यह गलतफहमी होती है कि वे शारीरिक रूप से मजबूत हैं, इसलिए उन्हें दिल की बीमारी नहीं हो सकती। लेकिन आधुनिक जीवनशैली इस मिथक को लगातार तोड़ रही है। विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि लक्षण दिखने का इंतजार न करें, बल्कि समय रहते अपनी कार्डियक स्क्रीनिंग कराएं। सतर्कता और नियमित जांच ही वह माध्यम है जो इस खामोश खतरे से आपकी और आपके अपनों की जान बचा सकती है।








