शराबबंदी वाले राज्यों में नकली शराब का कहर
देश के जिन हिस्सों में पूर्ण शराबबंदी लागू है, वहां अवैध तरीके से बेची जाने वाली जहरीली शराब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। हाल ही में सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, संदिग्ध जहरीला पेय पदार्थ पीने की वजह से दो दिनों के भीतर कई लोगों की जान चली गई, जिससे स्थानीय इलाकों में कोहराम मच गया है।
इस दुखद घटना के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि पीड़ितों ने किसी स्थानीय स्रोत से अवैध रूप से खरीदी गई मिलावटी शराब का सेवन किया था। डॉक्टरों के मुताबिक, इस तरह की जहरीली शराब में खतरनाक रसायन या मेथनॉल मिला होता है, जो शरीर में जाते ही तंत्रिका तंत्र और आंखों की रोशनी पर घातक असर डालता है।
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विशेष जांच दल (SIT) का गठन और ताबड़तोड़ छापेमारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने फौरन एक्शन लेते हुए एक विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया है। इस विशेष दल का नेतृत्व एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सौंपा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य इस पूरे जहरीले कारोबार के सिंडिकेट का पर्दाफाश करना है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह मिलावटी सामग्री किस स्रोत से बनकर तैयार हुई थी और इसकी सप्लाई चेन में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीमों ने कई संदिग्ध ठिकानों पर अचानक छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस दौरान अवैध शराब के बड़े जखीरे को बरामद किया गया है और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध नेटवर्क से जुड़े हर एक छोटे-बड़े तस्कर को बेनकाब किया जाएगा और कानून के मुताबिक सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए सैंपल
घटना के पीछे के वैज्ञानिक कारणों और जहरीले तत्वों की सही मात्रा का पता लगाने के लिए पुलिस ने बरामद की गई बोतलों और अन्य संदिग्ध तरल पदार्थों के नमूने एकत्र किए हैं। इन सैंपलों को उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच के लिए गुवाहाटी स्थित प्रयोगशाला में भेजा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट आने के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि शराब में किस जहरीले रसायन का इस्तेमाल किया गया था।
"हमारी प्राथमिकता इस अवैध कारोबार की जड़ों तक पहुंचना है। जो भी लोग आम जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। एसआईटी हर एक पहलू की गहराई से जांच कर रही है।" — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
प्रशासन ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि यदि इस अवैध धंधे में किसी स्थानीय माफिया या संरक्षण प्राप्त तस्कर की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
तीन दशकों के निषेध कानून के बावजूद चल रहा काला कारोबार
गौरतलब है कि संबंधित राज्य में नब्बे के दशक से ही शराब के उत्पादन, बिक्री और सेवन पर पूरी तरह पाबंदी लगी हुई है। इसके बावजूद राज्य के भीतर अवैध तस्करी के जरिए शराब की खेप पहुंचाई जाती है। तस्कर अक्सर मुनाफा कमाने के चक्कर में नकली और मिलावटी शराब तैयार कर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में सप्लाई करते हैं। इस अवैध कारोबार के कारण आए दिन इस तरह के बड़े हादसे देखने को मिलते हैं।
समाज के प्रबुद्ध जनों और जानकारों का कहना है कि केवल कानूनी पाबंदी लगा देने से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी और जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, स्थानीय नागरिकों को भी जागरूक होना होगा ताकि वे इस तरह के अवैध और खतरनाक धंधों की जानकारी समय रहते प्रशासन को दे सकें।
प्रशासन की चेतावनी और नागरिकों से अपील
इस भयावह हादसे के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गए हैं। प्रशासन की ओर से नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी अज्ञात, बिना लेबल वाली या संदिग्ध शराब का सेवन बिल्कुल न करें। यदि किसी व्यक्ति को शराब पीने के बाद चक्कर आना, आंखों से धुंधला दिखना, सांस लेने में तकलीफ या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हों, तो बिना एक पल गंवाए उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
सरकार और पुलिस महकमा मिलकर इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को पूरी तरह से कैसे रोका जाए। बॉर्डर इलाकों और आंतरिक मार्गों पर चेकिंग अभियान को और अधिक कड़ा कर दिया गया है ताकि अवैध शराब की आवाजाही को पूरी तरह से सील किया जा सके।

