सोशल मीडिया पर क्यों वायरल हो रही है पुरानी और काल्पनिक तस्वीरें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अक्सर ऐसी खबरें और तस्वीरें वायरल हो जाती हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता है। इन दिनों बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ी एक तस्वीर इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस वायरल तस्वीर में एक लड़की को सुशांत सिंह राजपूत को पकड़े हुए दिखाया गया है, जबकि पास में दो अन्य लोग भी खड़े नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर को शेयर करते हुए यह दावा किया जा रहा है कि यह अभिनेता के जीवन के अंतिम समय की एक अनदेखी तस्वीर है।
हालांकि, जब इस वायरल दावे की गहराई से पड़ताल की गई, तो एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाला सच सामने आया। यह तस्वीर न तो सुशांत सिंह राजपूत के जीवनकाल की है और न ही असली है। डिजिटल युग में तकनीक का गलत इस्तेमाल करके किस तरह से भ्रामक सामग्रियां फैलाई जा रही हैं, यह मामला उसका एक ताजा उदाहरण है। लोग बिना सच्चाई जाने ऐसी तस्वीरों को तेजी से साझा कर रहे हैं, जिससे सोशल मीडिया पर अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
तस्वीर को सबसे पहले एक इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था, जिसके बाद यह अन्य प्लेटफॉर्म्स पर भी वायरल होने लगी। पोस्ट के साथ कैप्शन में सनसनीखेज दावे किए गए ताकि अधिक से अधिक लोगों का ध्यान खींचा जा सके। लेकिन हमारी विस्तृत जांच में यह पूरी तरह से एक मनगढ़ंत और एआई-निर्मित कंटेंट साबित हुआ है, जिसका मकसद केवल सनसनी फैलाना प्रतीत होता है।
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एआई डिटेक्शन टूल्स ने खोली वायरल तस्वीर की पोल
वायरल हो रही तस्वीर की सत्यता की जांच करने के लिए विभिन्न डिजिटल और तकनीकी टूल्स का सहारा लिया गया। जब तस्वीर को गौर से देखा गया, तो उसमें मौजूद चेहरों की बनावट और प्रकाश व्यवस्था (lighting) स्वाभाविक नहीं लग रही थी। चेहरों के अनुपात और बारीकियॉं ऐसी थीं जो किसी सामान्य कैमरे से खींची गई तस्वीर में नहीं होती हैं। यहीं से इस तस्वीर के कृत्रिम रूप से बनाए जाने का पहला संदेह पैदा हुआ।
इस संदेह को पुख्ता करने के लिए तस्वीर को कई प्रतिष्ठित एआई डिटेक्शन टूल्स पर स्कैन किया गया। सबसे पहले इसे 'AI or Not' टूल पर जांचा गया, जिसने इस तस्वीर के एआई द्वारा बनाए जाने के करीब 83 फीसदी संकेत दिए। इसके बाद एक अन्य आधुनिक टूल 'Undetectable AI' का उपयोग किया गया, जिसने भी इस बात की प्रबल संभावना जताई कि यह तस्वीर कंप्यूटर एल्गोरिदम की मदद से तैयार की गई है।
जांच के अगले चरण में 'Is It AI' नामक टूल का उपयोग किया गया। इस तीसरे टूल ने अपने विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे और तस्वीर के एआई-जनरेटेड होने के 94 फीसदी तक संकेत दिए। इन तमाम तकनीकी विश्लेषणों ने यह साबित कर दिया कि इंटरनेट पर वायरल हो रहा यह दावा पूरी तरह से आधारहीन और तकनीकी रूप से गढ़ा हुआ है।
मनोरंजन जगत के विशेषज्ञों की राय और तकनीकी पुष्टि
तकनीकी टूल्स के परिणामों के बाद इस मामले में मनोरंजन जगत के जानकारों और वरिष्ठ पत्रकारों से भी संपर्क किया गया। मुंबई के एक जाने-माने एंटरटेनमेंट सीनियर जर्नलिस्ट पराग छापेकर से जब इस वायरल तस्वीर के बारे में बात की गई, तो उन्होंने भी स्पष्ट शब्दों में इसे खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि इस तरह की तस्वीरें हालिया एआई तकनीक का उपयोग करके आसानी से बनाई जा रही हैं, जिनका असली घटनाओं से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी किसी चर्चित या संवेदनशील मामले से जुड़ी खबरें सुर्खियों में आती हैं, तो कुछ लोग रातों-रात लोकप्रियता पाने या सनसनी फैलाने के लिए ऐसे हथकंडों का इस्तेमाल करते हैं। वे पुरानी घटनाओं के नाम पर एआई जनरेटेड तस्वीरें या वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं, जिससे आम जनता आसानी से भ्रमित हो जाती है।
मीडिया विश्लेषकों का यह भी मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस प्रकार के फेक कंटेंट की बाढ़ आ चुकी है। पाठकों और सोशल मीडिया यूजर्स को यह समझना होगा कि हर दिखने वाली चीज सच नहीं होती। किसी भी संवेदनशील या सनसनीखेज तस्वीर को आगे शेयर करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।
दिशा सालियान मामले की दोबारा जांच और सुशांत केस का कनेक्शन
सुशांत सिंह राजपूत का नाम एक बार फिर से सुर्खियों में आने के पीछे एक बड़ी वजह जुड़ी हुई है। जून 2020 में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने मुंबई स्थित अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे, जिसके बाद देश भर में लंबी बहस छिड़ गई थी। इस मामले में कई केंद्रीय जांच एजेंसियों ने अपनी जांच-पड़ताल की थी और लंबे समय तक यह मामला सुर्खियों में बना रहा था। साल 2025 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने इस मामले से जुड़े कुछ पहलुओं की समीक्षा करते हुए इसे बंद कर दिया था।
हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिवंगत सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान के मामले में सुनवाई के दौरान कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। अदालत ने सीबीआई को इस मामले में नए सिरे से एफआईआर दर्ज कर गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत के मामलों के तार पहले भी एक-साथ जोड़े जाते रहे हैं, यही कारण है कि दिशा केस की जांच फिर से शुरू होते ही सोशल मीडिया पर सुशांत सिंह राजपूत से जुड़ी पुरानी चर्चाएं और अफवाहें एक बार फिर तेज हो गई हैं।
इसी माहौल का फायदा उठाते हुए कुछ सोशल मीडिया हैंडलर्स ने पुरानी या काल्पनिक सामग्रियों को नए दावों के साथ परोसना शुरू कर दिया है, ताकि लोगों की भावनाओं को भड़काया जा सके या अधिक व्यूज बटोरे जा सकें।
सोशल मीडिया यूजर्स और फेक न्यूज फैलाने वालों की कार्यप्रणाली
इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए उस इंस्टाग्राम अकाउंट की भी पड़ताल की गई जहां से यह तस्वीर सबसे पहले साझा की गई थी। जांच में सामने आया कि यह हैंडल जून 2022 में बनाया गया था और इसके फॉलोअर्स की संख्या भी बहुत अधिक नहीं है। हालांकि, कम फॉलोअर्स होने के बावजूद इस तरह के भ्रामक पोस्ट एल्गोरिदम और शेयरिंग के जरिए तेजी से वायरल हो जाते हैं।
"डिजिटल दौर में एआई का दुरुपयोग करके फैलाई जा रही अफवाहें समाज और न्याय प्रक्रिया दोनों के लिए खतरनाक हैं। किसी भी पुरानी या अप्रमाणित तस्वीर को सनसनीखेज दावों के साथ शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच जरूर करनी चाहिए।" — मीडिया विश्लेषक एवं फैक्ट चेकर
फेक न्यूज और एआई जनरेटेड कंटेंट से निपटने के लिए आज के समय में फैक्ट चेकर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। विश्वास न्यूज जैसे संस्थान लगातार ऐसे दावों की पोल खोल रहे हैं ताकि आम जनता तक सही और सटीक जानकारी पहुंच सके। पाठकों से भी यह अपील की जाती है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाली हर जानकारी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध सामग्री को आगे बढ़ाने से बचें।






