बेंगलुरु के मीडिया गलियारों से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक, आज हर तरफ फेक न्यूज और भ्रामक अभियानों की गूंज है। हाल ही में 'सುವರ್ಣ ನ್ಯೂಸ್' (Suvarna News) के नाम से प्रसारित हुए कथित एग्जिट पोल को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बूम (BOOM) जैसी प्रतिष्ठित फैक्ट-चेक एजेंसियों ने अपनी पड़ताल में यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया और कुछ अनधिकृत पोर्टल्स पर प्रसारित किए जा रहे वे आंकड़े पूरी तरह फर्जी थे, जिन्हें इस प्रतिष्ठित चैनल के नाम पर गढ़ा गया था। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस पूरे प्रकरण की जमीनी पड़ताल की, तो पता चला कि कैसे चुनावों के दौरान जनता को भ्रमित करने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी डिजिटल नैरेटिव तैयार किए जाते हैं।
फर्जी आंकड़ों का मायाजाल और मीडिया की साख
केवल चुनावी सर्वेक्षणों तक ही यह मामला सीमित नहीं है। क्षेत्रीय मीडिया स्पेस में एक तरफ जहां सनसनीखेज वायरल वीडियो (जैसे कि युवाओं को निशाना बनाने वाले प्रैंक और कॉल्स) और खेल जगत की खबरें (जैसे रिक्की पोंटिंग से जुड़े अपडेट्स) तेजी से ट्रेंड करती हैं, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड चुनाव जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस तरह के फेक पोल्स का तैरना लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एशियन और कर्नाटक के स्थानीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जहां एक ओर 'जयಕರ್ನಾಟಕ' संगठन द्वारा एंकर भावना के सम्मान जैसे सकारात्मक सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जा रही अफवाहें पत्रकारिता की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचा रही हैं।
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- प्रसिद्ध चैनलों के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी एग्जिट पोल प्रसारित करना एक गंभीर साइबर और मीडिया अपराध है।
- फैक्ट-चेक संगठनों की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे भ्रामक वीडियो और आंकड़े जनता का ध्रुवीकरण करने के लिए रचे जाते हैं।
- क्षेत्रीय पत्रकारिता में सनसनीखेज कंटेंट और वास्तविक खबरों के बीच की रेखाएं लगातार धुंधली होती जा रही हैं।
हमारी फील्ड जांच यह भी दर्शाती है कि डिजिटल एल्गोरिदम किस तरह से ऐसी असत्यापित सामग्रियों को हवा देते हैं। जब तक मीडिया नियामक और सोशल मीडिया दिग्गज मिलकर एल्गोरिडमिक जवाबदेही तय नहीं करेंगे, तब तक चुनावी और सामाजिक मुद्दों पर जनता को गुमराह करने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता। द फ्रीलान्स की यह रिपोर्ट पाठकों से अपील करती है कि वे किसी भी वायरल दावे पर आँख मूंदकर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि अवश्य करें।







