हैदराबाद/ग्राउंड ब्यूरो — तेलंगाना में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि प्रदेश भर में धान की सरकारी खरीद प्रक्रिया आगामी एक अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। इस फैसले से उन लाखों किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने अपनी फसल कटाई की पूरी तैयारी कर ली है। राज्य के कृषि विभागों और नागरिक आपूर्ति निगम को इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
धान खरीद की इस सुगबुगाहट के बीच सरकार और प्रशासन के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाले अवशेष यानी पराली को लेकर कृषि मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने किसानों से विशेष अपील की है। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि किसान किसी भी कीमत पर खेतों में पराली या धान के ठूंठ न जलाएं। पराली जलाने से न सिर्फ हमारी जमीन की उपजाऊ शक्ति कमजोर होती है, बल्कि पूरे वातावरण में खतरनाक प्रदूषण भी फैलता है। सरकार किसानों से लगातार अपील कर रही है कि वे पराली को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें या उसे खाद बनाने के काम में लाएं।
धान की पैदावार और कीट नियंत्रण पर वैज्ञानिकों का जोर
जमीनी स्तर पर फसल की सुरक्षा को लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपनी गंभीर चिंताएं साझा की हैं। हाल ही में सामने आए वैज्ञानिक शोध और संपादकीय रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि बदलते मौसम के कारण धान की फसलों में नई तरह की बीमारियां और कीट लगने का खतरा काफी बढ़ गया है। कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक किसानों को लगातार सलाह दे रहे हैं कि वे केवल ऐसी किस्मों के बीजों का चयन करें जो कीटों और बीमारियों के खिलाफ प्राकृतिक रूप से लड़ने में सक्षम हों। सही समय पर सही कीटनाशकों का इस्तेमाल और खेतों में पानी की उचित निकासी से फसल के नुकसान को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
दूसरी ओर, इस त्योहारी और कृषि सीजन के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ी कई अन्य चर्चाएं भी सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर बनी हुई हैं। हालांकि, किसानों के बीच इस समय सबसे बड़ा मुद्दा अपनी धान की फसल का सही न्यूनतम समर्थन मूल्य पाना और समय पर खरीद केंद्रों का खुलना है। ग्रामीण इलाकों में किसान संगठनों के नेता सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि खरीद केंद्रों पर तौल और भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी हो, ताकि बिचौलियों को किसी भी तरह का फायदा उठाने का मौका न मिल सके।
प्रशासनिक तैयारियां और जमीनी हकीकत
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब तेलंगाना के कुछ ग्रामीण जिलों का दौरा किया तो वहां धान की कटाई से पहले की तैयारियां जोरों पर दिखाई दीं। कई पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव सोसाइटी) गोदामों की मरम्मत का काम चल रहा है और नए नमी मापने वाले यंत्र खरीदे जा रहे हैं ताकि किसानों के धान में नमी के नाम पर कटौती न की जा सके। स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि इस बार किसानों को टोकन प्रणाली के जरिए समयबद्ध तरीके से बुलाया जाएगा, जिससे मंडियों में अनावश्यक भीड़ नहीं लगेगी और किसानों को अपनी ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ लंबी कतारों में इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, एक अक्टूबर से शुरू होने वाली धान खरीद का यह सीजन तेलंगाना के कृषि अर्थतंत्र के लिए बेहद अहम साबित होने वाला है। सरकार के सामने एक तरफ समय पर खरीद पूरी करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ पराली जलाने की कुप्रथा को पूरी तरह से रोकने का दबाव भी है। यदि प्रशासन और किसान दोनों मिलकर समझदारी से काम लें, तो यह सीजन पूरी तरह सफल हो सकता है और किसानों की मेहनत का पूरा फल उनके खातों तक सुरक्षित पहुंच सकता है।




