मुंबई/नई दिल्ली: 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड कवरेज के अनुसार, भारतीय राजनीतिक पटल पर एक बार फिर बड़े गठजोड़ और हलचल का दौर शुरू हो चुका है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। एक तरफ जहां कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले ठाकरे बंधु चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं, वहीं दूसरी तरफ आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी रणनीति को धार देते हुए उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है।
मुंबई की सड़कों पर ठाकरे बंधुओं का शक्ति प्रदर्शन
छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने तमाम वैचारिक और राजनीतिक दूरियों को दरकिनार करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के कामकाज के तौर-तरीकों के खिलाफ एक विशाल मार्च का नेतृत्व किया। मुंबई की सड़कों पर उमड़ी भारी भीड़ इस बात का गवाह थी कि दोनों दलों के कार्यकर्ता इस मुद्दे पर कितने आक्रामक हैं।
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क्यों भड़के हैं उद्धव और राज ठाकरे?
द फ्रीलान्स के संवाददाताओं द्वारा ग्राउंड जीरो पर जुटाए गए तथ्यों के मुताबिक, हालिया चुनावी प्रक्रियाओं और चुनाव आयोग द्वारा लिए गए कुछ विवादास्पद निर्णयों के बाद दोनों भाइयों ने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शन के दौरान दोनों नेताओं के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल चुनिंदा राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। मुंबई के इस विरोध प्रदर्शन ने राज्य की सियासत में एक बार फिर इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या ठाकरे परिवार का यह मिलन आने वाले स्थानीय निकाय या विधानसभा चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा।
'यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और निष्पक्ष संस्थाओं को बचाने की है।' - ठाकरे खेमे के एक वरिष्ठ नेता की प्रतिक्रिया।
राष्ट्रीय राजनीति में राज्यसभा चुनाव की बिसात
एक तरफ जहां महाराष्ट्र में क्षेत्रीय दलों का यह अनोखा गठबंधन चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में राष्ट्रीय रणनीतिकार चुनावी गणित को दुरुस्त करने में जुटे हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यसभा चुनावों के लिए अपने दो और उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल से अपने प्रत्याशियों के नामों पर मुहर लगाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ऊपरी सदन में अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह गंभीर है।
आगे की राजनीतिक चालें और विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग के खिलाफ उद्धव और राज ठाकरे का एक मंच पर आना महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण पैदा कर सकता है। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकजुटता केवल एक विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहती है या फिर आने वाले बड़े चुनावों में किसी स्थायी राजनीतिक समझौते का रूप लेती है। वहीं, भाजपा द्वारा राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन से यह साफ है कि पार्टी हर मोर्चे पर बेहद सधे हुए कदम उठा रही है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखेगा और हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाएगा।








