ऑटोमोबाइल जगत में फिर चर्चा में आई टोयोटा हाइलक्स की अविश्वसनीय मजबूती
ऑटोमोबाइल बाजार में जब भी भरोसेमंद और सबसे मजबूत गाड़ियों की बात होती है, तो जापानी वाहन निर्माता कंपनी टोयोटा का नाम सबसे ऊपर आता है। कंपनी की गाड़ियां अपनी बेजोड़ ड्यूरेबिलिटी और रफ-एंड-टफ परफॉर्मेंस के लिए दुनियाभर में पहचानी जाती हैं। हाल ही में कंपनी ने अपनी मशहूर लाइफस्टाइल पिकअप ट्रक टोयोटा हाइलक्स (Toyota Hilux) को लेकर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने एक बार फिर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है। टोयोटा ने अपनी गाड़ी की मजबूती का लोहा मनवाने के लिए एक बार फिर से एक अत्यंत खतरनाक और रोमांचक स्टंट को परफॉर्म किया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस रोमांचक परीक्षण के तहत कंपनी ने अपनी नई जनरेशन की इलेक्ट्रिक हाइलक्स (Hilux EV) पिकअप ट्रक की छत पर भारी-भरकम कारवां (चलने-फिरने वाला घर नुमा ढांचा) गिराया। यह स्टंट देखने में जितना डरावना था, उसका नतीजा उतना ही हैरान करने वाला रहा। भारी मार झेलने के बाद भी गाड़ी ने अपनी कार्यक्षमता नहीं खोई, जिससे साबित होता है कि टोयोटा अपने वाहनों की बिल्ड क्वालिटी को लेकर कितनी गंभीर और सटीक तकनीक का इस्तेमाल करती है।
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दो दशक पुराना इतिहास और 'किलिंग ए टोयोटा' का वह मशहूर किस्सा
इस ताजा स्टंट के पीछे करीब 23 साल पुराना एक बेहद रोमांचक इतिहास जुड़ा हुआ है। बात साल 2003 की है, जब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन यानी बीबीसी के लोकप्रिय शो 'टॉप गियर' के दौरान प्रस्तोता जेरेमी क्लार्कसन ने टोयोटा हाइलक्स के डीजल वर्जन को हर संभव तरीके से तबाह करने की कोशिश की थी। उस दौर में इस एक्सपेरिमेंट को 'किलिंग ए टोयोटा' नाम दिया गया था। उस परीक्षण में हाइलक्स डीजल को समुद्र में डुबोने, उस पर हथौड़े चलाने, ऊंची इमारतों से गिराने और यहां तक कि आग की लपटों में झोंकने जैसे तमाम खतरनाक दौर से गुजारा गया था।
तमाम आपदाओं और झटकों को झेलने के बाद भी वह डीजल पिकअप ट्रक चालू हालत में रहा और आराम से ड्राइव करते हुए वापस लौटा था। इसी घटना ने हाइलक्स को दुनिया भर में 'अजेय' और 'कभी न टूटने वाली गाड़ी' की छवि दे दी थी। अब लगभग दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद, टोयोटा ने खुद आगे बढ़कर उसी ऐतिहासिक परीक्षण को अपने नए जमाने के इलेक्ट्रिक अवतार के साथ दोबारा दोहराने का फैसला किया ताकि आधुनिक तकनीक पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो सके।
इलेक्ट्रिक हाइलक्स पर हुआ 760 किलो के भारी कारवां का प्रहार
पुराने दिनों की यादों को ताजा करते हुए टोयोटा यूके ने इस बार पेट्रोल या डीजल इंजन वाली गाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी तरह बैटरी से चलने वाली नई 9वीं जनरेशन की टोयोटा हाइलक्स ईवी (Hilux EV) को इस कठिन परीक्षा के लिए चुना। यह स्टंट इंग्लैंड के सफोक में स्थित ब्रेंटवाटर एयरफील्ड में अंजाम दिया गया। इस साहसिक प्रयोग के दौरान लगभग 760 किलोग्राम वजन वाले एक भारी-भरकम कारवां यानी मोबाइल होम को क्रेन की सहायता से लगभग 9 मीटर यानी करीब 30 फीट की ऊंचाई पर लटकाया गया।
इसके ठीक नीचे बिल्कुल नई हाइलक्स बीईवी को पार्क किया गया था। बिना किसी पूर्व तैयारी या अतिरिक्त सुरक्षा कवच के, उस भारी-भरकम ढांचे को सीधे पिकअप ट्रक की छत के ऊपर स्वतंत्रतापूर्वक गिरा दिया गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कारवां का फाइबरग्लास और लकड़ी का ढांचा एक झटके में चकनाचूर हो गया और चारों तरफ मलबा फैल गया। वाहन के चारों ओर और अंदर लगे हाई-डेफिनिशन कैमरों ने इस खौफनाक टक्कर के हर एक पल को अपने कैमरे में कैद कर लिया।
भीषण तबाही के बाद भी अपने दम पर स्टार्ट हुई गाड़ी
जब 760 किलो का भारी ढांचा सीधे छत पर गिरा, तो जाहिर तौर पर पिकअप ट्रक को भारी नुकसान पहुंचना तय था। इस भीषण दुर्घटना के प्रभाव से हाइलक्स की छत अंदर की तरफ दब गई, अगली विंडशील्ड यानी शीशा पूरी तरह चटक गया और पीछे के कार्गो बेड पर गहरा गड्ढा बन गया। इसके अलावा, अचानक पड़े भारी वजन के कारण गाड़ी का सस्पेंशन सिस्टम कुछ पलों के लिए पूरी तरह नीचे बैठ गया और ट्रक एक लो-राइडर की तरह दिखने लगा था।
"इतनी बड़ी और विनाशकारी टक्कर के बाद भी हमारी टीम और कैमरे इस बात के गवाह बने कि फ्रेम और बैटरी पैक पर कोई आंच नहीं आई। गाड़ी की यह सहनशक्ति इस बात का प्रमाण है कि हम अपने ग्राहकों को कितनी सुरक्षित और टिकाऊ इंजीनियरिंग दे रहे हैं।" — टोयोटा यूके इंजीनियरिंग टीम
सबसे चमत्कारिक और हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी बड़ी दुर्घटना के तुरंत बाद जब ड्राइवर ने चाबी घुमाई, तो हाइलक्स ईवी एक ही बार में स्टार्ट हो गई। बिना किसी बाहरी मदद के वह मलबे से बाहर निकली और खुद ड्राइव करते हुए परीक्षण क्षेत्र से दूर चली गई।
लैडर-फ्रेम चेसिस और बैटरी पैक रहे पूरी तरह सुरक्षित
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, इस दुर्घटना में भले ही गाड़ी की बॉडी और शीट मेटल को भारी क्षति पहुंची हो, लेकिन इसका मुख्य दिल और रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले हिस्से बिल्कुल सुरक्षित बच गए। पारंपरिक लैडर-फ्रेम चेसिस पर आधारित इस इलेक्ट्रिक पिकअप ट्रक में लगे पावरफुल बैटरी पैक और इलेक्ट्रिक मोटर्स को एक खरोंच तक नहीं आई। सस्पेंशन सिस्टम ने गिरने के अधिकांश झटके को अपने ऊपर सोख लिया, जिससे बैटरी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकी।
कंपनी के तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, इस आधुनिक इलेक्ट्रिक पिकअप में 59.2kWh की बैटरी दी गई है, जो फ्रंट और रियर दोनों मोटरों को ऊर्जा प्रदान करती है। इसमें फुल-टाइम ऑल-व्हील ड्राइव मोड मिलता है, जो मुश्किल रास्तों पर भी शानदार परफॉर्मेंस देता है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि छत के ढांचे को पहुंचे भारी नुकसान के कारण इस विशेष वाहन को शायद कानूनी रूप से 'राइट-ऑफ' यानी कमर्शियल रूप से अनुपयोगी घोषित करना पड़े, लेकिन इस स्टंट ने यह साबित कर दिया कि टोयोटा की इंजीनियरिंग आपदाओं में भी जीवन बचाने की क्षमता रखती है।








