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तकनीकी छात्रों के लिए वरदान बना नया सेंट्रल पोर्टल: ाढ़े दो लाख युवा जुड़े, अब रोजगार देने आएंगी बड़ी कंपनियां

उत्तर प्रदेश के तकनीकी छात्रों को एक ही डिजिटल मंच पर प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए शुरू किए गए सेंट्रल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट पोर्टल से ढाई लाख से ज्यादा विद्यार्थी और तीन हजार संस्थान जुड़ चुके हैं। हालांकि, छात्रों की भारी संख्या के मुकाबले अभी कंपनियों की संख्या कम है, जिसे बढ़ाने के लिए प्राविधिक शिक्षा विभाग और एकेटीयू द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•27 सितंबर 2026 • अपडेटेड
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तकनीकी छात्रों के लिए वरदान बना नया सेंट्रल पोर्टल: ाढ़े दो लाख युवा जुड़े, अब रोजगार देने आएंगी बड़ी कंपनियां
📷 तकनीकी छात्रों के लिए वरदान बना नया सेंट्रल पोर्टल: ाढ़े दो लाख युवा जुड़े, अब रोजगार देने आएंगी बड़ी कंपनियां — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • सेंट्रल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट पोर्टल से अब तक 2.50 लाख से अधिक तकनीकी छात्र और 3000 से ज्यादा संस्थान जुड़ चुके हैं।
  • पोर्टल का मुख्य उद्देश्य सूबे के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के बेहतर विकल्प दिलाना है।
  • फिलहाल आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों का रुझान अधिक है, लेकिन छात्रों की संख्या के अनुपात में रिक्तियां बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के तकनीकी छात्रों के लिए डिजिटल महाकुंभ

आज के इस आधुनिक दौर में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं और उन्हें काम पर रखने वाली कंपनियों के बीच की दूरी को पाटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। सूबे के तकनीकी और पेशेवर विद्यार्थियों को एक ही मंच के नीचे प्रशिक्षण और करियर के अनगिनत अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक केंद्रीयकृत पोर्टल की शुरुआत की गई है। इस डिजिटल पहल को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महज कुछ ही महीनों के भीतर ढाई लाख से अधिक छात्र इस व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं।

पारंपरिक रूप से कॉलेज दर कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट कराने की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से छात्रों और संस्थानों दोनों को मुक्ति दिलाने के लिए इस केंद्रीकृत मॉडल को तैयार किया गया है। प्राविधिक शिक्षा विभाग के मार्गदर्शन में विकसित इस पोर्टल पर इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और डिप्लोमा स्तर के छात्र अपनी पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल और रिज्यूमे अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद वे अपनी योग्यता के अनुसार राज्यभर की विभिन्न कंपनियों द्वारा निकाली गई नौकरियों के लिए सीधे आवेदन करने में सक्षम होते हैं।

तीन हजार से अधिक संस्थान और विश्वविद्यालय आए साथ

इस अनूठी पहल को सफल बनाने में राज्य के प्रमुख तकनीकी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों ने अहम भूमिका निभाई है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के साथ-साथ हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) कानपुर, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) गोरखपुर और उनके दर्जनों संबद्ध कॉलेजों के छात्र इस मंच पर बढ़-चढ़कर पंजीकरण करा रहे हैं। इसके अलावा सूबे के तमाम पॉलिटेक्निक डिप्लोमा संस्थान भी इस व्यवस्था से जुड़ चुके हैं, जिससे तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हर वर्ग के युवा को समान अवसर मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए न सिर्फ प्रशासनिक पारदर्शिता आई है, बल्कि दूरदराज के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों को भी सीधे महानगरों की बड़ी कंपनियों तक अपनी पहुंच बनाने का सीधा रास्ता मिल गया है। संस्थानों के लिए भी यह ट्रैक करना आसान हो गया है कि उनके कितने छात्र किस सेक्टर में करियर बना रहे हैं और उनकी ट्रेनिंग में कहां सुधार की गुंजाइश है।

रोजगार के अवसरों और छात्रों की संख्या में बड़ा अंतर

यद्यपि पोर्टल से जुड़ने वाले विद्यार्थियों का आंकड़ा ढाई लाख के पार पहुंच चुका है और तीन हजार से ज्यादा संस्थान इससे जुड़ चुके हैं, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि फिलहाल उपलब्ध नौकरियों और रिक्तियों की संख्या छात्रों की तुलना में काफी कम है। शुरुआती दौर में आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है और पांच लाख रुपये तक के वार्षिक पैकेज वाले पद पोर्टल पर प्रदर्शित भी किए गए हैं, फिर भी यह मांग और आपूर्ति के बीच के बड़े अंतर को पाटने के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।

इस चुनौती से निपटने के लिए अब प्राविधिक शिक्षा विभाग और एकेटीयू प्रशासन ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। विश्वविद्यालय स्तर पर देश-विदेश की नामी कंसल्टेंसी फर्मों और औद्योगिक संगठनों के साथ बैठकें की जा रही हैं। हाल ही में डेलाइट जैसी प्रतिष्ठित संस्था के साथ हुई उच्चस्तरीय चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि कैसे अधिक से अधिक औद्योगिक घरानों को इस पोर्टल पर लाया जाए और वे अपनी रिक्तियों को नियमित रूप से अपडेट करें।

"हमारा मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पोर्टल पर पंजीकृत होने वाले हर एक प्रतिभाशाली छात्र को उसकी योग्यता के अनुरूप बेहतर करियर विकल्प मिल सके। इसके लिए हम देश की दिग्गज कंपनियों को इस डिजिटल मंच से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। आने वाले दिनों में छात्रों को उनके प्लेसमेंट और पैकेज का पूरा ब्योरा भी पोर्टल पर मिलने लगेगा।"— प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एकेटीयू

भविष्य की योजनाएं और पारदर्शिता की ओर कदम

इस पोर्टल को केवल एक जॉब पोर्टल तक सीमित न रखकर एक मुकम्मल करियर डेवलपमेंट इकोसिस्टम बनाने की योजना पर काम चल रहा है। आने वाले समय में इस डिजिटल मंच पर इस बात का भी पूरा ब्योरा उपलब्ध कराया जाएगा कि किस संस्थान के कितने छात्रों का चयन किन कंपनियों में हुआ है और उन्हें औसतन कितना वार्षिक पैकेज मिला है। इस तरह के डेटा सार्वजनिक होने से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि शिक्षण संस्थानों के बीच भी अपने यहां की शिक्षा और प्लेसमेंट सेल को और बेहतर बनाने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा शुरू होगी।

छात्रों को अपनी स्किल्स को अपग्रेड करने के लिए विभिन्न इंडस्ट्री लीडर्स के माध्यम से विशेष वेबिनार और ऑनलाइन ट्रेनिंग सेशन आयोजित करने की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है। तकनीकी शिक्षा के जानकारों का कहना है कि यदि यह पोर्टल अपनी पूरी क्षमता के साथ धरातल पर उतरता है, तो उत्तर प्रदेश का तकनीकी युवा देश और दुनिया की दिग्गज कंपनियों की पहली पसंद बनकर उभरेगा। अब यह आने वाला वक्त ही तय करेगा कि उद्योग जगत इस सरकारी पहल में कितनी सक्रिय भागीदारी निभाता है।

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