उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
उत्तर प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मानसून की विदाई के बाद अब पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और एक ट्रफ लाइन के सक्रिय होने से राज्य के कई हिस्सों में बारिश और आंधी का दौर शुरू होने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है, क्योंकि तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने इस मौसमी बदलाव के पीछे कई अहम कारण बताए हैं। वातावरण में मौजूद नमी, दिन के समय हो रही तेज धूप और उत्तर-पश्चिम भारत में बन रहे सिस्टम के मेल से बादलों की आवाजाही तेज हो गई है। इसका सीधा असर मैदानी इलाकों पर पड़ रहा है, जहां ठंडी हवाएं चलने लगी हैं और मौसम सुहाना होने लगा है।
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ट्रफ लाइन और मौसमी सिस्टम का असर, इन इलाकों में दिखेगा प्रभाव
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण ट्रफ लाइन उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार, झारखंड और बंगाल तक फैली हुई है। इसके साथ ही निचले ट्रोपोस्फेरिक स्तर पर एक अन्य मौसमी हलचल भी बनी हुई है। इन मिली-जुली परिस्थितियों के कारण पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों के दौरान कई स्थानों पर बादलों की गरज के साथ बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। हवा की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसे लेकर प्रशासन और मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
राजधानी लखनऊ समेत कई जिलों में बदला मिजाज, तापमान में आई गिरावट
राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहाँ भी मौसम ने अचानक करवट ली है। दोपहर के बाद आसमान में बादल छाने लगे और ठंडी हवाओं के चलने से लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। मौसम विभाग ने पहले ही शहर के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया था, जिसके बाद तापमान में भी सामान्य से आंशिक कमी दर्ज की गई है।
स्थानीय नागरिकों और किसानों के लिए यह बदलाव मिला-जुला असर लेकर आया है। जहां एक ओर आम जनता को चिलचिलाती धूप और उमस से निजात मिली है, वहीं कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। आंधी-तूफान के समय खेतों में खुले में काम करने से बचने की सलाह दी गई है।
"उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ और वातावरण में नमी के कारण उत्तर प्रदेश के मौसम में यह बदलाव आया है। आने वाले दिनों में तापमान में और अधिक गिरावट दर्ज की जाएगी तथा कुछ स्थानों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना है।" — अतुल कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ
मानसून सीजन का रिकॉर्ड और आगामी महीनों का पूर्वानुमान
इस साल मानसून सीजन के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बारिश के आंकड़े काफी दिलचस्प रहे हैं। राजधानी लखनऊ की बात करें तो 1 जून से 30 सितंबर के बीच यहाँ सामान्य से 24 फीसदी अधिक बरसात दर्ज की गई। इस समयावधि में कुल 849.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य औसत 683.2 मिलीमीटर का था। हालांकि महीनों के हिसाब से देखें तो जून और जुलाई में बारिश में कमी आई थी, लेकिन अगस्त और सितंबर के महीनों ने इस कमी को पूरी तरह से दूर कर दिया। सितंबर के महीने में तो रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, जो सामान्य से 109 प्रतिशत अधिक थी।
अब जबकि मानसून विदा हो चुका है, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले महीनों विशेषकर अक्टूबर से दिसंबर के दौरान प्रशांत महासागर में एल-नीनो के प्रभाव के चलते प्रदेश में सामान्य से कम बारिश देखने को मिल सकती है। अक्टूबर के महीने में रात का तापमान यानी न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जबकि दिन का तापमान सामान्य या उसके आसपास ही बना रह सकता है।
किसानों और आम जनता के लिए जरूरी सावधानियां
मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने बदलते मौसम को देखते हुए आम नागरिकों और किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका वाले दिनों में पेड़ों के नीचे शरण लेने से बचने की सख्त हिदायत दी गई है। इसके अलावा, किसानों से आग्रह किया गया है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें ताकि अचानक होने वाली बारिश से नुकसान न हो।
कुल मिलाकर, यह पश्चिमी विक्षोभ उत्तर प्रदेश के मौसम में एक सुखद बदलाव लेकर आया है, जिससे प्रदेशवासियों को लंबे समय से सता रही उमस भरी गर्मी से आखिरकार छुटकारा मिल गया है। आने वाले दिनों में ठंडक का अहसास और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।








