देशभर में करवट ले रहा मौसम, झमाझम बारिश और आंधी का नया दौर शुरू
अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही देश के तमाम हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलता हुआ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की विदाई का सिलसिला अपने अंतिम चरण में है, वहीं दूसरी तरफ कई नए वेदर सिस्टम सक्रिय हो गए हैं। इन मौसमी बदलावों के चलते उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक बारिश, आंधी-तूफान और पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की मानें तो आने वाले कुछ दिनों तक देश के कई राज्यों में मौसम का यह तेवर कड़ा बना रहेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ कई मौसमी प्रणालियां सक्रिय होने की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में विपरीत मौसम का असर दिखाई दे रहा है। मैदानी इलाकों में जहां उमस भरी गर्मी के बीच अचानक तेज हवाएं और बूंदाबांदी राहत दे सकती है, वहीं पहाड़ी राज्यों में ठंडक बढ़ने लगी है। आम जनजीवन पर भी इस बदलते मौसम का सीधा असर पड़ रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भी सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
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दिल्ली-एनसीआर में बादलों का डेरा, धूल भरी आंधी और बारिश की आशंका
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे इलाकों में पिछले कुछ दिनों से मौसम अपेक्षाकृत सूखा और गर्म बना हुआ था, लेकिन अब स्थिति बदलने लगी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ-साथ कुछ स्थानों पर तेज धूल भरी आंधी चल सकती है। दोपहर या शाम के वक्त हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की भी पूरी संभावना है, जिससे तापमान में कुछ गिरावट दर्ज की जा सकती है।
राजधानी दिल्ली में तापमान के तेवर ढीले पड़ने से लोगों को उमस से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम में हो रहे इस उतार-चढ़ाव के बीच प्रदूषण का स्तर भी धीरे-धीरे अपनी पैठ बना रहा है, जिस पर पर्यावरणविदों की नजर बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर दिल्ली के मौसम पर साफ तौर पर दिखाई देगा और यहां गुलाबी ठंड की दस्तक शुरू हो जाएगी।
पहाड़ी राज्यों में सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ, बर्फबारी और कड़ाके की ठंड की आहट
उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका सीधा असर हिमालयी राज्यों पर पड़ेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में झमाझम बारिश के साथ-साथ इस सीजन की पहली बर्फबारी देखने को मिल सकती है। इन क्षेत्रों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।
पहाड़ों पर होने वाली इस हलचल का असर मैदानी इलाकों के तापमान पर भी पड़ेगा। पहाड़ी हवाएं जब मैदानी क्षेत्रों की ओर रुख करेंगी, तो तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जाएगी। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए मौसम विभाग ने पर्वतीय यात्राओं के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि अचानक मौसम खराब होने से रास्तों में दिक्कतें आ सकती हैं।
दक्षिण भारत में मॉनसून का उग्र रूप, कई राज्यों में भारी बारिश का रेड और ओरेंज अलर्ट
एक तरफ उत्तर भारत में जहां मौसम शुष्क होने की ओर बढ़ रहा है, वहीं दक्षिण भारत में मॉनसून अभी भी पूरी तरह मेहरबान है। केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और तटीय कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने साफ किया है कि इन दक्षिणी राज्यों में अगले कुछ दिनों तक बादलों का डेरा रहेगा और कुछ जगहों पर अत्यधिक भारी वर्षा जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।
नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई है। मछुआरों को भी समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है क्योंकि तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलने और समुद्र की स्थिति अशांत रहने की पूरी संभावना है।
"देश के विभिन्न हिस्सों में एक साथ कई मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से मौसम में यह विविधता देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां दक्षिण भारत में भारी बारिश हो रही है, वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में गिरावट और आंधी-तूफान के आसार हैं।" — मौसम विज्ञान विभाग, आधिकारिक बुलेटिन
तैयार रहें आम लोग, बदलते मौसम में सेहत का रखें खास ख्याल
मौसम के इस आंख मिचौली भरे खेल के बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आम जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। दिन में तेज धूप और उमस के बाद अचानक शाम को चलने वाली ठंडी हवाएं और हल्की बारिश सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को इस बदलते मौसम में अपने खानपान और पहनावा का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
किसान भाइयों के लिए भी मौसम विभाग की यह चेतावनी महत्वपूर्ण है। जिन राज्यों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है, वहां किसानों को अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा जा सके। कुल मिलाकर, यह हफ्ता देश के बड़े हिस्से में मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है।








