मैदान से दूर लेकिन सुर्खियों में रहने वाले पूर्व क्रिकेटर का नया वीडियो
भारतीय क्रिकेट इतिहास में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बेहतरीन प्रतिभा के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने उनके चाहने वालों को हैरान और चिंतित दोनों कर दिया है। इस वीडियो में कांबली ठाणे स्थित एक वृद्धाश्रम 'निदान सेंटर फॉर एल्डरली केयर' के परिसर में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद से ही खेल प्रेमियों के बीच उनके मौजूदा हालातों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वे वहां केवल मिलने गए हैं या फिर स्थायी रूप से रह रहे हैं, लेकिन वायरल फुटेज ने उनके मुश्किल वक्त की ओर एक बार फिर इशारा किया है.
वीडियो में विनोद कांबली काफी शांत नजर आ रहे हैं और वहां की व्यवस्थाओं की तारीफ करते हुए दिख रहे हैं। फुटेज के दौरान वे यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि उन्हें इस केंद्र में बेहतरीन सुविधाएं मिल रही हैं और वहां मौजूद लोग उन्हें काफी प्यार और सम्मान दे रहे हैं। उनके शब्दों से ऐसा लगा कि वे वहां सहज महसूस कर रहे हैं, लेकिन उनके इस तरह के संस्थान में नजर आने से उनके प्रशंसकों का दिल जरूर पसीज गया है। एक समय भारतीय क्रिकेट की शान माने जाने वाले इस खिलाड़ी के जीवन में ऐसा दौर आएगा, इसकी शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। उनके करीबी सूत्रों और जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, जिसने उनके निजी और सार्वजनिक जीवन दोनों को प्रभावित किया है.
संबंधित खबरें
स्वास्थ्य और निजी जीवन की गंभीर चुनौतियां
विनोद कांबली का पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। वे लंबे समय से शारीरिक अस्वस्थता, मानसिक तनाव और आर्थिक तंगी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कुछ समय पहले भी उनके कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें वे चलने-फिरने में भी असमर्थ नजर आ रहे थे और उन्हें दूसरों के सहारे की जरूरत पड़ रही थी। उनके करीबियों के अनुसार, उनकी याददाश्त और मानसिक स्थिति भी काफी नाजुक दौर से गुजर रही है, जिसके कारण उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में भी कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों ने उन्हें पहले ही स्वास्थ्य को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी, क्योंकि उन्हें 'ब्रेन स्ट्रोक' का भी गंभीर खतरा रहा है.
उनके करीबी दोस्त और क्रिकेट जगत से जुड़े लोग समय-समय पर उनके हालातों को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं। उनके एक बेहद करीबी मित्र ने पहले यह खुलासा किया था कि कांबली अपनी याददाश्त कमजोर होने की वजह से कई बार सामान्य बातें भी भूल जाते हैं। हालांकि उन्होंने शराब का सेवन छोड़ दिया है, लेकिन मानसिक स्थिति के चलते वे कई बार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक अन्य आदतों पर नियंत्रण नहीं रख पाते। इन तमाम परेशानियों के बीच उनका वृद्धाश्रम में नजर आना यह बयां करता है कि उन्हें इस उम्र में कितनी अधिक देखभाल और सहारे की जरूरत है। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने अपने दम पर कई मुकाबले जिताए, आज वह खुद जिंदगी की पिच पर संघर्ष करता नजर आ रहा है.
सचिन के साथ स्कूल क्रिकेट में रचे थे अनगिनत इतिहास
विनोद कांबली का नाम आते ही क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के साथ उनकी अटूट दोस्ती और स्कूल क्रिकेट के वे रिकॉर्ड याद आ जाते हैं, जिन्होंने तहलका मचा दिया था। मुंबई के शारदाश्रम स्कूल की तरफ से खेलते हुए इन दोनों बल्लेबाजों ने एक ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था, जो आज भी क्रिकेट इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। सेंट जेवियर्स हाई स्कूल के खिलाफ एक मैच में सचिन और कांबली ने मिलकर 664 रनों की ऐतिहासिक नाबाद साझेदारी निभाई थी। इस मैराथन साझेदारी में विनोद कांबली ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 349 रन बनाए थे। इसी रिकॉर्डतोड़ पारी के बाद दोनों दोस्तों ने एक साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था.
दोनों खिलाड़ियों ने मुंबई की प्रतिष्ठित कांगा लीग में एक साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। सचिन तेंदुलकर ने जहां साल 1988 में रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया था, वहीं कांबली को इसके ठीक एक साल बाद 1989 में यह मौका मिला। शुरुआती दौर में दोनों की जोड़ी को भविष्य के भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा स्तंभ माना जा रहा था। कांबली की बाएं हाथ की कलात्मक बल्लेबाजी शैली और उनकी तूफानी पारियों ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा था। घरेलू क्रिकेट में भी उनका बल्ला जमकर बोला और उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रनों का अंबार लगाते हुए कुल 9665 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 262 रन रहा था.
अंतरराष्ट्रीय करियर की चमक और 1996 के विश्व कप का वह दर्दनाक अंत
विनोद कांबली ने साल 1993 से 2000 के बीच भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत के लिए 17 टेस्ट मैच खेले और 1084 रन बनाए, जिसमें 4 शानदार शतक शामिल थे। वहीं, 104 वनडे मैचों में उन्होंने 2477 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 14 अर्धशतक उनके नाम दर्ज हैं। उनकी बल्लेबाजी में एक अलग ही क्लास और आक्रामकता थी, जिसके दम पर उन्होंने बहुत कम समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गहरी छाप छोड़ी थी। हालांकि, उनका अंतरराष्ट्रीय करियर उतनी लंबी अवधि तक नहीं चल पाया जितनी उनकी प्रतिभा से उम्मीद की जा रही थी और वे जल्द ही टीम से बाहर हो गए.
भारतीय क्रिकेट इतिहास में कांबली के करियर का सबसे दर्दनाक और भावुक पल साल 1996 के विश्व कप सेमीफाइनल के रूप में दर्ज है। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में भारत की स्थिति एक समय काफी मजबूत थी। लेकिन सचिन तेंदुलकर के आउट होते ही भारतीय पारी इस तरह लड़खड़ाई कि देखते ही देखते टीम ने अपने 8 विकेट मात्र 120 रन के स्कोर पर गंवा दिए। उस वक्त मैदान पर विनोद कांबली क्रीज पर मौजूद थे। हार के करीब पहुंचती टीम और दर्शकों के गुस्से के कारण मैदान पर हंगामा शुरू हो गया, जिसके चलते मैच को रोकना पड़ा और श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया गया। मैच के बाद जब खिलाड़ी पवेलियन लौट रहे थे, तो कांबली अपने आंसू रोक नहीं पाए और मैदान पर ही फूट-फूटकर रो पड़े, जो उनके करियर की सबसे दुखद याद बन गई.
"यहाँ बहुत अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं। लोगों से बहुत प्यार और सम्मान मिल रहा है। ऐसा बिल्कुल महसूस ही नहीं होता कि मैं अपने घर से दूर हूँ।" — विनोद कांबली, पूर्व भारतीय क्रिकेटर
उतार-चढ़ाव से भरा निजी जीवन और मौजूदा हालात
क्रिकेट के मैदान पर अपनी चमक बिखेरने वाले विनोद कांबली का निजी जीवन भी विवादों और उथल-पुथल से भरा रहा है। उन्होंने अपने जीवन में दो शादियां कीं। उनकी पहली शादी साल 1998 में नोएला लुईस के साथ हुई थी, जो ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई और दोनों का तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने फैशन मॉडल एंड्रिया हेविट से दूसरा विवाह किया, जिनके साथ वे लंबे समय से रह रहे हैं। जून 2010 में उनके घर बेटे जीसस क्रिस्टियानो का जन्म हुआ। पेशेवर क्रिकेट से संन्यास लेने और निजी जीवन की तमाम अड़चनों के बीच वे अक्सर किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बने रहे हैं.
मौजूदा समय में विनोद कांबली की स्थिति को देखकर उनके पुराने साथी और प्रशंसक काफी दुखी हैं। खेल जगत में किसी खिलाड़ी का इस तरह वृद्धाश्रम या संघर्षपूर्ण हालातों में पहुंचना भारतीय खेल संस्कृति के लिए एक संवेदनशील विषय है। हालांकि कांबली ने खुद वीडियो में यह स्पष्ट किया है कि उन्हें वहां किसी प्रकार की असुविधा नहीं है, लेकिन उनके स्वास्थ्य और जीवन की दुश्वारियों ने यह साबित कर दिया है कि कामयाबी के शिखर से नीचे उतरने के बाद का जीवन कितना कठिन हो सकता है। उनके शुभचिंतक यही प्रार्थना कर रहे हैं कि वे अपने जीवन के इस दौर में स्वस्थ रहें और उन्हें अपनों का पूरा संबल मिलता रहे.


