मोबाइल चार्जिंग के दौरान तापमान क्यों बढ़ जाता है?
आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का एक बेहद अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक हम अपने फोन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में फोन की बैटरी का डिस्चार्ज होना स्वाभाविक है और हमें बार-बार इसे चार्ज करना पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि चार्जिंग के प्लग में लगाते ही आपका फोन हल्का या कभी-कभी काफी गर्म होने लगता है? यह सवाल हर उस आम यूजर के मन में आता है जो अपने डिवाइस की सेहत को लेकर फिक्रमंद रहता है।
जब आप अपने स्मार्टफोन को चार्जर से जोड़ते हैं, तो विद्युत ऊर्जा यानी इलेक्ट्रिकल एनर्जी बैटरी के भीतर रासायनिक ऊर्जा के रूप में स्टोर होने लगती है। इस पूरी प्रक्रिया को केमिकल रिएक्शन कहा जाता है। ऊर्जा के इस रूपान्तरण के दौरान कुछ मात्रा में ऊष्मा यानी हीट का पैदा होना एक प्राकृतिक विज्ञान का नियम है। हालांकि, आधुनिक तकनीक ने इस गर्मी को नियंत्रित करने के बहुत से इंतजाम किए हैं, फिर भी पूरी तरह से तापमान को शून्य नहीं किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य तापमान से थोड़ा बहुत गर्म होना किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के लिए आम बात है। लेकिन अगर आपका फोन हाथ में लेते ही जलने लगे या इतना गर्म हो जाए कि उसे पकड़ना मुश्किल हो जाए, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत सावधान हो जाने की जरूरत है ताकि बैटरी फटने या सर्किट डैमेज होने जैसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके।
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फास्ट चार्जिंग तकनीक और ऊर्जा का उच्च प्रवाह
आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका फोन मात्र 30 से 40 मिनट के भीतर पूरी तरह चार्ज हो जाए। इस मांग को पूरा करने के लिए स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों ने फास्ट चार्जिंग और सुपर-फास्ट चार्जिंग तकनीक को बाजार में उतारा है। 65 वॉट, 120 वॉट और उससे भी अधिक क्षमता वाले चार्जर आज आम बात हो गए हैं। लेकिन इस सुपर-फास्ट स्पीड के साथ एक बड़ी तकनीकी कीमत चुकानी पड़ती है, और वह कीमत है अत्यधिक तापमान का बढ़ना।
साधारण चार्जर कम वोल्टेज और एम्पीयर पर काम करते हैं, जिससे बैटरी धीरे-धीरे और ठंडे माहौल में चार्ज होती है। इसके विपरीत, फास्ट चार्जर कम समय में बैटरी के अंदर बहुत अधिक मात्रा में करंट झोंकते हैं। जब इतनी भारी मात्रा में ऊर्जा एक साथ बैटरी के भीतर प्रवेश करती है, तो इलेक्ट्रॉनों की रफ्तार बहुत तेज हो जाती है। इस आपसी टकराव और तेज गति के कारण अत्यधिक मात्रा में हीट जनरेट होती है, जिसे फोन का इंटरनल कूलिंग सिस्टम बाहर निकालने की कोशिश करता है।
यही कारण है कि जब आप अपने डिवाइस को फास्ट चार्जर से जोड़ते हैं, तो शुरुआती 50 प्रतिशत चार्जिंग के दौरान फोन काफी गर्म महसूस होता है। जैसे-जैसे बैटरी फुल होने लगती है, चार्जिंग की गति धीमी कर दी जाती है ताकि तापमान को नियंत्रित किया जा सके और बैटरी की लाइफ सुरक्षित रहे।
चार्जिंग के वक्त कौन सी बड़ी गलतियां करते हैं आम यूजर?
कई बार फोन के गर्म होने के पीछे तकनीकी कारण नहीं बल्कि हमारी अपनी कुछ दैनिक आदतें जिम्मेदार होती हैं। हम अक्सर अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो बैटरी के लिए बेहद घातक साबित होती हैं। सबसे आम गलती है चार्जिंग के दौरान फोन पर लगातार गेमिंग करना, वीडियो देखना या सोशल मीडिया चलाना। जब आप चार्जिंग के समय फोन का भारी इस्तेमाल करते हैं, तो एक तरफ चार्जर से बैटरी में करंट आ रहा होता है और दूसरी तरफ प्रोसेसर और स्क्रीन बैटरी से ऊर्जा खींच रहे होते हैं।
इस दोहरी प्रक्रिया के कारण फोन का सीपीयू और बैटरी दोनों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। परिणामस्वरूप, तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और बैटरी की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा, कई लोग फोन चार्जिंग पर लगाते समय उसपर मोटा प्लास्टिक या रबर का कवर (केस) चढ़ा रहने देते हैं। यह कवर इंसुलेटर का काम करता है और बैटरी से निकलने वाली प्राकृतिक हीट को बाहर नहीं जाने देता, जिससे फोन और ज्यादा गर्म हो जाता है।
एक अन्य बड़ी गलती सस्ते और लोकल मार्केट के चार्जर या केबल का उपयोग करना है। ओरिजिनल चार्जर की कीमत अधिक देखकर कई लोग बाजार से कोई भी सस्ता एडाप्टर खरीद लेते हैं। ऐसे चार्जर में सही वोल्टेज रेगुलेशन सर्किट नहीं होता, जो फोन में अनियमित करंट भेजकर बैटरी को भयंकर रूप से गर्म कर देता है।
गर्मी के मौसम और गलत जगह पर चार्जिंग का प्रभाव
वातावरण का तापमान भी मोबाइल फोन की बैटरी और चार्जिंग प्रक्रिया पर सीधा असर डालता है। यदि आप गर्मियों के दिनों में किसी ऐसी जगह पर फोन चार्ज कर रहे हैं जहां सीधी धूप आ रही है, या फिर कार के डैशबोर्ड पर रखकर चार्ज कर रहे हैं, तो फोन का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। मोबाइल बैटरियों को आमतौर पर कमरे के सामान्य तापमान पर सबसे अच्छा काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
जब बाहरी तापमान पहले से ही 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास हो, तो फोन के अंदरूनी सर्किट्स को ठंडा रखना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चार्जिंग के दौरान पैदा होने वाली अतिरिक्त हीट बाहर नहीं निकल पाती और बैटरी के इंटरनल सेल्स को पिघलाने या खराब करने लगती है। कई बार तकिए के नीचे फोन रखकर चार्ज करने की लापरवाही भी सामने आती है, जो हवा के रास्ते को पूरी तरह बंद कर देती है और फोन को आग के मुहाने पर खड़ा कर देती है।
विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि फोन को हमेशा किसी समतल, ठंडी और हवादार जगह पर रखकर ही चार्ज करना चाहिए। यदि चार्जिंग के दौरान फोन बहुत ज्यादा गर्म हो रहा है, तो तुरंत स्विच ऑफ कर देना चाहिए या कुछ देर के लिए चार्जिंग रोक देनी चाहिए ताकि तापमान सामान्य हो सके।
बैटरी को सुरक्षित रखने और तापमान नियंत्रित करने के अचूक उपाय
अपने महंगे स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ बढ़ाने और उसे अत्यधिक गर्म होने से बचाने के लिए कुछ बेहद आसान नियमों का पालन करना जरूरी है। सबसे पहले तो हमेशा अपने फोन के साथ आने वाले ओरिजिनल चार्जर और प्रमाणित केबल का ही इस्तेमाल करें। यदि किसी कारणवश चार्जर खराब हो जाए, तो उसी ब्रांड का या किसी अच्छी और भरोसेमंद कंपनी का एडाप्टर खरीदें जो वीआईएस (BIS) प्रमाणित हो।
"मोबाइल की बैटरी एक संवेदनशील केमिकल यूनिट है। इसे अत्यधिक तापमान और लोकल चार्जिंग एक्सेसरीज से बचाना ही इसकी लंबी उम्र की सबसे बड़ी गारंटी है।" — राहुल वर्मा, सीनियर टेक एनालिस्ट
चार्जिंग करते समय हमेशा फोन का बैक कवर उतार दें ताकि हवा का सर्कुलेशन सही बना रहे और हीट आसानी से बाहर निकल सके। इसके अलावा, चार्जिंग के दौरान फोन पर कोई भी भारी एप्लीकेशन न चलाएं। यदि बहुत जरूरी कॉल सुननी हो, तो पहले चार्जर की पिन निकालें और बात पूरी होने के बाद दोबारा चार्जिंग पर लगाएं। रात भर फोन को चार्जर पर लगाकर छोड़ना भी आधुनिक स्मार्टफोन्स में भले ही ऑटो-कट तकनीक के कारण सुरक्षित माना जाता हो, लेकिन बेहतर यही है कि बैटरी 100 प्रतिशत होते ही उसे प्लग से हटा दिया जाए।
निष्कर्ष
स्मार्टफोन का गर्म होना एक सामान्य बहुतकनीकी प्रक्रिया है, बशर्ते यह तापमान एक सीमित दायरे के भीतर रहे। जैसे ही यह गर्मी असहनीय स्तर तक पहुंचे, यह आपके लिए एक चेतावनी है। फास्ट चार्जिंग की इस दुनिया में तकनीक का फायदा उठाना जरूरी है, लेकिन अपनी छोटी-छोटी सावधानियों से हम अपने डिवाइस को सुरक्षित रख सकते हैं। सही आदतों को अपनाकर न सिर्फ आप फोन की बैटरी को बचा सकते हैं, बल्कि किसी भी संभावित हादसे से भी खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।








