खानपान की आदतों में बदलाव और लैक्टोज इंटॉलरेंस (दूध न पचने की समस्या) के कारण आजकल बहुत से लोग दूध और डेयरी उत्पादों से दूरी बना लेते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि शरीर में कैल्शियम की कमी को कैसे पूरा किया जाए, क्योंकि मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए यह मिनरल सबसे जरूरी माना जाता है। इस साल World Vegetarian Day 2026 के मौके पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस समस्या का एक बेहद आसान और प्राकृतिक समाधान ढूंढा है। फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की सीनियर डायटिशियन रीतिका शर्मा ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है कि जो लोग दूध नहीं पीते, वे अपनी डाइट में किन चीजों को शामिल करके हड्डियों को मजबूत रख सकते हैं।
कैल्शियम की जरूरत और ओडीएस NIH के मानक
शरीर में कैल्शियम की आवश्यकता हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है, जो उसकी उम्र और लिंग पर निर्भर करती है। 'द ऑफिस ऑफ डायटरी सप्लीमेंट्स' (ODS) NIH के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने के लिए कैल्शियम का सेवन बहुत अहम हो जाता है। 19 से 50 वर्ष की आयु के वयस्क पुरुष और महिलाओं को एक तय मात्रा में कैल्शियम की जरूरत होती है। वहीं, 71 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए हड्डियों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा, गर्भधारण और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी अपने दैनिक आहार में कैल्शियम की मात्रा का विशेष ख्याल रखना जरूरी होता है ताकि शरीर की कमजोरी से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल डेयरी प्रोडक्ट्स ही कैल्शियम का एकमात्र जरिया नहीं हैं। प्रकृति ने हमें कई ऐसे पौधे आधारित और शाकाहारी विकल्प दिए हैं, जो शरीर की इस जरूरत को बहुत आसानी से पूरा कर सकते हैं। सर्दियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही खानपान में ऐसे बदलाव करना और भी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है, जो शरीर को अंदर से ऊर्जा और गर्माहट दोनों दें।
संबंधित खबरें
सफेद तिल: हड्डियों की मजबूती का शानदार विकल्प
जो लोग दूध या मक्खन-पनीर जैसी चीजें नहीं खा पाते हैं, उनके लिए सफेद तिल का सेवन किसी वरदान से कम नहीं है। डायटिशियन रीतिका शर्मा के मुताबिक, सफेद तिल कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने में सीधी मदद करता है। तिल में न केवल कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है, बल्कि इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन और अनसैचुरेटेड फैट जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
सफेद तिल को अपने दैनिक भोजन में शामिल करना बेहद आसान है। इसे आप अपनी सलाद में छिड़क सकते हैं, चटनी में पीसकर उपयोग कर सकते हैं या फिर सर्दियों के दिनों में इसके दूध का सेवन भी कर सकते हैं। तिल का दूध उन लोगों के लिए एक आदर्श विकल्प है जो पारंपरिक डेयरी दूध का सेवन नहीं कर सकते। इसके नियमित उपयोग से शरीर को कमजोरी से बचाया जा सकता है और जरूरी मिनरल्स आसानी से मिल जाते हैं।
रागी: कैल्शियम का असली पावरहाउस
शोध रिपोर्टों और पारंपरिक खानपान के अनुसार, रागी को कैल्शियम का पावरहाउस कहा जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व हड्डियों के ढांचे को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। रागी एक ऐसा सुपरफूड है जो न केवल हड्डियों को ताकत देता है, बल्कि पाचन क्रिया को सुधारने और दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद करता है। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी रागी का सेवन बहुत लाभकारी माना गया है।
रागी का सेवन करने का तरीका इसके फायदों को और बढ़ा सकता है। यदि रागी को अंकुरित करके या इसे खमीर उठाकर (फर्मेंट करके) खाया जाए, तो शरीर में इसका कैल्शियम और आयरन बहुत तेजी से और आसानी से सोख लिया जाता है। इसे रोटियों, डोसा या दलिया के रूप में सुबह के नाश्ते में शामिल किया जा सकता है, जो पूरे दिन शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।
अन्य प्राकृतिक स्रोत और सावधानियां
दूध के विकल्प के रूप में हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, और बीज भी कैल्शियम की कमी को पूरा करने में बहुत कारगर साबित होते हैं। हालांकि, अपने शरीर की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसी भी आहार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। संतुलित आहार और सही जीवनशैली अपनाकर शाकाहारी लोग भी बिना किसी डेयरी उत्पाद के स्वस्थ और मजबूत जीवन जी सकते हैं।
"जो लोग दूध या डेयरी प्रोडक्ट्स नहीं ले सकते, उनके लिए सफेद तिल का दूध और रागी जैसे सुपरफूड्स बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इनमें कैल्शियम के साथ-साथ अन्य जरूरी मिनरल्स भी होते हैं जो हड्डियों को मजबूत रखते हैं।" — रीतिका शर्मा, सीनियर डायटिशियन, सर्वोदय अस्पताल








