होम/देश/सिनेमा के 'किंग ऑफ रोमांस' यश चोपड़ा की अनसुनी दास्तान: जब स्विट्जरलैंड की बस में खुद अपनी ही बनाई झील का किस्सा सुन रहे थे निर्देशक
देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

सिनेमा के 'किंग ऑफ रोमांस' यश चोपड़ा की अनसुनी दास्तान: जब स्विट्जरलैंड की बस में खुद अपनी ही बनाई झील का किस्सा सुन रहे थे निर्देशक

हिंदी सिनेमा को रोमांस की नई परिभाषा देने वाले यश चोपड़ा की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम रोमांचक नहीं थी। साहिर लुधियानवी की शायरी के दीवाने होने से लेकर स्विट्जरलैंड की वादियों में अनजान पर्यटक की तरह अपनी ही झील का किस्सा सुनने तक, उनके जीवन से जुड़े कई दिलचस्प पहलू आज भी लोगों को हैरान करते हैं।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
27 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
सिनेमा के 'किंग ऑफ रोमांस' यश चोपड़ा की अनसुनी दास्तान: जब स्विट्जरलैंड की बस में खुद अपनी ही बनाई झील का किस्सा सुन रहे थे निर्देशक
📷 सिनेमा के 'किंग ऑफ रोमांस' यश चोपड़ा की अनसुनी दास्तान: जब स्विट्जरलैंड की बस में खुद अपनी ही बनाई झील का किस्सा सुन रहे थे निर्देशक — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मुंबई पहुंचने पर यश चोपड़ा ने किसी बड़े सुपरस्टार से मिलने के बजाय मशहूर शायर साहिर लुधियानवी से मिलने की इच्छा जताई थी।
  • स्विट्जरलैंड की एक झील को अनौपचारिक रूप से 'चोपड़ा झील' कहा जाता है, और एक बार यश चोपड़ा खुद उसी बस में आम यात्री की तरह बैठे थे।
  • फिल्म 'काला पत्थर' की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गजों के बीच संतुलन बनाने के लिए उन्होंने खुद सबसे बड़ा सुइट लिया था।

सिनेमा के पर्दे से परे थी यश चोपड़ा की असल जिंदगी की कहानी

हिंदी सिनेमा जगत में जब भी प्रेम कहानियों का जिक्र होता है, तो सबसे पहला नाम 'किंग ऑफ रोमांस' कहे जाने वाले यश चोपड़ा का आता है। उनकी फिल्मों में प्यार की एक अलग ही दुनिया बसती थी, जहां बारिश की बूंदें, बर्फीली वादियां, उड़ती हुई शिफॉन की साड़ियां और दिलों को छू लेने वाले संवाद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्होंने अपने पांच दशक से अधिक लंबे करियर में भारतीय दर्शकों को सिनेमा देखने का एक बिल्कुल नया नजरिया दिया। यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी उनकी फिल्मों ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक खास छाप छोड़ी।

लेकिन अगर पर्दे के पीछे की दुनिया पर नजर डालें, तो यश चोपड़ा की अपनी निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम दिलचस्प नहीं थी। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे अनसुने किस्से हैं जो बताते हैं कि वह सिर्फ एक बेहतरीन निर्देशक ही नहीं, बल्कि एक बेहद सुलझे हुए और अनोखे मिजाज के इंसान थे। चाहे वह किसी शायर के प्रति उनका अगाध प्रेम हो या फिर सितारों के बड़े अहंकार को संभालने का उनका अनोखा तरीका, हर वाकया उनकी शख्सियत के अनछुए पहलुओं को उजागर करता है।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

संबंधित खबरें

बॉलीवुड की अनसुनी कहानियों का सफर: सिनेमा के पर्दे के पीछे की छिपे राज और किस्से

बॉलीवुड की अनसुनी कहानियों का सफर: सिनेमा के पर्दे के पीछे की छिपे राज और किस्से

सोते समय अचानक डरकर चीखने लगता है बच्चा? जानिए क्या है 'नाइट टेरर' और कैसे करें बचाव

सोते समय अचानक डरकर चीखने लगता है बच्चा? जानिए क्या है 'नाइट टेरर' और कैसे करें बचाव

रियलिटी शो में अभिनेत्री स्वरा भास्कर और तेज प्रताप यादव की मजेदार जुगलबंदी, वायरल हुआ वीडियो

रियलिटी शो में अभिनेत्री स्वरा भास्कर और तेज प्रताप यादव की मजेदार जुगलबंदी, वायरल हुआ वीडियो

सफेदपोश अपराधियों का फिल्मी अंदाज में अपहरण का खेल: दूध डेयरी के विवाद में हुआ बड़ा खुलासा

सफेदपोश अपराधियों का फिल्मी अंदाज में अपहरण का खेल: दूध डेयरी के विवाद में हुआ बड़ा खुलासा

फर्जी चंदे का बड़ा खेल: चुनाव में जमानत जब्त, फिर भी पार्टियों ने कमाए 1870 करोड़

फर्जी चंदे का बड़ा खेल: चुनाव में जमानत जब्त, फिर भी पार्टियों ने कमाए 1870 करोड़

आधी रात को एयरपोर्ट पर दिखा ऐश्वर्या राय का जलवा, सादगी और अंदाज ने लूटी महफिल

आधी रात को एयरपोर्ट पर दिखा ऐश्वर्या राय का जलवा, सादगी और अंदाज ने लूटी महफिल

तालिबान के साये में भारतीय व्लॉगर का सफर: अफगानिस्तान की गलियों में रुद्राक्ष देख हैरान हुए लोग, वीडियो वायरल

तालिबान के साये में भारतीय व्लॉगर का सफर: अफगानिस्तान की गलियों में रुद्राक्ष देख हैरान हुए लोग, वीडियो वायरल

उत्तराखंड चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का बड़ा सियासी दांव, अब्दुल मतीन सिद्दीकी को सौंपी प्रदेश कमान

उत्तराखंड चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का बड़ा सियासी दांव, अब्दुल मतीन सिद्दीकी को सौंपी प्रदेश कमान

सुपरस्टार से पहले एक शायर से मिलने की थी जिद

जब यश चोपड़ा अपने शुरुआती दिनों में सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे, तो उनके बड़े भाई और दिग्गज फिल्मकार बीआर चोपड़ा ने उनसे पूछा कि क्या वह उस दौर के किसी बड़े सुपरस्टार से मिलना चाहते हैं। उस वक्त बीआर चोपड़ा को शायद ही इस बात का अंदाजा रहा होगा कि उनके छोटे भाई का जवाब क्या होगा। यश चोपड़ा ने तपाक से कहा कि उन्हें किसी अभिनेता से नहीं, बल्कि मशहूर गीतकार और शायर साहिर लुधियानवी से मिलना है।

कॉलेज के दिनों से ही यश चोपड़ा साहिर की शायरी के मुरीद थे और उनकी रचनाओं ने उनके दिल पर गहरी छाप छोड़ी थी। बाद में बड़े भाई के जरिए उनकी मुलाकात साहिर से हुई और यह परिचय सिर्फ एक पेशेवर रिश्ता बनकर नहीं रह गया, बल्कि आगे चलकर चोपड़ा के सिनेमा की सबसे मजबूत रचनात्मक नींव साबित हुआ। जिस निर्देशक को बाद में रोमांस का बादशाह कहा गया, उसके सफर की शुरुआत किसी हीरोइन की खूबसूरती से नहीं, बल्कि एक शायर की कलम से निकली पंक्तियों से हुई थी।

जब स्विट्जरलैंड की बस में अनजान यात्री बन बैठे थे निर्देशक

स्विट्जरलैंड के साथ यश चोपड़ा का रिश्ता किसी परीकथा जैसा था। उन्होंने ही सबसे पहले भारतीय सिनेमा के जरिए स्विस आल्प्स की खूबसूरती को इस तरह पर्दे पर उतारा कि वह देशवासियों के सपनों की दुनिया बन गई। उनकी फिल्मों के प्रभाव का ही नतीजा था कि वहां की एक खूबसूरत झील को अनौपचारिक रूप से 'चोपड़ा झील' यानी 'चोपड़ा लेक' कहा जाने लगा।

इससे जुड़ा एक बेहद मजेदार संस्मरण खुद उनके जीवन से सामने आया। एक बार यश चोपड़ा स्विट्जरलैंड में पर्यटकों से भरी एक बस में सफर कर रहे थे। बस का कंडक्टर पर्यटकों को रास्ते के नजारों के बारे में बताते हुए जानकारी दे रहा था कि आगे एक बहुत प्रसिद्ध झील आने वाली है जिसे 'चोपड़ा झील' के नाम से जाना जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि जिस शख्स के नाम पर वह झील जुड़ी थी, वही यश चोपड़ा उस बस में एक आम पर्यटक की तरह चुपचाप बैठे थे। कंडक्टर को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि उसके सामने वही महान फिल्मकार बैठा है जिसने इस जगह को पूरी दुनिया के सामने लोकप्रिय बनाया था।

'काला पत्थर' के सेट पर सितारों के बीच संतुलन की अनूठी पहल

यश चोपड़ा की कार्यशैली की एक बड़ी खूबी यह थी कि वह कलाकारों के बीच आपसी संतुलन और सेट के माहौल को बहुत बेहतर तरीके से समझते थे। फिल्म 'काला पत्थर' की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे उस दौर के सबसे बड़े सितारे एक ही होटल में ठहरे हुए थे। होटल में केवल एक ही सबसे बड़ा और वीआईपी सुइट था। ऐसे में यह सवाल खड़ा होना लाजमी था कि वह कमरा किसे मिलेगा, क्योंकि तीनों ही कलाकार अपने-अपने स्टारडम के शिखर पर थे।

किसी भी तरह के विवाद या आपसी मनमुटाव से बचने के लिए यश चोपड़ा ने एक बेहद व्यावहारिक रास्ता निकाला। उन्होंने खुद वह सबसे बड़ा सुइट अपने नाम कर लिया और बाकी के कमरे तीनों सितारों को आवंटित कर दिए। निर्देशक रमेश तलवार ने बाद में इस बात का जिक्र किया था कि यशजी ने ऐसा इसलिए किया ताकि सेट पर किसी भी प्रकार के पक्षपात का आरोप न लगे और सभी सितारों के बीच एक स्वस्थ माहौल बना रहे।

मिस हुई फ्लाइट और ढोलकी की थाप पर शुरू हुई प्रेम कहानी

पर्दे पर प्रेम की अद्भुत परिभाषा लिखने वाले यश चोपड़ा की अपनी निजी प्रेम कहानी भी कम दिलचस्प नहीं थी। पामेला चोपड़ा के साथ उनकी पहली मुलाकात किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। शुरुआती मुलाकातों में दोनों को एक-दूसरे से कोई खास पहली नजर का आकर्षण महसूस नहीं हुआ था। पामेला ने अपने घर जाकर कहा था कि सब ठीक है, कुछ खास नहीं, तो वहीं यश चोपड़ा ने भी परिवार से यही कहा था कि अभी 'घंटी नहीं बजी' है।

लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक संगीत कार्यक्रम के दौरान जब पामेला को गाते हुए सुना, तो यश चोपड़ा उनके मुरीद हो गए। इसके बाद दिल्ली में हुई एक और मुलाकात के दौरान यश की फ्लाइट छूट गई और दोनों को एक-दूसरे को करीब से जानने का पूरा मौका मिला।

"प्यार सिर्फ बड़े दिखावों का नाम नहीं है, कभी-कभी एक छोटी सी अनियोजित मुलाकात और सहजता भी जिंदगीभर का रिश्ता बना देती है।" — पामेला चोपड़ा, संस्मरण से

पामेला ने एक इंटरव्यू में याद करते हुए बताया था कि उस वक्त यशजी जमीन पर बैठकर चम्मच से ढोलकी बजा रहे थे। उस सहज और सरल माहौल ने दोनों के दिलों को हमेशा के लिए जोड़ दिया। मुंबई वापस आकर यश ने अपने परिवार से कह दिया कि आखिरकार 'घंटी बज गई' है।

निष्कर्ष

यश चोपड़ा केवल एक कामयाब फिल्म निर्देशक नहीं थे, बल्कि वह इंसानी जज्बातों और रिश्तों के बेहद बारीक पारखी थे। उन्होंने भारतीय सिनेमा को जो ऊंचाइयां दीं और अपनी फिल्मों के जरिए जो जादू बिखेरा, वह आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करता है। उनकी जिंदगी के ये तमाम छोटे-बड़े किस्से साबित करते हैं कि उनका असली रोमांस सिर्फ सिल्वर स्क्रीन तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी पूरी शख्सियत ही प्रेम, कला और सादगी से ओत-प्रोत थी।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED

संबंधित खबरें (Related Articles)

बॉलीवुड की अनसुनी कहानियों का सफर: सिनेमा के पर्दे के पीछे की छिपे राज और किस्सेNATIONAL

बॉलीवुड की अनसुनी कहानियों का सफर: सिनेमा के पर्दे के पीछे की छिपे राज और किस्से

27 सित॰
सोते समय अचानक डरकर चीखने लगता है बच्चा? जानिए क्या है 'नाइट टेरर' और कैसे करें बचावNATIONAL

सोते समय अचानक डरकर चीखने लगता है बच्चा? जानिए क्या है 'नाइट टेरर' और कैसे करें बचाव

27 सित॰
रियलिटी शो में अभिनेत्री स्वरा भास्कर और तेज प्रताप यादव की मजेदार जुगलबंदी, वायरल हुआ वीडियोNATIONAL

रियलिटी शो में अभिनेत्री स्वरा भास्कर और तेज प्रताप यादव की मजेदार जुगलबंदी, वायरल हुआ वीडियो

27 सित॰
सफेदपोश अपराधियों का फिल्मी अंदाज में अपहरण का खेल: दूध डेयरी के विवाद में हुआ बड़ा खुलासाNATIONAL

सफेदपोश अपराधियों का फिल्मी अंदाज में अपहरण का खेल: दूध डेयरी के विवाद में हुआ बड़ा खुलासा

27 सित॰
फर्जी चंदे का बड़ा खेल: चुनाव में जमानत जब्त, फिर भी पार्टियों ने कमाए 1870 करोड़NATIONAL

फर्जी चंदे का बड़ा खेल: चुनाव में जमानत जब्त, फिर भी पार्टियों ने कमाए 1870 करोड़

27 सित॰
आधी रात को एयरपोर्ट पर दिखा ऐश्वर्या राय का जलवा, सादगी और अंदाज ने लूटी महफिलNATIONAL

आधी रात को एयरपोर्ट पर दिखा ऐश्वर्या राय का जलवा, सादगी और अंदाज ने लूटी महफिल

27 सित॰
तालिबान के साये में भारतीय व्लॉगर का सफर: अफगानिस्तान की गलियों में रुद्राक्ष देख हैरान हुए लोग, वीडियो वायरलNATIONAL

तालिबान के साये में भारतीय व्लॉगर का सफर: अफगानिस्तान की गलियों में रुद्राक्ष देख हैरान हुए लोग, वीडियो वायरल

27 सित॰
उत्तराखंड चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का बड़ा सियासी दांव, अब्दुल मतीन सिद्दीकी को सौंपी प्रदेश कमानNATIONAL

उत्तराखंड चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी का बड़ा सियासी दांव, अब्दुल मतीन सिद्दीकी को सौंपी प्रदेश कमान

27 सित॰