विदेश यात्रा से पहले येलो फीवर का टीका क्यों है जरूरी
दुनियाभर में वैश्विक आवाजाही बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से पांव पसार रहा है। इसी सिलसिले में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए येलो फीवर यानी पीत ज्वर को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन देशों में इस बीमारी का प्रकोप अधिक है, वहां की यात्रा करने वाले नागरिकों को सुरक्षा कवच के रूप में टीका लगवाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी भी लापरवाही न केवल यात्री के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है, बल्कि इस बीमारी के देश के भीतर प्रवेश करने का खतरा भी पैदा कर सकती है।
येलो फीवर एक गंभीर वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप के कई देशों में यह बीमारी endemic यानी स्थानिक रूप से फैली हुई है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारतीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार, इन क्षेत्रों की यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के पास वैध टीकाकरण प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है। स्वास्थ्य महकमा लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि कोई भी नागरिक बिना पूरी सुरक्षा के विदेश न जाए।
यात्रा के शौकीन लोगों या व्यावसायिक कारणों से विदेश जाने वाले पेशेवरों को अक्सर इन स्वास्थ्य नियमों की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती है। परिणाम यह होता है कि एयरपोर्ट पर पहुंचने पर उन्हें आव्रजन या स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा रोक दिया जाता है। इस तरह की असुविधा से बचने के लिए समय रहते एडवाइजरी पढ़ना और उसके अनुसार मेडिकल तैयारी करना समझदारी का कदम है।
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स्वास्थ्य विभाग की नई एडवाइजरी और दिशा-निर्देश
हाल ही में जारी की गई एडवाइजरी में स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि येलो फीवर का टीका केवल सरकार द्वारा अधिकृत अस्पतालों या वैक्सीनेशन केंद्रों पर ही उपलब्ध है। अनाधिकृत जगहों से प्रमाण पत्र बनवाने या फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। यात्रा से कम से कम 10 दिन पहले यह टीका लगवाना अनिवार्य होता है, क्योंकि वैक्सीन को शरीर में प्रभावी एंटीबॉडी बनाने के लिए इतना समय चाहिए होता है।
विभाग ने सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स और पोर्ट अथॉरिटीज को भी अलर्ट कर दिया है ताकि आने-जाने वाले यात्रियों के दस्तावेजों की कड़ी जांच की जा सके। यदि कोई यात्री बिना वैध पीत ज्वर टीकाकरण प्रमाण पत्र के यात्रा करता पकड़ा जाता है, तो उसे संबंधित देश में प्रवेश से वंचित किया जा सकता है या फिर भारत लौटने पर अनिवार्य क्वारंटाइन में भेजा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रियों को अपनी टिकट बुक कराने के साथ ही वीज़ा और पासपोर्ट के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी औपचारिकताओं को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। कई बार लोग आखिरी वक्त में टीका लगवाने भागते हैं, जिससे 10 दिन की अनिवार्य अवधि पूरी नहीं हो पाती और उनकी यात्रा खतरे में पड़ जाती है।
पीत ज्वर के लक्षण और संक्रमण का गंभीर दायरा
पीत ज्वर एक तीव्र वायरल hemorrhagic fever है जो संक्रमित एडीज मच्छरों के जरिए इंसानों में फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी शामिल हैं। अधिकांश मरीज शुरुआती दौर के बाद ठीक हो जाते हैं, लेकिन लगभग 15 प्रतिशत मामलों में बीमारी खतरनाक रूप ले सकती है।
गंभीर चरण में पहुंचते ही मरीज को अत्यधिक तेज बुखार, पीलिया (त्वचा और आंखों का पीला पड़ना), पेट दर्द और आंतरिक रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याएं घेर लेती हैं। शरीर के प्रमुख अंग जैसे लिवर और किडनी फेल होने का खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे मामलों में मृत्यु दर काफी अधिक होती है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे नियंत्रित करने के लिए बेहद सख्त नियम बनाए गए हैं।
चिकित्सीय जानकारों का कहना है कि इस बीमारी का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। इलाज मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने और मरीज को सहारा देने पर केंद्रित होता है। यही कारण है कि 'इलाज से बेहतर बचाव है' के सिद्धांत पर चलते हुए टीकाकरण को एकमात्र अचूक उपाय माना गया है।
वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट और अंतरराष्ट्रीय नियम
जब कोई व्यक्ति अधिकृत केंद्र पर येलो फीवर का टीका लगवाता है, तो उसे एक विशेष अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र (International Certificate of Vaccination or Prophylaxis - ICV) जारी किया जाता है। यह प्रमाण पत्र टीकाकरण के ठीक 10 दिन बाद वैध होता है और इसकी मियाद विश्व स्वास्थ्य संगठन के नियमों के अनुसार जीवनभर (या अद्यतन नियमों के तहत निर्धारित अवधि तक) मान्य होती है।
यात्रा के दौरान यह दस्तावेज पासपोर्ट जितना ही महत्वपूर्ण होता है। आव्रजन अधिकारी विमान में चढ़ने से पहले या गंतव्य देश के एयरपोर्ट पर उतरते ही इस प्रमाण पत्र की मांग कर सकते हैं। यदि आपके पास यह दस्तावेज नहीं है, तो आपको तुरंत डिपोर्ट भी किया जा सकता है या मेडिकल देखरेख में रखा जा सकता है।
"येलो फीवर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से कम से कम दो हफ्ते पहले अपनी मेडिकल जांच करवा लें और अधिकृत केंद्र से ही टीका लगवाएं।" — डॉ. आर. के. शर्मा, वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी
आम नागरिकों और यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां
यदि आप आने वाले दिनों में अफ्रीका या लैटिन अमेरिका के किसी देश की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग की इस सूची को देखें कि किन देशों के लिए यह टीका अनिवार्य है। इसके बाद अपने नजदीकी अधिकृत अस्पताल में अपॉइंटमेंट लें। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।
इसके अलावा, यात्रा के दौरान मच्छरों से बचाव के उपाय करना भी उतना ही जरूरी है। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छर भगाने वाली क्रीम (रिपेलेंट) का इस्तेमाल करें और मच्छरदानी का उपयोग करें। भले ही आपने टीका लगवा लिया हो, लेकिन व्यक्तिगत सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता रहनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक वेबसाइटों या स्वास्थ्य bulletins से ही सही जानकारी प्राप्त करें। नियमों का पालन करके न केवल आप अपनी यात्रा को सुरक्षित बना सकते हैं, बल्कि देश को भी खतरनाक संक्रामक बीमारियों के प्रकोप से बचा सकते हैं।






