होम/देश/अक्षय कुमार को सिखाया अभिनय, बॉलीवुड में झटके खाने के बाद बांग्लादेश में ऐसे बने सुपरस्टार
देशपढ़ने में समय: 7 मिनट

अक्षय कुमार को सिखाया अभिनय, बॉलीवुड में झटके खाने के बाद बांग्लादेश में ऐसे बने सुपरस्टार

चंकी पांडे के जन्मदिन पर जानिए उनके फिल्मी सफर के अनसुने पहलू। कैसे एक मामूली घटना ने बदल दी उनकी जिंदगी और फिर वह पड़ोसी देश में जाकर छा गए।
The Freelance ब्यूरो
TheFreelance ब्यूरो
26 सितंबर 2026 • अपडेटेड
🌐Read in English →
शेयर करें:
अक्षय कुमार को सिखाया अभिनय, बॉलीवुड में झटके खाने के बाद बांग्लादेश में ऐसे बने सुपरस्टार
📷 अक्षय कुमार को सिखाया अभिनय, बॉलीवुड में झटके खाने के बाद बांग्लादेश में ऐसे बने सुपरस्टार — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • चंकी पांडे का असली नाम सुयश पांडे है और बचपन के नाम ने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई।
  • उन्होंने अपने शुरुआती करियर में अक्षय कुमार जैसे दिग्गज अभिनेताओं को अभिनय के गुर सिखाए थे।
  • हिंदी सिनेमा में काम कम मिलने पर उन्होंने बांग्लादेशी फिल्मों का रुख किया और वहां के शीर्ष अभिनेता बन गए।

भारतीय सिनेमा के गलियारों में कई ऐसे कलाकार मौजूद हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और अनूठी शैली से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। बात जब कॉमिक टाइमिंग और दमदार अदाकारी की होती है, तो जेहन में कई चेहरे उभर आते हैं। इनमें से एक ऐसा नाम भी है जिसने अपने करियर में भारी उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। हम बात कर रहे हैं जाने-माने अभिनेता चंकी पांडे की, जिनका फिल्मी सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं रहा है। उनके जीवन के कई ऐसे पन्ने हैं जिनसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं।

बचपन का गोल-मटोल अंदाज और अनूठा नामकरण

हर इंसान का एक पुश्तैनी और आधिकारिक नाम होता है, लेकिन कुछ लोगों के उपनाम उनकी पहचान का मुख्य हिस्सा बन जाते हैं। इस अभिनेता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनका जन्म मुंबई की मायानगरी में हुआ था और परिवार ने उनका नाम सुयश पांडे रखा था। बचपन के दिनों में वे काफी गोल-मटोल हुआ करते थे। उनकी देखभाल करने वाली आया यानी नैनी उन्हें प्यार से 'चंकी' पुकारा करती थीं। समय के साथ यह घरेलू नाम इतना लोकप्रिय हो गया कि उनके दोस्त और परिवार के लोग भी उन्हें इसी नाम से बुलाने लगे।

जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने असली नाम के बजाय इसी लोकप्रिय उपनाम को अपनी व्यावसायिक पहचान बनाने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ क्योंकि आज भी देश-दुनिया में लोग उन्हें इसी नाम से जानते और पहचानते हैं। उनका यह सफर इस बात का प्रमाण है कि कई बार अनौपचारिक चीजें भी इंसान की सबसे बड़ी यूएसपी बन जाती हैं।

विज्ञापन • ADVERTISEMENT

पारिवारिक दबाव और अभिनय की दुनिया में एंट्री

किसी भी मध्यम वर्गीय या पेशेवर परिवार के लिए बच्चों का डॉक्टर या इंजीनियर बनना पहली प्राथमिकता होती है। चंकी पांडे का परिवार भी इससे अछूता नहीं था। उनके माता-पिता चिकित्सा के पेशे से जुड़े हुए थे और उनकी तीव्र इच्छा थी कि उनका बेटा भी पढ़ाई-लिखाई पूरी करके डॉक्टर बने। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। स्कूली शिक्षा के दौरान, विशेषकर दसवीं कक्षा में उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। इस अकादमिक संघर्ष के कारण उनका मन पढ़ाई से उचट गया।

पढ़ाई में मन न लगने के बाद उन्होंने अपनी रुचि को पहचाना और अभिनय के क्षेत्र में हाथ आजमाने का फैसला किया। उन्होंने एक प्रतिष्ठित एक्टिंग स्कूल में दाखिला लिया और वहां गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपनी कला को निखारने के बाद उन्होंने उसी संस्थान में बतौर इंस्ट्रक्टर यानी प्रशिक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं। यही वह दौर था जब उन्होंने कई नए लोगों को अभिनय की बारीकियां सिखाईं, जो आगे चलकर देश के बड़े सितारे बने।

अक्षय कुमार को सिखाए थे शुरुआती अभिनय के गुर

फिल्मी गलियारों में यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्तमान समय के सुपरस्टार अक्षय कुमार कभी चंकी पांडे के छात्र रह चुके हैं। जब चंकी पांडे एक एक्टिंग स्कूल में प्रशिक्षण दे रहे थे, तब अक्षय कुमार ने भी वहीं से अभिनय के गुर सीखने की शुरुआत की थी। चंकी ने उन्हें शुरुआती डांस मूव्स, बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी के तरीके सिखाए थे। दोनों के बीच का यह रिश्ता बेहद गहरा और पुराना है, जिसका जिक्र कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी हो चुका है।

एक तरफ जहां चंकी पांडे खुद अपने लिए फिल्मों में बड़े ब्रेक की तलाश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ वे आने वाले समय के सितारों को तराशने का काम भी कर रहे थे। यह उनके अभिनय के प्रति समर्पण और उनकी कला की गहराई को दर्शाता है। हालांकि, दोनों कलाकारों की किस्मत ने आगे चलकर अलग-अलग रास्ते पकड़े, लेकिन उनकी यह शुरुआती कड़ी आज भी फिल्म इंडस्ट्री के अनसुने किस्सों में शुमार है।

वॉशरूम की एक अजीब घटना और पहली फिल्म

हर कलाकार के जीवन में फिल्मों में प्रवेश पाने की एक कहानी होती है। चंकी पांडे को उनकी पहली फिल्म मिलने का किस्सा बेहद दिलचस्प और अजीब है। एक शादी समारोह के दौरान वे किसी परेशानी में फंस गए। उनके पारंपरिक परिधान का नाड़ा उलझ गया था और वे उसे खोल नहीं पा रहे थे। ऐसी असहज स्थिति में उन्होंने वॉशरूम के भीतर से ही मदद की गुहार लगाई।

संयोगवश, उस समय वहां जाने-माने निर्माता पहलाज निहलानी मौजूद थे। उन्होंने आगे बढ़कर उनकी मदद की और इस तरह दोनों की पहली मुलाकात हुई। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और निर्माता उनके अंदाज से काफी प्रभावित हुए। परिणाम यह हुआ कि पहलाज निहलानी ने उन्हें अपनी आगामी फिल्म 'आग ही आग' में मुख्य भूमिका के लिए साइन कर लिया। यह घटना साबित करती है कि कई बार जीवन के अप्रत्याशित मोड़ ही सबसे बड़ी सफलता का द्वार खोलते हैं।

बांग्लादेशी सिनेमा के बेताज बादशाह बनने की कहानी

अनिल कपूर के साथ आई फिल्म 'तेजाब' ने चंकी पांडे को रातोंरात शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। उनके अभिनय और कॉमिक अंदाज को दर्शकों ने खूब सराहा। लेकिन नब्बे के दशक के आते ही हिंदी फिल्म जगत का परिदृश्य बदलने लगा। पर्दे पर खान तिकड़ी यानी शाहरुख, सलमान और आमिर खान का दौर शुरू हो चुका था, जिसके चलते कई स्थापित अभिनेताओं को मुख्य भूमिकाएं मिलना बंद हो गईं।

काम की तलाश में उन्होंने लीक से हटकर कदम उठाया और पड़ोसी देश बांग्लादेश के फिल्म उद्योग का रुख किया। वहां उन्होंने स्थानीय कलाकारों के साथ मिलकर कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं और वे वहां के सबसे लोकप्रिय और महंगे सुपरस्टार बन गए। इस बारे में उन्होंने एक बार कहा था:

"जब मुझे भारत में मुख्य धारा की फिल्मों में काम मिलना कम हो गया था, तब मैंने पड़ोसी देश का रुख किया। वहां के दर्शकों ने मुझे जो प्यार और सम्मान दिया, वह मेरे करियर का सबसे सुनहरा दौर बन गया था। वहां की फिल्मों ने मुझे एक नया जीवन दिया।" — चंकी पांडे, अभिनेता

वापसी और 'आखिरी पास्ता' के रूप में नई पारी

विदेश में सफलता के झंडे गाड़ने के बाद चंकी पांडे ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा में वापसी की। इस बार उन्होंने अपनी रणनीति बदली और मुख्य नायक के बजाय चरित्र भूमिकाओं और हास्य किरदारों को चुना। निर्देशक साजिद खान की मल्टी-स्टारर फिल्म 'हाउसफुल' सीरीज में निभाया गया 'आखिरी पास्ता' का उनका किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है। इस अनोखे और मजाकिया अंदाज ने उन्हें युवाओं के बीच एक बार फिर से बेहद लोकप्रिय बना दिया।

आज चंकी पांडे भले ही पहले की तरह मुख्य अभिनेता के रूप में नजर न आते हों, लेकिन उनकी हास्य शैली और जिंदादिल शख्सियत ने उन्हें एक सदाबहार कलाकार बना दिया है। उनके जीवन का यह सफर इस बात की प्रेरणा देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानकर अगर नई राहें तलाशी जाएं, तो सफलता जरूर मिलती है। उनका यह सफर आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए हमेशा एक मिसाल रहेगा।

द फ्रीलांस पत्रकारिता नीति (Editorial Commitment):हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की गई है।
विज्ञापन एवं अनुशंसित सामग्री • RECOMMENDED