नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — शेयर बाजार में आज यस बैंक के निवेशकों के लिए एक बहुत बुरी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के एक कड़े फैसले के बाद बैंक के शेयर धड़ाम हो गए और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बाजार खुलते ही बिकवाली का दौर शुरू हो गया और कुछ ही घंटों में शेयर का भाव काफी नीचे लुढ़क गया। आम निवेशकों के बीच इस अचानक आई गिरावट से हड़कंप मच गया है क्योंकि किसी को उम्मीद नहीं थी कि कोर्ट का यह फैसला शेयर को इतनी बुरी तरह तोड़ देगा।
यह पूरा मामला यस बैंक के एडिशनल टियर-1 यानी एटी-वन बॉन्ड के राइट-ऑफ से जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को सही माना है जिसमें बॉन्ड धारकों को राहत देने से जुड़ी बात थी। अदालत के इस रुख के बाद बैंक की मुश्किलें बढ़ गई हैं और वित्तीय जानकारों का मानना है कि इसका असर आने वाले दिनों में भी बैंक के कारोबार पर पड़ सकता है। इस झटके के बाद से ही शेयर बाजार में यस बैंक का नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।
बॉन्ड राइट-ऑफ मामले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
यस बैंक के पुराने संकट के समय जारी किए गए एटी-वन बॉन्ड को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में निवेशकों के पक्ष में या बैंक के फैसलों के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं, जिसे बैंक और संबंधित पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सर्वोच्च अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखा है। इस कानूनी स्थिति के साफ होने के बाद बाजार में अचानक डर का माहौल बन गया और निवेशकों ने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से बैंक की वित्तीय स्थिति और पुरानी देनदारियों पर नए सिरे से सवाल खड़े हो गए हैं। जिन छोटे और बड़े निवेशकों ने यस बैंक के शेयरों में अपना पैसा लगाया था, वे अब काफी डरे हुए हैं। पिछले कुछ समय से बैंक के शेयर संभलने की कोशिश कर रहे थे और निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट रहा था। लेकिन इस ताजा झटके ने बाजार की सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और शेयर धड़ाम होकर नीचे आ गिरा है।
निवेशकों के लिए अब आगे क्या है सही रास्ता
शेयर बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज फर्मों ने इस बड़ी हलचल के बाद निवेशकों को सलाह दी है कि वे घबराकर एकदम से कोई भी गलत फैसला न लें। जिन लोगों ने पहले से शेयर खरीद रखे हैं, उन्हें बाजार की चाल पर बारीक नजर रखनी चाहिए। बैंक के तिमाही नतीजे और प्रबंधन की तरफ से आने वाले बयानों के आधार पर ही आगे की रणनीति तय करनी होगी। बाजार में इस तरह की उथल-पुथल के समय धैर्य रखना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
द फ्रीलान्स की टीम ने बाजार के कई जानकारों से बात करके यह जानने की कोशिश की है कि क्या यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहेगी। जानकारों का मानना है कि यह एक शुरुआती और भावनात्मक प्रतिक्रिया है जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद आई है। जैसे-जैसे धूल बैठेगी और बैंक की तरफ से इस पर आधिकारिक सफाई आएगी, तस्वीर साफ होगी। तब तक निवेशकों को अपनी गाढ़ी कमाई को बचाने के लिए बहुत ही सावधानी के साथ शेयर बाजार में कदम उठाने की जरूरत है।






