नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में हाल ही में हुए एक बड़े घटनाक्रम के तहत सिटिजन्स फॉर पीस यानी सीजेपी संगठन के दो प्रमुख सदस्यों सौरभ दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के बाद से राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है और अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी बीच, अभिजीत दीपके का इस पूरे मामले पर पहला रिएक्शन सामने आया है जिसने सियासी हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब इस मामले पर गहराई से पड़ताल की गई तो यह बात सामने आई कि इन दोनों नेताओं की गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद हालात काफी तेजी से बदले हैं। अभिजीत दीपके ने अपने बयान में इस बात की ओर इशारा किया है कि सौरभ और आशुतोष को इस पूरी स्थिति के बारे में पहले से ही काफी कुछ अंदाजा था। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई बड़े नेता इस गिरफ्तारी के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर चुके हैं और प्रशासन की कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
तिरंगा फहराने के विवाद पर गरमाई सियासत
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब सीजेपी से जुड़े इन युवाओं ने स्वतंत्रता दिवस या किसी अन्य मौके पर तिरंगा फहराने से जुड़े कार्यक्रम को लेकर कुछ कदम उठाए। इसके तुरंत बाद प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया और अंततः तिहाड़ जेल भेज दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि तिरंगा फहराने जैसे देशभक्ति के काम के लिए युवाओं को जेल के सलाखों के पीछे धकेलना पूरी तरह से कायरतापूर्ण कदम है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी की कड़ी शब्दों में निंदा की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से बोलते हुए साफ कहा है कि देश में तिरंगा फहराना कोई अपराध नहीं है और ऐसा करने वाले युवाओं को जेल में डालना सरकार की घबराहट को दिखाता है। राहुल गांधी के अलावा आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अभिजीत दीपके का बयान और अंदरूनी खुलासे
जब अभिजीत दीपके से इस बारे में सवाल पूछे गए तो उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई ऐसे पहलुओं पर प्रकाश डाला जो अब तक आम जनता से छिपे हुए थे। दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली लौटते वक्त उन्होंने राजनीतिक बयानों और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि सौरभ और आशुतोष को इस बात का अहसास था कि उनके इन कदमों के क्या परिणाम हो सकते हैं, इसके बावजूद वे पीछे नहीं हटे।
जमीनी स्तर पर यह देखा जा रहा है कि इस गिरफ्तारी के बाद से नागरिक संगठनों और युवाओं के बीच भारी नाराजगी है। लोग सोशल मीडिया पर भी लगातार अपनी राय रख रहे हैं और प्रशासन से इन नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, सरकारी तंत्र और कानूनी एजेंसियों का अपना पक्ष है, जिसके तहत यह कार्रवाई नियमों के दायरे में किए जाने का दावा किया जा रहा है।
विपक्ष का आक्रामक रुख और आगे की कानूनी लड़ाई
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब कानूनी मोर्चे पर भी सरगर्मी तेज हो गई है। सीजेपी के वकीलों और समर्थकों का कहना है कि वे इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय और अन्य अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे ताकि दोनों नेताओं को जल्द से जल्द जमानत मिल सके। विपक्षी दलों का समर्थन मिलने से अब यह मामला केवल स्थानीय कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़ा राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके के बयानों और विपक्ष के दबाव के बाद प्रशासनिक रुख में क्या बदलाव आता है। क्या सौरभ दास और आशुतोष रांका को जल्द राहत मिलेगी या फिर यह कानूनी लड़ाई अभी और लंबी खिंचेगी, इस पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी।




