द फ्रीलान्स के डिजिटल डेस्क पर इस वक्त मुंबई दलाल स्ट्रीट से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन किसी बड़े आघात से कम साबित नहीं हुआ, जिसे बाजार विश्लेषक अब 'ब्लैक फ्राइडे' की संज्ञा दे रहे हैं। इस पूरे भूचाल के केंद्र में कोई घरेलू राजनीतिक या आर्थिक कारक नहीं, बल्कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी 'ए Accenture' के कमजोर वित्तीय नतीजे और उसका सतर्क भविष्य का अनुमान (गाइडेंस) है। जैसे ही वैश्विक स्तर पर टेक खर्च में सुस्ती के संकेत मिले, उसका सीधा असर भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) शेयरों पर बहुत गहरे रूप में दिखाई दिया।
ग्लोबल सुस्ती का भारतीय आईटी पर सीधा प्रहार
अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में छाई अनिश्चितता का साया अब सीधे तौर पर भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों पर पड़ रहा है। 'ए Accenture' द्वारा जारी किए गए हालिया नतीजों में उम्मीद से कम वृद्धि दर्ज की गई और आगे के लिए कंपनी का रुख बेहद सतर्क रहा। इस एक घटना ने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह हिला दिया। ज़ी बिजनेस और अन्य प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने देखते ही देखते निवेशकों की गाढ़ी कमाई के अरबों रुपये साफ कर दिए। निफ्टी आईटी इंडेक्स धड़ाम होकर निचले स्तरों पर आ गया।
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टीसीएस और इंफोसिस जैसे दिग्गजों में भारी गिरावट
इस वैश्विक आंधी का सबसे ज्यादा असर देश की दिग्गज आईटी कंपनियों पर पड़ा है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से लेकर इंफोसिस तक के शेयर बिकवाली के भारी दबाव में नजर आए। जागरण की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्फोसिस के संस्थापकों में शामिल नारायण मूर्ति की कंपनी सहित कई बड़े आईटी स्टॉक्स अपने 52-हफ़्ते के निचले स्तर (52-week low) के करीब पहुंच गए। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां अपने टेक बजट में बढ़ोतरी नहीं करतीं, तब तक भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण बना रहेगा।
एनएसई की सुस्त लिस्टिंग ने निवेशकों को किया निराश
एक तरफ जहां आईटी सेक्टर वैश्विक झटकों से जूझ रहा था, वहीं दूसरी तरफ दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव्स एक्सचेंज 'NSE' की बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग ने भी निवेशकों की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। दलाल स्ट्रीट पर एनएसई के शेयरों की शुरुआत बेहद फीकी रही। दैनिक भास्कर और मनी9 की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रोकरेज फर्मों ने जिस जोरदार लिस्टिंग और भारी मुनाफे की उम्मीद जताई थी, उसके मुकाबले शेयर बेहद मामूली बढ़त के साथ सूचीबद्ध हुए। निवेशकों को उम्मीद थी कि यह लिस्टिंग बाजार में जोश भरेगी, लेकिन सुस्त शुरुआत ने बाजार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया।
आगे की राह: क्या निवेशकों को घबराना चाहिए?
द फ्रीलान्स की ऑन-ग्राउंड पड़ताल यह बताती है कि यह करेक्शन केवल तात्कालिक भावनाओं पर आधारित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति का परिणाम है। महंगाई, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और पश्चिमी देशों में मंदी की आशंकाओं ने टेक खर्च को रोक दिया है। हालांकि, लॉन्ग-बेस्ड फंडामेंटल निवेशकों के लिए यह समय संयम बरतने का है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना सोचे-समझे पैनिक सेल (panic selling) करने के बजाय क्वालिटी स्टॉक्स में चुनिंदा खरीदारी का मौका तलाशा जाना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात यह साफ करते हैं कि आने वाले कुछ हफ्ते भारतीय आईटी बाजार के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं।







