बिहार की राजनीति में एक बार फिर ऐसे समीकरण बन रहे हैं, जो बड़े-बड़े राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका रहे हैं। आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव के मद्देनजर राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, बाहुबली नेता और जेडीयू से जुड़े रहे अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाकर बगावत का खुला ऐलान कर दिया है। नवादा के चुनावी मैदान में अनंत सिंह की सक्रियता ने सत्तारूढ़ गठबंधन और जेडीयू नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।
जेडीयू की आधिकारिक लाइन के खिलाफ खुला विद्रोह
एक तरफ जहां जेडीयू नेतृत्व ने अपनी पूरी ताकत पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों की जीत के झोंकने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह का तेवर पूरी तरह बागी हो चुका है। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार ने हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया और आगामी 5 तारीख को नामांकन पत्र दाखिल करने की तैयारी में हैं। इसके बावजूद, अनंत सिंह ने जेडीयू के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करने के बजाय 'जन सुराज' समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह के पक्ष में मोर्चा संभाल लिया है।
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'पेटी भरकर वोट': नवादा में अनंत सिंह का अनोखा अंदाज
नवादा के ग्रामीण और शहरी इलाकों में इन दिनों अनंत सिंह का एक अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। 'द फ्रीलान्स' की टीम को ग्राउंड से मिले इनपुट बताते हैं कि अनंत सिंह न सिर्फ अनुज सिंह के लिए प्रचार कर रहे हैं, बल्कि जनता के बीच जाकर 'पेटी भरकर वोट' देने की अपील भी कर रहे हैं। उनका यह अंदाज पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से बिल्कुल अलग है, जो स्थानीय स्तर पर भारी चर्चा का विषय बन चुका है। जनता के बीच उनकी यह पैठ और खुला समर्थन जन सुराज पार्टी के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है।
नीरज कुमार की उम्मीदवारी और 'अनंत' खतरा
जेडीयू खेमे में इस घटनाक्रम के बाद खलबली मची हुई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और MLC उम्मीदवार नीरज कुमार ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भले ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मंत्रणा कर ली हो और वे 5 तारीख को अपना पर्चा भरने जा रहे हैं, लेकिन उनकी जीत की राह में अनंत सिंह का यह 'बागी रुख' एक बहुत बड़ा कांटा बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि अनंत सिंह इसी आक्रामक तेवर में डटे रहे, तो जेडीयू के वोटों में बड़ी सेंधमारी तय है, जिसका सीधा फायदा जन सुराज समर्थित उम्मीदवार को मिल सकता है।
बिहार की राजनीति पर इसका दूरगामी असर
यह घटनाक्रम सिर्फ एक सीट या एक चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक निहितार्थ हैं। प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित 'जन सुराज' पार्टी पहले ही राज्य में तीसरे विकल्प के रूप में अपनी जमीन तलाश रही है। ऐसे में, अनंत सिंह जैसे कद्दावर और बाहुबली नेता का समर्थन मिलना जन सुराज के कैडर को बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू आलाकमान इस बगावत पर क्या कार्रवाई करता है और यह चुनाव बिहार के राजनीतिक समीकरण को किस दिशा में मोड़ता है।








