ढाका/ग्राउंड ब्यूरो — पड़ोसी देश बांग्लादेश से एक बेहद डरावनी और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई है। ईशनिंदा के एक संदिग्ध मामले में भीड़ इस कदर हिंसक हो गई कि उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं। स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और ईशनिंदा करने का गंभीर आरोप लगाया था। आरोप लगते ही इलाके में तनाव फैल गया और देखते ही देखते सैकड़ों लोगों की भीड़ ने उस शख्स को घेर लिया। भीड़ उसे मौके पर ही सजा देने के लिए उतारू थी और उसके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ ही मिनटों में मामला जानलेवा हमले में बदल गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और भारी मशक्कत के बाद पीड़ित को भीड़ के चंगुल से छुड़ाया। पुलिस की टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए घायल व्यक्ति को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया ताकि उसका इलाज हो सके और उसकी जान बचाई जा सके। पुलिस का मकसद किसी तरह कानून व्यवस्था बनाए रखना और उस शख्स को सुरक्षित रखना था। लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था। हमलावर पुलिस की मौजूदगी और कार्रवाई से पूरी तरह भड़के हुए थे और वे किसी भी कीमत पर आरोपी को जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे।
अस्पताल के अंदर घुसकर की गई अंधाधुंध मारपीट
पुलिस जब घायल व्यक्ति को लेकर अस्पताल के सुरक्षित वार्ड में पहुंची, तो भीड़ ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ ही देर में उग्र भीड़ ने अस्पताल के सुरक्षा घेरे को तोड़ दिया और सीधे अंदर घुस गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ इतनी बेकाबू थी कि अस्पताल का स्टाफ और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी डर के मारे पीछे हट गए। हमलावरों ने अस्पताल के कमरों में तोड़फोड़ की और पुलिस के सामने ही उस घायल शख्स को खींचकर बाहर निकाला। भीड़ ने अस्पताल के परिसर के अंदर ही लाठी-डंडों और पत्थरों से उस पर दोबारा हमला कर दिया। उस बेबस शख्स को बचाने के लिए पुलिस बल संख्या में कम पड़ गया और वे उग्र भीड़ के आगे बेबस नजर आए।
इस निर्मम और अंधाधुंध पिटाई से उस शख्स की हालत बेहद गंभीर हो गई। भीड़ के हटने के बाद डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गंभीर चोटों और अत्यधिक खून बह जाने के कारण उस व्यक्ति ने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की और हिंसा या सांप्रदायिक तनाव को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन अब इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रहा है कि आखिर कैसे इतनी बड़ी भीड़ अस्पताल के अंदर तक घुसने में कामयाब हो गई।
कानून को हाथ में लेने वाली भीड़ पर उठे गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज वारदात ने देश में कानून के राज और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति पर यदि कोई गंभीर आरोप भी है, तो देश का संविधान और अदालतें तय करेंगी कि उसे क्या सजा मिलनी चाहिए। भीड़ द्वारा इस तरह कानून को अपने हाथ में लेना और अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर घुसकर हत्या कर देना सभ्य समाज के लिए एक बड़ा कलंक है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।
प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के बाद भीड़ अचानक एकजुट हुई थी। अफवाहों ने लोगों के गुस्से को इस हद तक भड़का दिया कि वे किसी भी नियम-कानून को मानने को तैयार नहीं थे। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने इस हिंसा को भड़काने में मुख्य भूमिका निभाई थी। बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से इस तरह की मॉब लिंचिंग और हिंसक घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों और आम नागरिकों में भारी डर का माहौल बना हुआ है। सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने अब इन असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती
घटना के बाद से अस्पताल और आसपास के इलाकों में छावनी जैसा माहौल है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने को कहा है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की पहचान के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस प्रकार की घटनाएं देश की न्याय व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अपनी ग्राउंड रिपोर्ट आगे भी साझा करती रहेगी।







