नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — आज के समय में जब भी किसी का जन्मदिन आता है, तो सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ जाती है। लोग धूमधाम से पार्टियां करते हैं और खुशियां मनाते हैं। लेकिन हमारे समाज में एक ऐसा वर्ग भी मौजूद है जो इन सब चीजों से दूर रहना चाहता है। उन्हें अपना जन्मदिन मनाना बिल्कुल पसंद नहीं आता है। जब उनसे इस बारे में पूछा जाता है, तो वे अक्सर चुप्पी साध लेते हैं या फिर इस दिन को आम दिनों की तरह ही बिताना पसंद करते हैं।
मनोरोग विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों ने इस विषय पर कई तरह के अध्ययन किए हैं। उनके अनुसार, जो लोग अपना जन्मदिन सेलिब्रेट नहीं करना चाहते, उनके दिमाग में एक अलग तरह की मानसिक प्रक्रिया चल रही होती है। कुछ लोगों को इस बात की चिंता होती है कि वे अपनी जिंदगी में अब तक क्या हासिल कर पाए हैं। वे अपनी उम्र बढ़ने और समय बीतने के अहसास से थोड़े असहज हो जाते हैं। ऐसे में जन्मदिन का दिन उन्हें उनकी असफलताओं या उम्र बढ़ने की याद दिलाता है।
बर्थडे पार्टी और सामाजिक दबाव का खेल
दूसरी तरफ, कई सेलिब्रिटीज और उनके परिवारों में जन्मदिन की रौनक देखने लायक होती है। हाल ही में अभिनेता अरबाज खान की बेटी की पहली बर्थडे पार्टी में पूरा परिवार इकट्ठा हुआ। इस पार्टी में सलमान खान और सलीम खान जैसे बड़े सितारे भी नजर आए। मीडिया में ऐसी खबरें और तस्वीरें आम बात हैं, जहां बड़े पैमाने पर जश्न मनाया जाता है। लेकिन आम आदमी की जिंदगी में हर कोई इस तरह की लाइमलाइट या भीड़भाड़ पसंद नहीं करता है।
जब लोगों पर किसी पार्टी को आयोजित करने या उसमें शामिल होने का सामाजिक दबाव बनाया जाता है, तो वे तनाव में आ जाते हैं। कई लोगों को जन्मदिन के दिन मिलने वाली ढेर सारी बधाइयां और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना पसंद नहीं होता। वे अंतर्मुखी स्वभाव के होते हैं और अकेले रहना या अपने परिवार के साथ शांत समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं। उनके लिए जन्मदिन कोई खुशी का मौका नहीं बल्कि एक अतिरिक्त मानसिक तनाव बन जाता है।
सार्वजनिक हस्तियों के जन्मदिन और आम जनता की सोच
राजनीतिक गलियारों और फिल्मी दुनिया में जन्मदिन मनाने के अपने अलग मायने होते हैं। हाल ही में खानपुर विधायक का जन्मदिन भी काफी चर्चा में रहा, जहां समर्थकों ने बड़े पैमाने पर उनके दीर्घायु होने की कामना की। ऐसे आयोजनों में जनता और नेताओं के बीच मेल-मिलाप का एक जरिया बनता है। लेकिन आम इंसान इन बड़े आयोजनों से खुद को जोड़ नहीं पाता है। उनके लिए जन्मदिन का मतलब केवल केक काटना नहीं बल्कि जीवन के एक और साल को पूरा करना है।
अगर आपके आस-पास भी कोई ऐसा शख्स है जो अपना जन्मदिन मनाने से कतराता है, तो उसे गलत नहीं समझना चाहिए। हर इंसान का स्वभाव और सोचने का तरीका अलग होता है। कुछ लोगों को सरप्राइज पार्टी अच्छी लगती है, तो कुछ लोग अपनी शांति भंग नहीं होने देना चाहते। मनोविज्ञान यही सिखाता है कि लोगों की इन व्यक्तिगत पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।
मानसिक शांति और निजी पसंद का सम्मान
अंत में यही समझ आता है कि जन्मदिन मनाना या न मनाना पूरी तरह से व्यक्ति की अपनी पसंद पर निर्भर करता है। इसमें किसी भी प्रकार की मानसिक बीमारी या समस्या नहीं होती है। यह केवल इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति अपनी खुशियों को किस तरह से व्यक्त करना चाहता है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में यह साफ हुआ है कि समाज के दबाव से दूर रहकर अपनी शर्तों पर जीना ही असली मानसिक सुकून देता है।




