नई दिल्ली के एक व्यस्त इलाके में आज सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक बहुमंजिला जर्जर इमारत अचानक भरभरा कर नीचे आ गिरी। द फ्रीलान्स की टीम जब मौके पर पहुंची तो चारों तरफ धूल का गुबार और चीख-पुकार मची हुई थी। इस भयानक हादसे में अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, जबकि मलबे के नीचे फंसे अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें युद्ध स्तर पर जुटी हुई हैं। चश्मदीदों के मुताबिक यह हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों में जो तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए थे, उसके बाद से इस इमारत की दीवारों में चौड़ी दरारें आ गई थीं। रहवासियों ने कई बार मकान मालिक और स्थानीय प्रशासन को इस खतरे के बारे में आगाह भी किया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कमजोर हो चुकी नींव और भूकंप के झटकों के मिले-जुले असर ने इस पुरानी इमारत को चंद सेकंड में मलबे के ढेर में बदल दिया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस इमारत का निर्माण नियमों के विपरीत किया गया था।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे दमकल विभाग और राहत कर्मियों ने मोर्चा संभाल लिया। मलबे को हटाने के लिए भारी मशीनों और कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मलबे के नीचे अभी भी दो से तीन लोग फंसे हो सकते हैं, जिनकी सांसें बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। एम्बुलेंस की गाड़ियां लगातार अस्पताल और घटनास्थल के बीच दौड़ रही हैं ताकि घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सके।
इलाके के लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि पुरानी और जर्जर इमारतों के खिलाफ समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। हर साल मानसून या ऐसे हादसों के वक्त प्रशासन की नींद खुलती है, लेकिन कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और अवैध निर्माणों की पोल खोलकर रख दी है। स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भूकंप के बाद सुरक्षा उपायों पर उठे गंभीर सवाल
इस दुखद घटना के बाद अब यह सवाल सबसे बड़ा हो गया है कि क्या दिल्ली की पुरानी कॉलोनियों में बनी इमारतें प्राकृतिक आपदाओं को झेलने के काबिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप के बाद इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट होना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके। बहुत से पुराने मकानों में बिना इंजीनियर की सलाह के मरम्मत या अवैध निर्माण करा लिया जाता है, जो बाद में जानलेवा साबित होता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन अब हरकत में आया है और आसपास की अन्य खतरनाक इमारतों की पहचान करने का काम शुरू कर दिया गया है। लोगों से अपील की जा रही है कि यदि उनके आस-पास की किसी इमारत में ऐसी दरारें दिखती हैं तो तुरंत उसकी सूचना अधिकारियों को दें। फिलहाल पूरी नजर राहत और बचाव कार्य पर टिकी है ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियों को बचाया जा सके।




