उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों के ऐलान और नामांकन के साथ ही बीजेपी के भीतर का अंदरूनी असंतोष खुलकर बाहर आने लगा है। यह असंतोष अब पार्टी के लिए एक बड़ा सियासी संकट बनता जा रहा है। लगभग 12 साल पहले बीजेपी ने जिस धर्मेंद्र कश्यप के लिए अपनी दिग्गज नेता मेनका गांधी और वरुण गांधी की सीटों में फेरबदल किया था, आज उसी कश्यप नेता ने पार्टी से दूरी बनानी शुरू कर दी है।
रुहेलखंड में बीजेपी की 'सोशल इंजीनियरिंग' पर संकट
रुहेलखंड के सबसे बड़े अति-पिछड़ा (OBC) चेहरों में शुमार और आंवला सीट से दो बार के बीजेपी सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप पार्टी से बागी हो चुके हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया बायो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हटा दी है और उनके आवास से बीजेपी का झंडा भी उतर चुका है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वह जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं और उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात भी हो चुकी है। यदि वह सपा में शामिल होते हैं, तो रुहेलखंड बेल्ट में बीजेपी का 'सोशल इंजीनियरिंग' समीकरण बुरी तरह बिगड़ सकता है।
जब धर्मेंद्र कश्यप के लिए बदली गई थीं मेनका-वरुण की सीटें
धर्मेंद्र कश्यप ने 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 2013 में सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। वह बरेली की बिथरी चैनपुर विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके थे। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने आंवला लोकसभा सीट से दावेदारी ठोकी, जहां से उस समय मेनका गांधी सांसद थीं। पार्टी को धर्मेंद्र कश्यप के लिए मेनका गांधी की सीट बदलनी पड़ी, जिसके चलते वरुण गांधी की सीट पर भी असर पड़ा था। पार्टी ने मेनका गांधी को आंवला के बजाय पीलीभीत और वरुण गांधी को सुल्तानपुर भेज दिया था।
राज्यसभा टिकट न मिलना बना बगावत की वजह
वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद धर्मेंद्र कश्यप को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजकर सम्मानित करेगी। लेकिन हाल ही में जारी बीजेपी की राज्यसभा प्रत्याशियों की सूची से उनका नाम गायब था। पार्टी ने उसी क्षेत्र से आने वाले अन्य चेहरों को प्राथमिकता दी। इससे खिन्न होकर उन्होंने सोशल मीडिया पर बगावती तेवर अपना लिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल इस रिपोर्ट के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। यह मामला राजनीतिक गलियारों में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। साभार: संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स / सोशल मीडिया।





