नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के मिनट्स आज जारी होने वाले हैं। इस अहम रिपोर्ट पर दुनिया भर के शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय निवेशकों की भी सांसें थमी हुई हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस दस्तावेज से यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर क्या फैसले लिए जा सकते हैं। अमेरिकी बाजार हाल ही में बंद रहे थे, लेकिन फ्यूचर्स मार्केट में कारोबार सीमित दायरे में चल रहा है। आज आने वाले इन मिनट्स से ग्लोबल इकॉनमी की दिशा तय होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
इस बीच, अमेरिकी फैसलों के असर से विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और यह अपने ऐतिहासिक निचले स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने देश के आयातकों और नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ, वैश्विक स्तर पर अन्य मुद्राएं जैसे यूरो भी कमजोर पड़ी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती या ठहराव पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, तब तक मुद्रा बाजार में यह उथल-पुथल बनी रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक भी इस पूरी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है ताकि घरेलू बाजार को ज्यादा झटकों से बचाया जा सके।
रुपये में कमजोरी और वैश्विक बाजारों की हलचल
घरेलू शेयर बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार में इस समय गजब की सुस्ती और सतर्कता देखी जा रही है। कारोबारी किसी भी बड़े जोखिम से बचने के लिए फेडरल रिजर्व की इस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इस हफ्ते निवेशकों का ध्यान केवल FOMC मिनट्स पर ही नहीं है, बल्कि आने वाले चौथे तिमाही के जीडीपी अनुमान और पीसीई प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों पर भी टिका हुआ है। ये सभी आंकड़े मिलकर तय करेंगे कि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालेंगे या फिर नया निवेश करेंगे। जानकारों का कहना है कि आज का दिन निवेशकों के लिए बेहद संभलकर चलने वाला साबित हो सकता है।
दूसरी ओर, अमेरिकी बाजार से जुड़े कुछ अन्य घटनाक्रम भी वैश्विक पटल पर चर्चा में हैं, हालांकि उनका सीधा असर स्थानीय शेयर बाजार पर नहीं है। कॉरपोरेट जगत में कंस्टेलेशन ब्रांड्स के नतीजे भी आज आने वाले हैं, जिन पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की खास नजर है। ये नतीजे अमेरिकी कंज्यूमर मार्केट की सेहत का हाल बताएंगे कि वहां आम लोग कितनी खरीदारी कर रहे हैं। इन तमाम अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बीच भारतीय बाजार पूरी तरह से अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख का आकलन करने में जुटा है।
ब्याज दरों को लेकर क्या हैं निवेशकों की उम्मीदें
आम तौर पर फेडरल रिजर्व के मिनट्स यह बताते हैं कि बैठक में शामिल अधिकारियों के दिमाग में क्या चल रहा था। उन्होंने महंगाई को रोकने के लिए अर्थव्यवस्था को लेकर क्या अनुमान लगाए हैं और आगे चलकर ब्याज दरों में कटौती होगी या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब इस रिपोर्ट में छिपे होते हैं। यदि मिनट्स में यह संकेत मिलता है कि महंगाई अभी भी चिंता का विषय है और ब्याज दरों में कटौती में वक्त लग सकता है, तो शेयर बाजारों में बिकवाली देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, अगर नरमी के संकेत मिले तो बाजारों में तेजी लौट सकती है।
भारत जैसे विकासशील देशों के लिए अमेरिकी ब्याज दरें बहुत मायने रखती हैं। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी बॉण्ड्स में लगा देते हैं। इसी वजह से भारतीय रुपया कमजोर होता है और शेयर बाजार पर दबाव बनता है। आज आने वाले मिनट्स से यह साफ हो जाएगा कि विदेशी फंड्स का रुख आने वाले हफ्तों में किस तरफ रहने वाला है। निवेशक और ब्रोकरेज फर्म्स इसी एक रिपोर्ट के आधार पर अपनी आगे की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
फेडरल रिजर्व के आंकड़ों से तय होगी आगे की राह
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि बाजार के छोटे और मंझोले निवेशक इस समय किसी भी बड़ी पोजीशन को लेने से बच रहे हैं। आज शाम जब यह रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, उसके बाद ही बाजार में कोई ठोस रुझान देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों की सलाह है कि बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि बहुत ही सोच-समझकर अपने निवेश के फैसले लेने चाहिए। वैश्विक अर्थव्यवस्था के ये ताने-बाने आने वाले दिनों में भारत के वित्तीय बाजार की तस्वीर तय करेंगे।


