लखनऊ और मिर्जापुर के सियासी गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। यह नाम किसी पेशेवर राजनेता का नहीं, बल्कि एक जानी-मानी पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का है। प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद अब उन्होंने सीधे जनता के बीच आकर राजनीति करने का फैसला किया है। उन्होंने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का नाम 'जननीति भारत' रखा है। इस बड़े ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है। आम जनता और राजनीतिक दलों के बीच यह सवाल बड़ा हो गया है कि एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी का यह नया कदम कितना असर दिखाएगा।
अपनी नई पार्टी के गठन के साथ ही दिव्या मित्तल ने जनता के सामने अपने इरादे भी साफ कर दिए हैं। उन्होंने मीडिया के सामने तीन मुख्य वचन रखे हैं जो उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा बनेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि उनकी पार्टी के पास काम करने के लिए पर्याप्त फंड्स और स्पष्ट सोच है। उनका यह भी कहना है कि वे बिना किसी पुराने सियासी दबाव के सीधे जमीनी मुद्दों पर काम करेंगी। उनके समर्थकों का मानना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी का अनुभव शासन चलाने और योजनाओं को जमीन पर उतारने में बहुत काम आएगा।
मिर्जापुर सदर सीट से लड़ेंगी विधानसभा चुनाव
अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हुए दिव्या मित्तल ने साल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने का पक्का मन बना लिया है। उन्होंने साफ किया है कि वे मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। मिर्जापुर से उनका पुराना और गहरा नाता रहा है, जहां उन्होंने बतौर अधिकारी प्रशासनिक कामकाज संभाला था। स्थानीय लोग उनके काम करने के तरीके से अच्छी तरह वाकिफ हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए इसी क्षेत्र को चुना है। उनके इस फैसले से स्थानीय स्तर पर चुनावी सरगर्मी अभी से बढ़ गई है।
दिव्या मित्तल के राजनीति में आने की चर्चा पिछले कई दिनों से चल रही थी। प्रशासनिक पद छोड़ने के बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। आखिरकार उन्होंने अपने भविष्य की योजना का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले भी कई पूर्व अधिकारी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। कुछ को सफलता मिली तो कुछ अपनी पहचान बनाने में संघर्ष करते दिखे। ऐसे में 'जननीति भारत' पार्टी का भविष्य क्या होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि 2027 के चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
नई पार्टी और तीन बड़े वचन
नई पार्टी के ऐलान के दौरान दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक ईमानदारी का मेल दिखाने की बात कही। उन्होंने जनता से वादा किया है कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाएगी। साथ ही युवाओं और महिलाओं के विकास पर उनका सबसे ज्यादा जोर रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति में बदलाव लाने के लिए जनता का साथ सबसे जरूरी है। उनके पास अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार है।
जमीनी स्तर पर इस नई पार्टी को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां पढ़े-लिखे युवाओं में एक नए विकल्प को लेकर उत्साह है। वहीं दूसरी तरफ पुराने राजनीतिक दलों के नेता इसे शुरुआती दौर की चमक बता रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि मिर्जापुर के लोग इस बदलाव को बहुत गौर से देख रहे हैं। प्रशासनिक सेवा से निकलकर जनता की अदालत में उतरीं दिव्या मित्तल की यह राह आसान नहीं होगी। उन्हें स्थापित दलों के मजबूत नेटवर्क से मुकाबला करना होगा।
चुनावी रण में कितनी असरदार होगी जननीति भारत
साल 2027 के चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। दिव्या मित्तल की पार्टी 'जननीति भारत' के आने से तीसरे मोर्चे की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से जाति और समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में विकास और प्रशासनिक दक्षता के मुद्दे पर वोट मांगना एक नया प्रयोग साबित हो सकता है।
हमारी ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम मतदाता अब पारंपरिक वादों से आगे की सोच रहा है। लोग ऐसे नेताओं को देखना चाहते हैं जो सीधे उनकी समस्याओं का समाधान कर सकें। दिव्या मित्तल की साफ-सुथरी छवि उनके लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकती है। हालांकि, संगठन को मजबूत करना और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आगे भी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।






