दक्षिण भारत की सबसे पवित्र और बड़ी नदियों में शुमार गोदावरी इन दिनों एक अलग ही कारण से सुर्खियों में है। पिछले कुछ दिनों में इस नदी के अलग-अलग हिस्सों से बेहद दिल दहला देने वाली खबरें सामने आई हैं। आंध्र प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक, गोदावरी नदी में कूदकर जान देने की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में न सिर्फ बड़े लोग बल्कि छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी इसका शिकार हुए हैं। एक तरफ जहां प्राकृतिक बहाव और उफान लोगों के लिए खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव के चलते लोग खुद अपनी जिंदगी खत्म करने का खौफनाक कदम उठा रहे हैं।
ताजा मामलों की बात करें तो आंध्र प्रदेश में एक पंचायत राज इंजीनियर समेत तीन लोगों ने गोदावरी नदी में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। हालांकि, गनीमत यह रही कि इस दर्दनाक वाकये के दौरान एक छोटे से पोते को स्थानीय मछुआरों ने समय रहते बचा लिया। मछुआरों की सूझबूझ से एक मासूम की जान तो बच गई, लेकिन परिवार के बड़ों के इस कदम ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। इसी तरह की एक अन्य घटना महाराष्ट्र में भी सामने आई, जहां एक टीचर ने अपनी कार जानबूझकर नदी में गिरा दी। इस कार में दो मासूम बच्चे भी सवार थे। बताया जा रहा है कि इस घटना से ठीक पहले आरोपी टीचर ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर सुसाइड करने की बात लिखी थी।
व्हाट्सएप स्टेटस और दिल दहला देने वाले खुलासे
जांच में यह भी सामने आया है कि गोदावरी नदी में कार गिराने वाले टीचर ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी मंसा जाहिर करने के लिए किया था। व्हाट्सएप स्टेटस पर आत्महत्या का कारण लिखने के बाद उसने अपने दो मासूम बच्चों के साथ नदी में छलांग लगा दी। इस सनसनीखेज घटना के बाद से शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों से लेकर आम लोगों तक, हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर मानसिक तनाव किस हद तक बढ़ गया है कि लोग अपने ही जिगर के टुकड़ों को इस तरह मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। पुलिस अब इन सभी मामलों के तकनीकी पहलुओं और चैट की गहराई से जांच कर रही है ताकि इसके पीछे की असली वजह साफ हो सके।
एक और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना में एक दम्पति ने अपने तीन साल के मासूम बच्चे को रात के वक्त अकेला छोड़ दिया और उफनती हुई गोदावरी नदी में छलांग लगा दी। मां-बाप के इस तरह अचानक नदी में कूद जाने के बाद वह छोटा बच्चा सड़क किनारे खड़े स्कूटर से चिपक कर घंटों रोता रहा। सुबह जब लोगों ने उस लावारिस बच्चे को रोते हुए देखा और मामले की पड़ताल की, तब जाकर इस भयानक हादसे का खुलासा हुआ। इस घटना ने हर उस शख्स की आंखें नम कर दीं जिसने भी इसके बारे में सुना। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ऐसे मामलों में लगातार गश्त बढ़ा रहे हैं, लेकिन आत्महत्या की इन बढ़ती घटनाओं ने सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
त्योहार की खुशियों के बीच नदी में डूबे दो युवक
सिर्फ आत्महत्या के मामले ही नहीं, बल्कि गोदावरी नदी में डूबने से होने वाले हादसों का सिलसिला भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। गिरिडीह क्षेत्र से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है जहां होली का जश्न पल भर में मातम में बदल गया। त्योहार की खुशियां मनाने गए दो युवक गोदावरी नदी के तेज बहाव में डूब गए। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची और करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों युवकों के शवों को बाहर निकाला गया। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
इन तमाम घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि गोदावरी नदी के आसपास सुरक्षा के इंतजामों को और ज्यादा पुख्ता करने की जरूरत है। जहां एक ओर नदी का जलस्तर और उसका तेज बहाव हादसों को न्योता दे रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों में बढ़ता मानसिक तनाव और निराशा आत्महत्या जैसे चरम कदम उठाने पर मजबूर कर रही है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा और अपनों के साथ संवाद मजबूत करना होगा। प्रशासन भी अब नदी के पुलों और संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ाने की योजना बना रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
प्रशासन की बढ़ती चौकसी और काउंसलिंग की जरूरत
लगातार सामने आ रही इन दुखद खबरों के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन ने गोदावरी के पुलों के पास निगरानी और तेज कर दी है। पुलिसकर्मी अब ऐसे लोगों पर नजर रख रहे हैं जो अकेले या संदिग्ध हालत में नदी के आसपास घूमते नजर आते हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हेल्पलाइन के बारे में भी जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि तनाव में डूबे लोग समय रहते मदद मांग सकें। समाज के हर वर्ग को मिलकर यह सोचना होगा कि कैसे ऐसी जानलेवा मानसिक स्थिति से जूझ रहे लोगों का समय पर हाथ थामा जाए, ताकि गोदावरी जैसी पवित्र नदियां आंसुओं और हादसों का गवाह बनने से बच सकें।






