वैश्विक बाजार में हलचल और सोने-चांदी की चाल
भारतीय सर्राफा बाजार से लेकर ग्लोबल कमोडिटी मार्केट तक इन दिनों सोने और चांदी की कीमतों को लेकर जोरदार चर्चा हो रही है। वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसलों के बीच बुलियन मार्केट में निवेशकों की नजरें लगातार टिकी हुई हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में एक नया और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, इस तेजी के बीच बाजार के जानकारों ने निवेशकों को सतर्क रहने की भी सलाह दी है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हाल ही में सोने और चांदी के भाव में रिकॉर्ड स्तर देखने को मिले हैं। ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न कैरेट के सोने और चांदी के दाम उच्च स्तर पर बने हुए हैं। आम आदमी के मन में अब यही सवाल है कि क्या यह समय सोने में निवेश करने का सही है या फिर आने वाले दिनों में कीमतें नीचे गिर सकती हैं।
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ग्लोबल बैंक जेफरीज की चौंकाने वाली भविष्यवाणी
दुनियाभर के बाजारों पर नजर रखने वाली मशहूर ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने सोने की कीमतों को लेकर अब तक की सबसे बड़ी और अहम भविष्यवाणी की है। जेफरीज के अनुसार, आने वाले महीनों में सोने की कीमत 10,000 डॉलर प्रति औंस के पार जा सकती है। अगर भारतीय मुद्रा यानी रुपये के हिसाब से गणना की जाए, तो यह कीमत करीब 3.08 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बैठती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डेट मार्केट, कमजोर होती यील्ड और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी किए जाने से बुलियन मार्केट को सबसे मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। यही वजह है कि लॉन्ग टर्म के लिहाज से सोने की चमक फीकी पड़ने के बजाय और अधिक तेज होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
"अगर सोने का भाव वैश्विक स्तर पर एक निश्चित दायरे में आता है, तो निवेशकों के लिए इसे धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में शामिल करने का यह सबसे सही मौका साबित हो सकता है। भारतीय परिवारों और शादियों के सीजन में सोने की पारंपरिक मांग हमेशा कीमतों को सुरक्षा कवच देती है।" — अनुज गुप्ता, सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट
विशेषज्ञों की राय: क्या अभी खरीदें या करें इंतजार?
इंटेलीसिस वेंचर्स के फाउंडर और सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एंड कमोडिटी एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन के मुताबिक, बाजार में जो दिखता है, असल में उसका गणित काफी अलग होता है। फेडरल रिजर्व की घोषणाओं से पहले ही सोशल मीडिया पर ब्याज दरों को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं थीं, जिन्हें बाजार पहले ही डिस्काउंट कर चुका था। यही कारण है कि शुरुआती हल्की सुस्ती के बाद बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे निवेशकों के लिए फिजिकल सोना या चांदी खरीदना बहुत आसान सौदा नहीं है। बाजार में जब आप फिजिकल सोना बेचने जाते हैं, तो ज्वैलर्स द्वारा भारी डिस्काउंट काट लिया जाता है। इसलिए बिना सोचे-समझे इस अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय बाजार में किसी बड़े करेक्शन या डिप का इंतजार करना ही समझदारी भरा फैसला माना जा रहा है।
दीवाली तक कहां तक पहुंच सकते हैं दाम?
कमोडिटी बाजार के जानकारों का अनुमान है कि साल के अंत तक यानी दीवाली के आसपास सोना अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़कर नए शिखर को छू सकता है। शॉर्ट टर्म में भले ही बाजार में थोड़ा उतार-चढ़ाव बना रहे, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह बाजार काफी मुफीद साबित हो सकता है। चांदी के दामों को लेकर भी एक्सपर्ट्स का यही कहना है कि यह आने वाले महीनों में निवेशकों को चौंका सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी कमोडिटी में पैसा लगाते वक्त अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें। इसके अलावा, बाजार में रिस्क को मैनेज करने के लिए स्टॉपलॉस का कड़ाई से पालन करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि पिछले रिटर्न इस बात की गारंटी नहीं देते कि भविष्य में भी वैसी ही तेजी बरकरार रहेगी।







