नई दिल्ली: तकनीक जहां एक ओर इंसानी जीवन को सुगम बना रही है, वहीं इसका दुरुपयोग किस हद तक खतरनाक हो सकता है, इसकी बानगी हाल ही में भारतीय सिनेमा जगत में देखने को मिली है। बहुचर्चित फिल्म 'देवरा' के सुपरहिट गाने 'चुट्टामल्ले' (Chuttamalle) पर अभिनेत्री जाह्नवी कपूर का एक एआई-मॉर्फ्ड (AI-morphed) यानी डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस घिनौनी हरकत पर फिल्म के मुख्य अभिनेता जूनियर एनटीआर (Jr NTR) का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। 'द फ्रीलान्स' की ऑन-द-ग्राउंड पड़ताल और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनियंत्रित इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
'घिनौना और शर्मनाक अपराध': जूनियर एनटीआर का कड़ा रुख
जैसे ही यह मामला अभिनेता जूनियर एनटीआर के संज्ञान में आया, उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस एआई वीडियो को 'घिनौना, शर्मनाक और बेहद घटिया काम' करार दिया। अभिनेता ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस तरह की हरकतें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि वह इस मामले में शामिल तत्वों को कतई नहीं बख्शेंगे और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जूनियर एनटीआर का यह तेवर साफ बयां करता है कि फिल्म इंडस्ट्री अब एआई के जरिए होने वाली मानहानि और महिला कलाकारों के उत्पीड़न के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
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महिलाओं का सम्मान और हमारी सांस्कृतिक गरिमा
अपनी तीखी प्रतिक्रिया में जूनियर एनटीआर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे देश में, जहां महिलाओं को पूजनीय माना जाता है, इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल करके उनका अपमान करना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि कला और मनोरंजन के मंच पर तकनीक का सकारात्मक उपयोग होना चाहिए, न कि किसी की छवि को धूमिल करने के लिए इसका हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल रहे इस डीपफेक कंटेंट ने समाज के हर वर्ग को झकझोर कर रख दिया है।
कानूनी शिकंजा और सरकार से सख्त अपील
इस पूरे प्रकरण के बाद केवल सोशल मीडिया पर रोष ही व्यक्त नहीं किया गया है, बल्कि पुख्ता कानूनी कदम उठाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। जूनियर एनटीआर और उनकी कानूनी टीम उन अज्ञात लोगों की पहचान करने में जुटी है जिन्होंने इस मॉर्फ्ड वीडियो को सबसे पहले क्रिएट और सर्कुलेट किया। इसके साथ ही, सिने जगत से जुड़े कई कलाकारों और विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि डीपफेक और एआई के दुरुपयोग को रोकने के लिए देश में और अधिक कड़े और तुरंत लागू होने वाले कानून बनाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
साइबर सुरक्षा और एआई एथिक्स के सामने बड़ी चुनौती
'द फ्रीलान्स' के विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला महज एक सेलिब्रिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा का भी एक गंभीर मुद्दा है। एआई टूल्स की आसान उपलब्धता के कारण आज कोई भी व्यक्ति किसी की भी अनुमति के बिना उसका फर्जी वीडियो या तस्वीर बना सकता है। जब तक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और सख्त सजा का प्रावधान लागू नहीं होता, तब तक इंटरनेट पर इस तरह के डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाना नामुमकिन सा लगता है।








